नई सरकार बनने के बाद ही चालूृ हो सकेंगी 22 रेत खदानें

नई सरकार बनने के बाद ही चालूृ हो सकेंगी 22  रेत खदानें

Ajay Khare | Publish: Dec, 08 2018 08:48:04 PM (IST) Narsinghpur, Narsinghpur, Madhya Pradesh, India

छह माह बाद भी पंचायतों को नहीं मिल सका है रेत के खनन और विक्रय का अधिकार

नरसिंहपुर । ग्राम पंचायतों को रेत खनन और विक्रय का अधिकार देने का फैसला ६ माह पहले किया गया था। लेकिन अभी तक एक पंचायत को छोडक़र २३ पंचायतों को यह अधिकार नहीं मिल सका है जिसका सीधा लाभ रेत माफिया उठा रहा है और मनमाने दामों पर रेत बेचकर लाखों के वारे न्यारे कर रहा है।

पूरे प्रदेश सहित इस जिले में 6 महीने पहले ग्राम पंचायतों को रेत खदानें आवंटित करने का निर्णय शासन स्तर पर लिया गया था । लेकिन 6 महीने बाद भी जिले में सिर्फ ग्राम पंचायत घूरपूर की रेत खदान ही चल रही है शेष रेत खदानें कानूनी उलझन में फंस गई हैं। सूत्रों की मानें तो पंचायतों की रेत खदानें चालू न हो पाने के पीछे रेत माफिया की बड़ी भूमिका है। पहले इन्हें ५ माह तक वन विभाग से एनओसी नहीं मिली फिर खनिज विभाग की काफी लिखापढ़ी के बाद जब वहां से एनओसी मिली तो मामला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सीटीओ यानि कंसन्ट टू ऑपरेट में फंस गया। बोर्ड से सिर्फ ३ रेत खदानों को सीटीओ मिल सकी है जिनमें गाडरवारा की बैरागढ़ और चीचली और गोटेगांव की बेलखेड़ी खदान शामिल है। जबकि २२ खदानों के प्रकरण बोर्ड के पास सीटीओ के लिए लंबित हैं। जानकारी के मुताबिक बोर्ड के पास सितंबर माह में फाइलें पहुंचा दी गई थीं पर वहां से खदानों को सीओटी नहीं मिली। जिसके बाद इनकी स्वीकृति आचार संहिता के दायरे में आ गई। उम्मीद की जा रही है कि आचार संहिता खत्म होते ही ग्राम पंचायतों की खदानों को स्वीकृति मिल जाएगी और पंचायतें अपने स्तर पर रेत का खनन कर विक्रय कर सकेंगी।


इन खदानों को नहीं मिली सीटीओ-
करेली की धर्मपुरी, गाडरवारा की चिरहकला, नरसिंहपुर की सिमरिया, भूत पिपरिया, बारूरेवा,गाडरवारा की नांदनेर, भूतियाढाना, करेली की जल्लापुर, देवाकछार,तेंदूखेड़ा की इमझिरा, गोटेगांव की झांसी घाट, गंगई, बेलखेड़ी, गाडरवारा की चीचली,करेली की रेवानगर, गाडरवारा की चोर बरेहटा, गांगई, अजंदा , बगदरा, टेकापार, कुड़ारी, दिघोरी, खिर्रिया ग्राम पंचायतों को सौंपी जानी हैं। इनका रकबा १ हेक्टेयर से लेकर 5 हेक्टेयर तक है । इन सभी पंचायतों के द्वारा रेत खदान के लिए विधिवत आवेदन भी किए जा चुके हैं और अब सीटीओ के तहत आवेदन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास लंबित पड़े हुए हैं । अभी तक केवल ३ खदानों को सीटीओ की अनुमति पीसीबी से मिली है जिनमें से गोटेगांव की गंगई, और गाडरवारा की चीचली और बैरागढ़ खदान को अनुमति प्राप्त हुई है । ये तीनों खदानें आचार संहिता लग जाने की वजह से शुरू नहीं हो सकी हैं जबकि इससे पूर्व एक घूरपुर खदान ग्राम पंचायत को आवंटित की गई थी जो चालू है। यह खदान काफी विवादों में रही थी और यहां खूनी संघर्ष तक हो चुका है ।
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स्वीकृति न मिलने के पीछे रेत माफिया की ताकत
सूत्रों की मानें तो अभी तक ग्राम पंचायतों की २५ खदानों को रेत खनन की स्वीकृति ने मिलने की पीछे रेत माफिया की ताकत है। रेत माफिया ने अपने राजनीतिक रसूख का उपयोग कर विभागों से मिलने वाली एनओसी में अड़ंगा डाला ताकि पंचायतें रेत न बेच सकें और मजबूरी में लोग सिर्फ उनकी ही रेत खरीदें । रेत माफिया जिले में मनमाने दामों पर रेत बेच रहा है। यहां एक डंपर रेत ९ घन मीटर १३ हजार में और १५ घनमीटर रेत २२ हजार में बिक रही है।

 

वर्जन
जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों की २५ खदानों के प्रकरण पीसीबी के पास सीटीओ के लिए गए थे जिनमें से तीन को सीटीओ मिल गई है। आचार संहिता खत्म होने के बाद ही सीटीओ प्राप्त खदानें संचालित हो सकेंगी।
एसएस बघेल, प्रभारी खनि अधिकारी
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