बारिश से 5000 गुड़ भट्ठी बंद, नहीं रुक रही बेकद्री

परिसर में रख ईधन गीला होने से बढ़ी परेशानी, धूप निकलने के बाद ही बन पाएगा नया गुड़

By: Sanjay Tiwari

Published: 03 Jan 2020, 12:57 PM IST

नरसिंहपुर। सर्दी की बारिश गुड़ भ_ियों पर कहर साबित हुई है। बारिश की वजह से जिले की 5 हजार से ज्यादा भ_ियां बंद हो गई हैं। तीन दिन से रुक रुक कर हो रही बारिश ने गुड़ बनाने वालों के हाथ बांध दिए हैं। भ_ियों को सुलगाने के लिए उनके परिसर में रखा ईंधन बारिश में गीला होने की वजह से सभी भ_ियां बंद हो गई हैं। वहीं गुड़ की बेकद्री पर भी रोक नहीं लग रही है। व्यापारी अब भी बोली लगाने जूता पहनकर खड़े हो रहे हैं।

इसलिए बंद भट्ठी
गुड़ भट्ठयों मेंं ईंधन के रूप में गन्ने की क्रसिंग से निकले छिलके या बगास का उपयोग किया जाता है। क्रसिंग के बाद इसे भटिï्ठयों के आसपास खुले मैदान में डाल दिया जाता है। इसे लगातार भ_ी में डालकर जलाया जाता है। जिसकी आग से गन्ने की कढ़ाही गर्म होती हैं और फिर गन्ने से गुड़ बनाने की विधि पूर्ण की जाती है।
ऐसे बनाते हैं गुड़
प्रत्येक गुड़ भट्ठी में तीन कढ़ाही का उपयोग किया जाता है। पहली कढ़ाही में गन्ने का रस गर्म होता है। दूसरी कढ़ाही में रस को फिल्टर करने के साथ ही उबाला जाता है। तीसरी कढ़ाही में रस ठोस रूप में पहुंचाकर जमाया जाता है। इसे फिर ढेलों या पारी के रूप में अलग अलग आकार में जमाने के बाद ठोस रूप में बेचने के लिए भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम 8 घंटे लगते हैं । यदि यह काम लगातार चलता है तो चार घंटे लगते हैं।

2900 से 3300 तक रहे गुड़ के भाव
गुरुवार को कृषि उपज मंडी नरसिंहपुर में गुड़ की मंडी लगी। गुड़ की गुणवत्ता के आधार पर 2900 से लेकर 3300 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर गुड़ की बोली लगाई गई। गरगटा के कंछेदीलाल रैकवार 70 क्विंटल गुड़ लेकर आए उन्होंने 3118 रुपए के भाव से बेचा। लुहारी के सोबरन पटेल 30 क्विंटल गुड़ लेकर आए उन्होंने 2900 रुपए के भाव से बेचा। मुराछ के शोभाराम पटेल 38 क्विंटल गुड़ लेकर आए उन्होंने 3042 रुपए के भाव से मंडी में अपना गुड़ बेचा।

धूप निकलने के बाद तीन दिन लगेंगे भ_ी सुलगने में
गुड़ बनाने वाले किसानों का कहना है कि गुड़ भ_ियां शुरू करने में तीन से चार दिन तक का समय लग सकता है। बारिश बंद होने के बाद गन्ने की बगास को सूखने में कम से कम तीन दिन लेंगे वह भी तब जबकि तेज चटख धूप निकले। इसके बाद ही गुड़ भट्ठयों से नया गुड़ बाजार में आना शुरू होगा। फिलहाल बारिश से पहले से निर्मित गुड़ बाजार में बिकने के लिए आ रहा है।


समझौते के बाद नहीं बंद हुआ गुड़ पर जूता-चप्पल पहनकर खड़े हो रहे
यदि आप गुड़ का उपयोग खाने में या पूजा से संबंधित कार्य में करने जा रहे हैं तो मंडी में इसकी बिक्री से संबंधित तस्वीरें आपको सोचने के लिए विवश कर देती हैं। कृषि उपज मंडी में गुड़ की बिक्री के दौरान इसे अशुद्ध न करने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। कई लोग गुड़ की पारियों के ऊपर जूते चप्पल पहन कर इसकी नीलामी या बिक्री करते हैं। जिससे जूता चप्पलों में लगी गंदगी से गुड़ दूषित हो रहा है। यही गुड़ बाद में बिकने के लिए बाजार में जाता है। मंडी समिति की बैठक में किसानों ने व्यापारियों से गुड़ से सुरक्षित दूरी पर खड़े होकर बोली लगाने की बात रखी थी। इस सहमति भी बनी लेकिन पालन नहीं हो रहा है।

किसानों के पास नहीं बचा गुड़
गोटेगंाव. बारिश की वजह से यहां गुड़ बनाने का काम पूरी तरह ठप हो गया है। किसानों के पास जो गुड़ का स्टाक था वह खत्म हो गया। दूसरी ओर भ_ियां बंद होने से नया गुड़ तैयार नहीं कर पा रहे। किसानों को बारिश बंद होने और मौसम खुलने का इंतजार है। दूसरी ओर खेतों मेंं गन्ने की कटाई का काम भी प्रभावित हुआ है।

Sanjay Tiwari
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