Acharya Vidyasagar : आचार्य विद्यासागर महाराज ने सिंघई पदवी के बारे में कही ये बात

Acharya Vidyasagar : आचार्य विद्यासागर महाराज ने सिंघई पदवी के बारे में कही ये बात
Acharya Vidyasagar : sanghai padvi : swagat : tendukheda rajmarg

Sanjay Tiwari | Publish: Jun, 25 2019 05:56:11 PM (IST) Narsinghpur, Narsinghpur, Madhya Pradesh, India

यहां आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने सिंघई की पदवी के बारे में यह कहा....

तेंदूखेड़ा। जब सिंह और गाय अपने बछड़े के साथ एक घाट पर पानी पी सकते हैं तो अपने मन को वात्सल्य भाव से क्यों नहीं जोड़ा जा सकता, आज हम भटकाव का जीवन व्यतीत कर रहे हैं आपाधापी की इस दौड़ में लगे हुए हैं। हम यदि ज्यादा कुछ नहीं भी बन सकते हैं तो प्राणी मात्र में दया का भाव रखते हुए केवल श्रावक बनने के लायक ही हो जाएं,यही मनुष्य के लिए उत्तम होगा। यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने सोमवार को तेंदूखेड़ा में श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए कही। उन्होंने कहा कि पहले ग्राम में अच्छा काम कराने वाला या जिनालय का निर्माण कराने वाला सिंघई कहलाता था, लेकिन अब तो सब सिघई बन गए हैं।


इसके पूर्व सोमवार की सुबह लगभग 8 बजे महाराजश्री का तेंदूखेड़ा आगमन हुआ। जहां सकल दिगंबर जैन समाज के साथ विभिन्न प्रांतों एवं जिलों तथा नगर के विभिन्न संप्रदायों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित थे। श्रद्धालुओं ने उनकी श्रद्धापूर्वक अगवानी की।


आचार्यश्री के आगमन की सूचना पर प्रात: काल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हो गए थे संपूर्ण नगर को रंगोली बंधन द्वारों से सजाया गया था। आगमन के समय जैन मंदिर तक जयगुरुदेव के नारों से संपूर्ण नगर गुंजायमान हो रहा था। एनएच 12 पर ही स्थित चिंतामणि श्रीपाŸवनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्यश्री ने श्रीजी के दर्शन किये। तदोपरांत सामयिकी के बाद बाहर से पधारे श्रद्धालुओं द्वारा दर्शन लाभ का सिलसिला जारी रहा।

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