22 मार्च से जहां के तहां खड़ी हैं बसें, तंगहाली में आपरेटर्स

-पेशा बदलने को मजबूर बसों के चालक-परिचालक

By: Ajay Chaturvedi

Published: 28 Oct 2020, 02:56 PM IST

नरसिंहपुर. बस आपरेटर्स की हालत दयनीय हो गई है। पिछले सात महीने से उनकी रोजी रोटी पर ग्रहण लगा है। बसें गत 22 मार्च से जहां की तहां खड़ी हैं। यात्री मिल नहीं रहे। सरकार सुन नहीं रही। ऐसे में अब तो पेशा बदलने को मजबूर हो गए हैं ये ट्रक आपरेटर्स।

नरसिंहपुर बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के विधिक सलाहकार विवेक जैन बताते हैं कि 22 मार्च से शुरू हुए लाकडाउन के बाद से अनलॉक-5 आ गया लेकिन बसें अपनी जगह से हिलीं तक नहीं। इन 7 माहों में 90 फीसद बसों की बैटरी डिस्चार्ज हो चुकी है। मेंटेनेंस का भारी भरकम काम निकल आया है। लगभग सभी बसों का बीमा भी खत्म हो चुका है। प्रत्येक बस को वापस रोड पर लाने के लिए औसतन 50 हजार रुपये के खर्च का अनुमान है। इसमें परमिट टैक्स अलग है। जिले के करीब 200 ऑपरेटर्स ने अक्टूबर में अपने-अपने परमिट जिला परिवहन विभाग को सरेंडर कर दिए हैं।

जैन के अनुसार डीजल के दाम बढ़ने के कारण ऑपरेटर्स बसों के संचालन के लिए शासन से किराये में 30 फीसद बढ़ोतरी के साथ दिसंबर तक के रोड टैक्स को माफ करने की लगातार मांग कर रहे हैं। इस सिलसिले में सरकार को ज्ञापन भी दिया जा चुका है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है।

वह बताते हैं कि इन विपरीत परिस्थितियों में भी सागर से एक बस को चलाया गया। लेकिन इसमें भी यात्री नगण्य हैं। ऐसे में अधिकांश ड्राइवर-कंडक्टर भी अब आजीविका के लिए दूसरे काम करने लगे हैं। इन हालातों में बसों का संचालन चुनोती भरा हो गया है।

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