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बढ़ती मांग से दम तोड़ रहे ट्रांसफार्मर, 4 जिलों से आपूर्ति, ग्रामीण में 360 तो शहरी क्षेत्रों में 110 मेगावाट तक खपत

जिले में गर्मी और फसलों की सिंचाई का सीजन होने से बिजली की खपत बेतहाशा बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्र में 360 तो शहरी क्षेत्रों में 110 मेगावाट तक बढ़ी खपत ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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जिले में गर्मी और फसलों की सिंचाई का सीजन होने से बिजली की खपत बेतहाशा बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्र में 360 तो शहरी क्षेत्रों में 110 मेगावाट तक बढ़ी खपत ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालत यह है कि बढ़ते विद्युत भार और अन्य खामियों से करीब ढाई माह में ही 535 से अधिक ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं।

विद्युत केंद्रों के रखरखाव का निरीक्षण करते हुए अधिकारी।

the power utility company नरसिंहपुर. जिले में गर्मी और फसलों की सिंचाई का सीजन होने से बिजली की खपत बेतहाशा बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्र में 360 तो शहरी क्षेत्रों में 110 मेगावाट तक बढ़ी खपत ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालत यह है कि बढ़ते विद्युत भार और अन्य खामियों से करीब ढाई माह में ही 535 से अधिक ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं। जिले के लिए हर सप्ताह 80 से 100 नए ट्रांसफार्मर की मांग बनी हुई है, जिनकी पूर्ति चार जिलों के स्टोर से हो रही है। बिजली की बढ़ती मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखना विद्युत वितरण कंपनी के लिए हर दिन नई-नई चुनौतियां लेकर आ रहा है।
बताया जाता है कि जिले में बिजली की बढ़ती खपत ने 450 मेगावाट का आंकड़ा छू लिया है। बीते मार्च माह से अब तक जिले में करीब 535 ट्रांसफार्मरों को बदलने की कार्रवाई हो चुकी है। बावजूद इसके बढ़ते लोड और अन्य तकनीकी खामियों के कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति में बार-बार व्यवधान आने की समस्या से उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल पा रही है।


ट्रांसफार्मरों के लिए इन जिलों पर निर्भरता
बताया जाता है कि जिले में जबलपुर, सागर, शहडोल एवं सतना के स्टोर से ट्रांसफार्मरों की खेप बुलाई जा रही है। हर सप्ताह 80 से 100 ट्रांसफार्मर बुलाने की नौबत बनी है। जिसकी बड़ी वजह ग्रामीण क्षेत्र में घरेलू बिजली एवं पंप कनेक्शनों के जरिए बिजली की खपत 350 से 360 मेगावाट तक पहुंचना है। यही स्थिति शहरी क्षेत्र में बन रही है जहां बिजली की खपत का आंकड़ा 80 से 110 मेगावाट तक पहुंच रहा है। विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि बढ़ती मांग के बीच आपूर्ति सुचारु बनाए रखने टीमें दिन रात कार्य कर रही हैं। गाडरवारा क्षेत्र में तो एक टीम को रात्रि में ही आने वाली शिकायतों के समाधान के लिए निर्धारित किया गया है। जिससे जहां कहीं से भी फाल्ट बनने या लाइन में खराबी आने की शिकायत मिले तो सुधार किया जा सके। अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि यदि समय रहते 18 पावर हाउस में क्षमता वृद्धि होने से आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने में काफी मदद मिली है।
फैक्ट फाइल
जिले में कुल बिजली खपत - 450 मेगावाट
ग्रामीण क्षेत्र में बिजली खपत - 350-360 मेगावाट
शहरी क्षेत्र में बिजली खपत - 80-110 मेगावाट
मार्च से अब तक बदले गए ट्रांसफार्मर - 535 से अधिक
प्रति सप्ताह नए ट्रांसफार्मरों की आवश्यकता- 80-100
ट्रांसफार्मर आपूर्ति जबलपुर, सागर, शहडोल और सतना से
क्षमता वृद्धि वाले पावर हाउस -18

वर्जन
जिले में 4 जिलो से ट्रांसफार्मर बुलाए जा रहे हैं, ताकि आपूर्ति सुचारु बनाने में मदद मिले। बिजली की खपत की जहां तक बात है तो अभी तो 450 मेगावॉट तक पहुंच गई है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लगातार खपत बढ़ रही है। कंपनी की टीमें निरंतर कार्य कर रही हैं, मार्च से अब तक करीब 535 टांसफार्मर बदले जा चुके हैं।
नीलाभ श्रीवास्तव, अधीक्षण यंत्री मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी नरसिंहपुर

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