नर्मदा नदी के घाटों में बना दिए हैं मौत के कुएं, इन जगहों पर स्नान करने पर बरतें सावधानी

हो चुकी हैं कई मौतें, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान, त्यौहारों में भीड़ बढऩे से हो सकता है बड़ हादसा

गोटेगांव। नर्मदा नदी के अन्य जिले में रेत के गड्ढों के शिकार हुए परिवारों के सदस्यों की मौत के दो प्रकरण सामने आए हंै। नर्मदा नदी के घाटों में जिस स्थल पर लोग स्नान करते हंै वहां पर जमीन समतल रहती है और कुछ आगे जाने के बाद अचानक गहराई आ जाती है जिसके कारण स्नान करने वाले लोग हादसे के शिकार हो जाते हंै।
नर्मदा नदी के पानी के अंदर की रेत की निकासी करने के लिए रेत माफिया नौकाओं का इस्तेमाल अधिक कर रहे हंै। बोट मशीन से पानी के अंदर की रेत पाइपों के माध्यम से घाट के तट तक लाई जाती है। जानकारों ने बताया है कि जहां पर बोट मशीन खड़ी कर रेत निकालने के लिए चालू की जाती है वहां पर पानी के अंदर करीब ४० फीट का गड्ढा रेत निकलने से हो जाता है। इस तरह के गड्ढे गोटेगांव के नर्मदा तट पर बन चुके हैं। वहीं पोकलेन मशीन को अंदर ले जाकर की जाने वाली खुदाई के कारण भी भारी भरकम गड्ढे नर्मदा नदी के अंदर बन चुके हंै।
वर्तमान समय में मजदूरों के माध्यम से भी पानी के अंदर की रेत नौकाओं से निकाली जा रही है। यह बोट वाले अन्य स्थल पर रेत बची नहीं है तो वह स्नान करने वाले घाटों की ओर पहुंचते हैं और वहां पर दिन रात रेत निकालने का सिलसिला जारी रहता है। जिसके कारण स्नान करने वाले घाटों मेेंं भी भारी भरकम गड्ढे हो गए हंै।
जून माह के प्रथम सप्ताह में नर्मदा नदी के झांसीघाट और मुआरघाट में स्नान करने के लिए गए दो सदस्यों की मौत की घटना हो चुकी है। झांसीघाट में अपनी बहनों के साथ पिपरिया मवई गांव की लडक़ी नहा रही थी जो नहाते समय गहरे पानी में समा गई। वहीं मुआरघाट में ३० साल का अभिषेक श्रीवास्तव नर्मदा नदी में मौजूद एक गड्ढे में समा गया। इसके पूर्व गंगई घाट पर भी डूबने के हादसे हो गए हैं जिसमें पिता पुत्र की एक साथ मौत हो गई थी।
वर्तमान समय में प्रतिबंध लगाने के बाद भी रात के समय में पानी के अंदर से खुदाई करने का सिलसिला कई घाटों पर चल रहा है। नदी न्यास के अध्यक्ष कम्प्यूटर बाबा ने सांकल घाट पर पोकलेन मशीन पकड़ी। वहीं बुधवार घाट पर नौका को रेत माफिया दूसरे तट पर ले गए थे जहां जबलपुर के अधिकारियों ने पकडऩे की कार्रवाई की।
जो लोग नर्मदा नदी के प्रमुख तटों को छोड़ कर नर्मदा नदी के अन्य हिस्से में स्नान करने के लिए परिवार के साथ जाएंगे वहां पानी के अंदर निर्मित हुए मौत के कुओं के शिकार हो सकते हैं इसलिए प्रशासन को अन्य तट पर लोगों को स्नान करने से जाने से रोकने की व्यवस्था करना चाहिए।

Show More
narendra shrivastava Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned