डीईओ, आफिस से, भेज रहे प्रस्ताव, जिला पंचायत, जता रही, आपत्ति

अध्यापकों को नहीं मिल पा रहा क्रमोन्नतियों का लाभ
- संविदा शिक्षकों को अध्यापक बनाने की संविलयन प्रक्रिया भी नहीं हुई शुरु
हेडिंग-
नरङ्क्षसहपुर
जिलेभर के अध्यापकों को नियमानुसार क्रमोन्नतियों का लाभ मिलना चाहिए था पर अध्यापक अभी तक इसका इंतजार कर रहे हैं। अध्यापकों के क्रमोन्नति के प्रस्ताव जिला पंचायत से डीईओ आफिस के बीच झूल रहे हैं। बताया जा रहा है कि डीईओ आफिस से तीन बार ये प्रस्ताव जिला पंचायत को भेजे जा चुके हैं जहां से प्रस्ताव वापस भी आ जाते हैं। हर बार कुछ न कुछ आपत्तियां जताई जा रहीं हैं।
जिला पंचायत और डीईओ के बीच झूलती फाइलों के कारण अध्यापक क्रमोन्नति के लाभ से वंचित हो रहे हैं। अध्यापक बताते हैं कि जितनी देर होगी उन्हेें उतनी ही आर्थिक क्षति होगी। ऐरियर्स राशि बढ़ती जाएगी तो उसके अनुपात में रिश्वत मांगने का सिलसिला शुरु हो जाता है। जिले में सन 1998 में नियुक्त हुए अध्यापक संवर्ग  को ही अभी तक क्रमोन्नति का लाभ मिल सका है। इस तरह जिलेभर के 500 से ज्यादा अध्यापकों को क्रमोन्नति का लाभ मिलना है।
केवल क्रमोन्नति के लाभ मिलने में ही विलंब नहीं हो रहा है। संविदा शिक्षकों को अध्यापक संवर्ग में शामिल करने की प्रक्रिया भी जिले में शुरु नहीं हो रही है। तीन साल पहले संविदा वर्गों में नियुक्त हुए शिक्षकों को इस बार नियमानुसार अध्यापक बना दिया जाना चाहिए था। सन 2013 में संविदा वर्ग एक, वर्ग दो और वर्ग तीन के शिक्षकों का अध्यापक संवर्ग में संविलयन जुलाई में ही हो जाना चाहिए था पर अभी तक यह प्रक्रिया शुरु ही नहीं हुई है। संविदा वर्ग एक, संविदा वर्ग दो और संविदा वर्ग तीन के जिन शिक्षकों  को जुलाई 2013 मेें नियुक्त किया गया था उन्हें जुलाई 2016 में अध्यापक संवर्ग में शामिल किया जाना था। ऐसा प्रावधान है कि यह प्रक्रिया निर्धारित तिथि के 45 दिन पूर्व शुरु कर दी जानी चाहिए पर ऐसा हुआ नहीं। अध्यापक संवर्ग में संविलयन के प्रस्ताव ब्लाक स्तर पर लिए जा रहे हैं। सभी ब्लाक आफिसों में फार्म का ढेर लग गया है। जिले के ऐसे करीब 200 संविदा शिक्षक हैं जिन्हें अध्यापक संवर्ग में शामिल किया जाना है।
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