Patrika exclusive: ये है जीने की जिजीविषा, 86 साल की उम्र में दी कोरोना को मात, बोले, 'शक्ति नहीं पर आत्मबल तो है'

-सेवानिवृत्त शिक्षक के हौसले को सलाम

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 20 May 2021, 04:34 PM IST

नरसिंहपुर. कोरोना संक्रमित मरीजों के स्वस्थ्य होने के लिए यूं तो बहुतेरे इंतजाम किए जा रहे हैं। ऑक्सीजन से लेकर वेंटिलेटर, रेमडेसिविर इंजेक्शन जैसी तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। बावजूद इसके बहुतेरे लोगो की मौत हो जा रही है। मनोचिकित्सकों की मानें तो इसकी सबसे बड़ी वजह है हौसले की कमी। जिंदा रहने की जिजीविषा की कमी। वो कहते हैं कि रोग कोई हो अगर मरीज में जीवन के प्रति सकारात्मक सोच है तो वो बडे से बड़े से रोग/ वायरस से लड़ सकता है, जीत सकता है।

ऐसी मिसाल पेश की है तेंदूखेड़ा के सेवानिवृत्त शिक्षक 86 वर्षीय गया प्रसाद जैन ने। गया प्रसाद कोरोना पॉजिटिव हुए तो घर में ही खुद को एक कमरे में क्वारंटीन कर लिया और 15 दिन में कोरोना को मात दे दी। अब वो कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। बेहतर स्वास्थ्य व इम्यूनिटी डेवलप करने, सांसों को लंबा खींचने, स्टेमिना बढ़ाने के लिए रोजाना सुबह-शाम टहलते हैं। पसंदीदा भोजन करते हैं।

शिक्षक रहे जैन बताते हैं कि यदि धैर्य के साथ इस महामारी से जूझा जाय तो निश्चित तौर पर कोई भी आसानी से कोरोना वायरस को मात दे सकता है। वह कहते हैं कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह लेते हुए घर पर ही रह कर समय-समय पर दवा ली जाए। चिकित्सकों के स्तर से जिन चीजों से परहेज की सलाह मिली है उसका पालन किया जाए तो कोरोना वायरस को हराना मुश्किल नहीं।

अपनी उम्र का हवाला देते हुए कहते हैं कि यह सही है कि अब 86 साल में वो क्षमता नहीं रही, लेकिन आत्मबल व जूझने की प्रबल शक्ति तो है न, उसी के बल पर कोरोना वायरस के आक्रमण को नकार दिया। जीत ली जंग।

Ajay Chaturvedi
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