सीनियर सिटीजन को जेल भेजने के मामले में मानव अधिकार आयोग की टीम ने दर्ज किए बयान

पत्रिका की खबर पर आयोग ने लिया है संज्ञान

By: ajay khare

Published: 15 Nov 2018, 08:49 PM IST

नरसिंहपुर। जन सुनवाई में सीनियर सिटीजन पीके पुरोहित को २१ अगस्त को कलेक्टर द्वारा जेल भेजने के मामले में मानव अधिकार आयोग की एक टीम ने बुधवार को मामले से संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए। गुरूवार को भी अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। गौरतलब है कि आयोग ने पत्रिका में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की है। इससे पहले आयोग ने २८ अगस्त को पुलिस महानिरीक्षक और राजस्व संभाग आयुक्त को तीन सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे। आयोग द्वारा निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बावजूद आयुक्त द्वारा अभी तक पीडि़त के बयान दर्ज नहीं किए जाने और आईजी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होने पर अब आयोग ने खुद जांच शुरू कर दी है।

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग की तीन सदस्यीय टीम ने खुरपा गांव जाकर पीडि़त व्यक्ति पीके पुरोहित और कलेक्टर कार्यालय में घटना के वक्त जन सुनवाई में मौजूद नगर सैनिक, अन्य विभागों के अफसरों व कर्मचारियों सहित कोतवाली थाना टीआई अमित दाणी के बयान दर्ज किए। आयोग की तीन सदस्यीय टीम में डीएसपी एन जामले, टीआई राधा पांडे व एक आरक्षक शामिल है। टीम ने कलेक्टर कार्यालय के अलावा एसडीएम कार्यालय जाकर भी घटना से संबंधित लोगों के बयान लिए हैं। गुरुवार को एसडीएम कार्यालय से पुरोहित की गिरफ्तारी व जमानत आदि से संबंधित दस्तावेज जब्त किए जाएंगे। इसके अलावा मामले मेें कलेक्टर अभय वर्मा के भी बयान दर्ज किए जाएंगे

पुलिस थाने के उन कर्मचारियों अधिकारियों के भी बयान लिए गए हैं जिन्होंने पीके पुरोहित को गिरफ्तार करने से लेकर एसडीएम कोर्ट भेजा था और फिर जेल दाखिल किया था ।
जानकारी के अनुसार इस घटना को लेकर प्रशासन अपने बचाव की पूरी तैयारी कर चुका है । मानव अधिकार आयोग ने इस घटना को लेकर कलेक्टर को निर्देशित किया था कि घटना के दौरान के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे जाएं लेकिन प्रशासन ने यह कहकर अपना बचाव किया है कि घटना के वक्त सीसीटीवी कैमरों का रखरखाव और उनकी शिफ्टिंग का काम चल रहा था जिसकी वजह से घटना के दौरान का कोई भी सीसीटीवी फुटेज उनके पास नहीं है । खुरपा गांव में फरियादी पीके पुरोहित के बयान दर्ज करने के दौरान नायब तहसीलदार मर्यादा बागड़े भी मौजूद थीं। जानकारी के अनुसार आईजी ने आयोग को जो रिपोर्ट भेजी है उसमें घटना की पुष्टि की गई है पर घटना के लिए दोषी कौन है इस बारे में कुछ नहीं कहा गया। जिसके बाद आयोग ने खुद ही मामले की जांच का निर्णय लिया है।
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