धनतेरस पर भी दिखा मंदी व कोरोना का असर, बाजार में नहीं दिखी रौनक

-कारोबार 50-60 फीसद तक प्रभावित होने का अनुमान

By: Ajay Chaturvedi

Published: 13 Nov 2020, 05:37 PM IST

नरसिंहपुर. कोरोना का कहर लगातार जारी है। नए मरीज मिलने भले कम हो गए हों पर लोगो के दिलो दिमाग पर कोरोना की अमिट छाप गहरी हो चली है। वैसे भी कहा जा रहा है कि जैसे जैसे ठंड बढ़ेगी कोरोना संक्रमण भी तेज होगा। ऐसे में धनतेरस जैसा पर्व भी फीका रहा। बाजार तो सजे पर नहीं दिखे खरीदार। इसे आर्थिक मंदी के असर के रूप में भी देखा जा रहा है।

धनतेरस पर बाजार तो बखूबी सजा। पर ग्राहकी कमजोर नजर आई। सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ सराफा कारोबार। बताया जा राह है कि पिछले साल के मुकाबिल इस दफा सराफा कारोबार में तकरीबन 60 फीसद की गिरावट आई है। ज्यादातर दुकानों पर विक्रेता ग्राहकों का इंतजार करते नजर आए। दोपहर बाद खरीदार निकले जरूर पर वो रौनक नहीं रही जो पिछले सालों में देखी जाती रही इस दिन। औपचारिक रूप से लोगों ने कुछ बर्तन आदि की खरीदारी की और वापस हो लिए।

धनतेरस के मौके पर गुरुवार को दुकानदारों ने तो पूरी तैयारी की थी लेकिन पूरा दिन गुजर गया ग्राहकों के आने के इंतजार में। पंडितों के मुताबिक खरीददारी का अभिजीत मुहुर्त दोपहर में ही रहा लेकिन जो ग्राहक निकले भी वो दोपहर बाद ही निकले। वो भी बड़े प्रतिष्ठानों का रुखसत करने की बजाय रोजमर्रा की जरुरतों की सामग्री खरीदी। ऐसे में बड़े-बड़े शो-रूम में सन्नाटा ही पसरा रहा।

सराफा बाजार की उम्मीदों पर तो पानी ही फिर गया। इन दुकानों पर इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आएं। जो आए उन्होंने भी महज शगुन के तौर पर ही हल्की-फुल्की खरीददारी ही की। नरसिंहपुर सराफा अध्यक्ष अखिलेश गुप्ता की मानें तो धनतेरस सराफा व्यापारियों के लिए मायूस करने वाली रही। इस बार नरसिंहपुर शहर में स्थित 100 से अधिक सराफा दुकानों में करीब एक करोड़ का व्यापार ही हो सका, जबकि पूरे जिले में करीब दो सवा दो करोड़ के आसपास खरीददारी का अनुमान हैं। गुप्ता का कहते हैं कि सोने की आसमान छूती कीमतों और अल्प व अतिवृष्टि से फसलों को जो नुकसान हुआ है उससे किसानों ने सोने की खरीदी से दूरी बनाए रखी, जिसके कारण बाजार खड़ा नहीं हो सका। जिले का बाजार पूरी तरह किसानों पर निर्भर है।

इलेक्ट्रानिक्स व ऑटोमोबाइल्स के क्षेत्र पर भी मंदी व कोरोना का असर साफ नजर आया। वाहनों की बिक्री बीते वर्ष की तुलना में 50 फीसद कम रही। इलेक्ट्रानिक गेजेट्स की मांग में भी कमी देखी गई।

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