शक्कर नदी समेत क्षेत्रीय नदियों में जलसंरक्षण का अभाव

शक्कर नदी समेत क्षेत्रीय नदियों में जलसंरक्षण का अभाव

Ajay Khare | Publish: Nov, 10 2018 04:42:55 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 04:42:56 PM (IST) Narsinghpur, Narsinghpur, Madhya Pradesh, India

तालाब में भी नहीं हुआ जल संरक्षण

गाडरवारा। शक्कर नदी समेत सभी छोटी नदियों की दशा बरसात के कुछ महीने बाद ही गंभीर बनी हुई है। शक्कर नदी के अलावा दुधी, सीतारेवा नदी में भी नाममात्र का पानी बचा है। लेकिन किसी भी नदी में जल संरक्षण के प्रयास होते नजर नहीं आ रहे। लोगों का कहना है अभी भी समय रहते नदियों का पानी सहेजा जाए तो गर्मियों तक नदियों में पानी देखने को मिल सकता है।
नदी तट पर बदहाली का आलम
शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली शक्कर नदी किस कदर प्रशासननिक उदासीनता झेल रही है। इसका अंदाजा पत्रिका ने शनिवार को नदी तट पर पहुंच कर स्वयं लगाया। नदी किनारे जहां तहां गंदगी, कचरा, पूजन सामग्री, प्लास्टिक के पाउच एवं भांति भांति का कचरा पड़ा हुआ है। नदी में वाहन धोने, जानवरों को नहलाने धुलाने से लेकर कई प्रकार से नदी को गंदा करने में कसर नही छोड़ी जा रही। छिड़ाव घाट की सीढिय़ों के पास से नदी के पानी में आकर शहर के सीवेज का गंदा पानी बदस्तूर समा रहा है। छिड़ाव घाट के पास मलमूत्र से नदी तट को गंदा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है। पुल के पास गंदा पानी नदी में मिल रहा है। ऐसे ही पुल के आगे नाले का गंदा पानी नदी में समाता है। नदी किनारे को इन दिनों शराब के शौकीनों ने अडडा बना रखा है। जिसकी गवाही यहां पड़े पानी के पाउच, डिस्पोजल गिलास एवं बोतलें देती हैं। नगर के युवाओं ने अब से कुछ वर्ष पूर्व श्रमदान कर बोरी बंधान बनाया था। जिससे नदी में पानी ठहरा था, इसकी पूरे क्षेत्र के लोगों ने व्यापक सराहना की थी।
तालाब में भी जल संरक्षण बेअसर
नदी के अलावा नगर के इकलौते शनि मंदिर के पास के तालाब में चारों ओर फेंसिंग लगाकर तालाब को सुरक्षित किया गया है। हालांकि फेंसिंग के बाहर अतिक्रमण भी पैर पसारता नजर आता है। वहीं तालाब के अंदर के वल एक बड़े से डबरे में ही पानी बचा हुआ है। पानी के हाल देखकर लग रहा है कि गर्मी के पहले ही उक्त पानी भी पूरी तरह सूख जाएगा तथा प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी तालाब में धूल उड़ेगी।

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