scriptLast Darshan of Shankaracharya Swami Swaroopanand Saraswati | शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के गंगा कुण्ड में अंतिम दर्शन, झोंतेश्वर में समाधि आज | Patrika News

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के गंगा कुण्ड में अंतिम दर्शन, झोंतेश्वर में समाधि आज

झोंतेश्वर की पावन भूमि में ब्रह्राचारी शिष्यों के द्वारा भू समाधि दी जाएगी।

 

नरसिंहपुर

Published: September 12, 2022 09:26:39 am

गोटेगांव. ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने रविवार को दोपहर 3.21 बजे अंतिम श्वांस ली। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। शंकराचार्य जी को आज सोमवार की शाम चार बजे परमहंसी गंगा आश्रम झोंतेश्वर स्थित राधास्वामी मंदिर के समीप मैदान में भू-समाधि दी जाएगी। उल्लेखनीय है गुरुपूर्णिमा के दिन उन्हाेंने खराब स्वास्थ्य के बावजूद मणिदीप आश्रम में भक्तों को दर्शन दिए थे। शंकराचार्य का चार्तुमास शनिवार को ही सम्पन्न हुआ। 30 अगस्त को उनका 99 वां जन्म दिवस भक्तों ने मनाया था। शंकराचार्य के निज सचिव सुबुद्धानंद ब्रह्राचारी ने पत्रिका को बताया कि अंतिम दर्शनों के लिए उनकी पार्थिव देह को झोंतेश्वर के गंगा कुंड स्थल पर रखा गया है। यहां पर रात भर भजन होने के बाद 12 सितम्बर को झोंतेश्वर की पावन भूमि में ब्रह्राचारी शिष्यों के द्वारा भू समाधि दी जाएगी। जैसे ही शंकराचार्य के शिष्यों में खबर पहुंची उनमें शोक की लहर छा गई। वहीं बड़ी संख्या में भक्त गण रविवार को ही झोंतेश्वर पहुंच गए थे।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के गंगा कुण्ड में अंतिम दर्शन, झोंतेश्वर में समाधि आज
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के गंगा कुण्ड में अंतिम दर्शन, झोंतेश्वर में समाधि आज
पोथी राम से बने शंकराचार्य-शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि अर्थात दो सितंबर 1924 को मध्यप्रदेश राज्य के सिवनी जिले में दिघोरी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम धनपति उपाध्याय और मां का नाम गिरिजा देवी था। माता पिता ने इनका नाम पोथीराम उपाध्याय रखा। पोथी राम अपने माता पिता की नौंवी संतान थे। वह नौ साल की अवस्था में घर त्याग कर अध्यात्म की खोज में निकल पड़े। इस दौरान वह काशी पहुंचे और यहां उन्होंने ब्रह्मलीन स्वामी करपात्री महाराज से वेद-वेदांग शास्त्रों की शिक्षा ली। यह वह समय था जब 1942 में अंग्रेजो भारत छोड़ो का नारा लगा तो वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और 19 वर्ष की उम्र में वह क्रांतिकारी साधु के रूप में प्रसिद्ध हुए। इसी दौरान उन्होंने वाराणसी की जेल में नौ और मप्र की जेल में छह महीने की सजा भी काटी। वे करपात्री महाराज की राजनीतिक दल राम राज्य परिषद के अध्यक्ष भी थे। उन्होंने वर्ष 1950 में शारदा पीठ शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती से दंड संन्यास की दीक्षा ली और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के नाम से जाने जाने लगे। 1973 में पहली बार ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद पर आसीन हुए। उन्होंने गोटेगांव से 15 किलोमीटर दूर परमहंसी गंगा आश्रम के जंगल को अपना कर्मस्थल बनाया। यहां वे पेड़ पर रात्रि विश्राम, 1 पाषाण शिला पर ध्यान करते थे। उन्होंने रामसेतु की रक्षा, गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करवाने, श्रीराम जन्मभूमि के लिए संघर्ष किया। वे गोरक्षा आंदोलन के प्रथम सत्याग्रही, रामराज्य परिषद के प्रथम अध्यक्ष रहे।
स्वामीजी के पदारोहण मस्तकभिषेक का ऐतिहासिक चित्र।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के देवलोक गमन की खबर सुनते ही भक्तों में शोक की लहर छा गई। उनके अंतिम दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब परमहंसी गंगा आश्रम के ओर दौड़ पड़ा।

शंकराचार्य ने अपनी कर्मभूमि के मणिदीप आश्रम में रविवार को 3.21 बजे अंतिम श्वास ली। दण्डी स्वामी सदानंद सरस्वती एवं दण्डी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जैसे ही खबर मिली वह मणिदीप आश्रम पहुंचे और विविध नदियों का पवित्र जल अर्पित करके आत्मा से वापस आने की प्रार्थना की। अंत में उनकी देह को स्नान कराके मणिदीप आश्रम से पालकी में रख कर झोतेश्वर के गंगा कुंड में लाया गया। जहां पर अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को रखा गया।


आज अंतिम दर्शन के लिए ये पहुंचेंगे

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी, विवेक तंख्या सोमवार को सुबह परमहंसी गंगा आश्रम पहुंचेंगे, जो गंगा कुंड स्थल पहुंच कर शंकराचार्य के अंतिम दर्शन करेंगे। वहीं केन्द्रीय मंत्री फग्गनसिंह कुलस्ते सुबह झोतेश्वर पहुंचंगे। इसके अलावा प्रहलाद सिंह पटैल केन्द्रीय राज्यमंत्री दोपहर को झोतेश्वर पहुंचेंगे।

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