देश भर में महक रही नर्मदा की रज से निखरी निर्मला की साहित्य और चित्रकला

शी न्यूज- मां नर्मदा की रज से निखरी निर्मला सिंह की साहित्य और चित्रकला देश भर में अपनी खुशबू बिखेर रही है। देश के प्रख्यात कवयित्री और चित्रकारों में अपनी खास पहचान रखने वाली निर्मला सिंह न केवल नरसिंहपुर बल्कि देश भर की नारी शक्ति का गौरव हैं।

By: ajay khare

Published: 15 Nov 2020, 08:21 PM IST

अजय खरे.नरसिंहपुर. मां नर्मदा की रज से निखरी निर्मला सिंह की साहित्य और चित्रकला देश भर में अपनी खुशबू बिखेर रही है। देश के प्रख्यात कवयित्री और चित्रकारों में अपनी खास पहचान रखने वाली निर्मला सिंह न केवल नरसिंहपुर बल्कि देश भर की नारी शक्ति का गौरव हैं। अपनी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा यहां के महारानी लक्ष्मी बाई कन्या विद्यालय से पूरी करने वाली निर्मला देश की सुविख्यात कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान के परिवार से संबंध रखती हैं। निर्मला सिंह देश विदेश की प्रसिद्ध कला वीथिका में अपनी कविताओं पर आधारित कलाकृतियों के प्रदर्शन के लिए जानी जाती हैं। अभी तक उनकी 100 से ज्यादा कला प्रदर्शनी लग चुकी हैं जिनमें एकल, सामूहिक, कला कार्यशाला आदि शामिल हंै । २००४ से २००५ तक ललित कला अकादमी चंडीगढ़ की सदस्य रहीं निर्मला ने महज 10 साल की उम्र से कविताएं लिखना शुरू कर दिया था। पिछले 50 वर्षों से उनकी कविताओं, लघुकथाओं के प्रकाशन का सिलसिला जारी है । अंग्रेजी साहित्य से एमए निर्मला ने विद्यार्थी जीवन के दौरान संस्थान की पत्र पत्रिकाओं में सह संपादन का कार्य बखूबी किया। अभी तक उनके ६ काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनके प्रेरणा स्रोत उनकी सास कृष्णा चौधरी और उनके पिता प्रोफेसर चंद्रशेखर चौहान रहे हैं ।
इस नए प्रयोग ने साहित्य और चित्रकला जगत में किया चर्चित
निर्मला ने २० साल पहले एक नया प्रयोग किया जिसने उन्हें साहित्य और चित्रकला जगत में खासा चर्चित किया। उन्होंने अपनी कविताओं को रंगों के माध्यम से जीवंत बनाना शुरू किया जो काफी सराहा गया और जिसने कला पारखियों को अपनी ओर आकर्षित किया। प्रत्येक चित्र के साथ हाथ से लिखी कविता और चित्र की शब्दों के रूप में अभिव्यक्ति ने साहित्य और कला प्रेमियों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। प्रयोगधर्मी निर्मला की इस कला का प्रदर्शन देश भर की प्रसिद्ध कला वीथिकाओं मेंं किया गया। देश के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, गीतकार गुलजार, प्रसिद्ध चित्रकार गुजराल उनकी इस कला के साक्षी बने। उन्होंने उनकी इस कला की सराहना की और प्रोत्साहित भी किया। निर्मला का कहना है कि वे सरल भाषा में अपनेभावों को शब्दों के रूप में व्यक्त करती हैं जैसे भाव मन में आते हैं वैैसे ही कविता के रूप में साकार होते जाते हैं। निर्मला नई पीढ़ी के कवियों, साहित्यकारों और चित्रकारों की प्रेरणास्रोत हैं। यहां के नवोदित कवि उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।
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