महाकोशल सुगर मिल का कारनामा,ट्रालों का जमा नहीं किया 60 लाख टैक्स, किसानों से वसूल रहे किराया

पत्रिका एक्सपोज-बचई स्थित महाकोशल सुगर मिल एक ओर जहां 200 ट्राला का करीब 60 लाख रुपए का टैक्स दबा कर बैठी है वहीं ट्राला जब्ती की कार्रवाई से बचने के लिए ट्राला किसानों को थमा दिए हैं। ताकि गन्ना सीजन की वजह से परिवहन विभाग किसानों से ट्राला जब्त न कर सके और यदि जब्त करेगा तो उसे किसानों के विरोध का सामना करना पड़ेगा।

By: ajay khare

Published: 26 Dec 2020, 09:37 PM IST

नरसिंहपुर. बचई स्थित महाकोशल सुगर मिल एक ओर जहां 200 ट्राला का करीब 60 लाख रुपए का टैक्स दबा कर बैठी है वहीं ट्राला जब्ती की कार्रवाई से बचने के लिए ट्राला किसानों को थमा दिए हैं। ताकि गन्ना सीजन की वजह से परिवहन विभाग किसानों से ट्राला जब्त न कर सके और यदि जब्त करेगा तो उसे किसानों के विरोध का सामना करना पड़ेगा। जिससे किसान और परिवहन विभाग आमने सामने हो जाएंगे। इतना ही नहीं सुगर मिल प्रबंधन दूसरी ओर इन किसानों से गन्ना परिवहन के शुल्क के रूप में हर साल लाखों रुपए वसूल रहा है। इस तरह एक ओर जहां ट्राला का टैक्स जमा न कर शासन के लाखों रुपए की कर चोरी की जा रही है तो वहीं अवैध रूप से चलाए जा रहे इन ट्रालों से हर साल लाखों रुपए कमाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि महाकोशल सुगर मिल जो 200 ट्राला गन्ने के परिवहन के लिए उपयोग कर रहा है उन पर शासन का 10 प्रतिशत पंजीयन शुल्क और उस पर 10 प्रतिशत की दर से पेनाल्टी के रूप में करीब 60 लाख रुपए अभी तक जमा नहीं किया गया है। परिवहन विभाग अभी तक इन ट्रालों की जब्ती व टैक्स वसूली की कार्रवाई नहीं कर सका है।
इस तरह चल रहा अवैध ट्रालों से लाखों कमाने का खेल
सुगर मिल ने अपनी मिल क्षेत्र के गन्ना किसानों का गन्ना मिल तक लाने के लिए अपने 200 ट्राला उनके हवाले कर दिए हैं। किसान के खेत से मिल तक गन्ना लाने के लिए किसानों से १० रुपए प्रति क्विंटल की दर से परिवहन भाड़ा वसूला जाता है। 5 रुपए पहले भुगतान पर और 5 रुपए आखिरी भुगतान पर किसान से वसूले जाते हैं। यदि कोई किसान मिल के ट्राला से 500 क्विंटल गन्ना का परिवहन कर मिल को बेचता है तो उससे 5 हजार रुपए परिवहन प्रभार के रूप में मिल द्वारा वसूल किया जाता है। इस तरह मिल को गन्ना बेचने वाले हजारों किसानों से लाखों रुपए का परिवहन शुल्क सुगर मिल उन ट्रालों के नाम पर वसूलती है जिनका परिवहन विभाग का 60 लाख रुपए का टैक्स मिल ने दबा कर रखा है। इस बारे में महाकोशल सुगर मिल के एमडी रजा नवाब से बात करने का प्रयास किया गया पर संपर्क नहीं हो सका।
इन परिस्थितियों का लाभ उठा रहा मिल प्रबंधन
परिवहन विभाग द्वारा गन्ने से भरा ट्राला जब्त करने पर किसान भड़क जाएंगे और प्रशासन बेबस हो जाएगा। उसे बैक फुट पर आना पड़ेगा। दूसरी ओर किसानों केे नाम पर राजनीति शुरू हो जाएगी जिसका फायदा भी मिल प्रबंधन को मिलेगा।
वर्जन
महाकोशल मिल ने हमें अपना ट्राला इस शर्त पर दिया कि हमें 10 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भाड़ा देना होगा। साथ ही यह भी कहा था कि ट्राला परिवहन विभाग जब्त न करे यह जिम्मेदारी भी लेनी होगी। हमसे कहा गया कि यदि पुलिस या परिवहन विभाग ट्राला पकड़े तो यह कहना कि यह मिल का नहीं हमारा ट्राला है।
दीपक पटेल, गन्ना किसान

वर्जन
हमने महाकोशल मिल को अपना गन्ना बेचा है, हमें मिल ने अपना ट्राला दिया था जिसके एवज में हमें १० रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से भाड़ा देना है। 5 रुपए अभी और 5 रुपए बाद में काटे जाएंगे जब पूरा भुगतान होगा। हमारे भुगतान में से पूरा भाड़ा काट लिया जाएगा।
राकेश मेहरा गन्ना किसान

वर्जन
महाकोशल सुगर मिल द्वारा अपने ट्रालों का उपयोग किसानों की आड़ में किया जा रहा है और दूसरी ओर शासन का लाखों रुपए का टैक्स जमा नहीं किया जा रहा। यह शासन और किसानों के साथ धोखा है। परिवहन विभाग को गन्ने से भरे ट्रालों का मौके पर जाकर पंचनामा बनाना चाहिए कि यह ट्राला वास्तव में किसान का है या मिल का। यदि किसान अपना बताता है तो उससे ट्राला खरीदने का बिल देखना चाहिए। मिल के ट्रालों की पहचान कर नियमानुसार टैक्स वसूल करने की कार्रवाई करनी चाहिए।
बाबूलाल पटेल, अध्यक्ष किसान यूनियन
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वर्जन
महाकोशल सुगर मिल के ट्रालों पर जब कार्रवाई करने जाते हैं तो सुगर मिल प्रबंधन उन्हें किसानों का ट्राला बता देता है। फिर भी हम अपने स्तर पर ट्रालों के वास्तविक मालिक का पता कर कार्रवाई कर रहे हैं।
जितेंद्र शर्मा, आरटीओ

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