MP का एक ऐसा गांव जहां बचे हैं नाम मात्र के लोग

-जनसुविधाओं के अभाव में लोगों का पलायन

By: Ajay Chaturvedi

Published: 25 May 2021, 03:14 PM IST

नरसिंहपुर. MP का एक ऐसा गांव जहां बचे हैं नाम मात्र के लोग। यहां रहने वालों ने अब गांव को अलविदा कह दिया है। वो शहरी सीमा के पास जा बसे हैं। कुछ ने तो जिला ही छोड़ दिया है। आखिर करते भी क्या, इस गांव में गुजर-बसर के लिए कोई सुविधा ही नहीं तो जहां जिसे मिली जगह वहीं जा के बस गए। कहने को यह इलाका नगर परिषद क्षेत्र में आता है। लेकिन यहां न चलने को कायदे की सड़क है, न पेयजल, ना ही बिजली। आदिवासी बहुल गांव में अब तो कहने को एक-दो परिवार ही रह गए हैं।

तेंदूखेड़ा से करीब डेढ़ किमी दूर स्थित इस गांव में पहले भी बहुत बड़ी आबादी नहीं थी, महज 25-30 परिवारों के करीब सवा सौ लोग ही थे। लेकिन जब तेंदूखेड़ा ग्राम पंचायत से नगर परिषद में तब्दील हो गया तो यह गांव वार्ड क्रमांक 14 के रूप में परिषद में शामिल हो गया। हाल ये है कि इस वार्ड में पानी के लिए केवल एक हेंडपंप है। कक्षा एक से पांचवीं तक का प्राइमरी स्कूल खुला था पर मुख्य सड़क मार्ग से गांव तक जाने आवागमन की उचित व्यवस्था नहीं रहने से बच्चे वहां तक पहुंच ही नहीं पाते थे। बरसात के दिनों में तो रास्ता चलना मुश्किल हो जाता है। बिजली है नहीं। ऐसे में लोगों ने एक-एक कर वार्ड से पलायन करना शुरू कर दिया। कुछ मजदूरी की तलाश में बाहर चले गए तो कुछ ने नगरीय क्षेत्र में डेरा जमा लिया। बच्चों को पढ़ाई के लिए खोला गया स्कूल भवन अब खंडहर में तब्दील हो गया है।

लोगों का कहना है कि नगर पंचायत ने अपने नगरीय स्वरूप को धारण करने के लिए भले ही इन आदिवासी बाहुल्य छोटे-छोटे ग्रामों का समावेश कर नगरीय स्वरूप धारण कर लिया। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन ग्रामों का केवल सियासी उपयोग ही किया गया। इन गांवों का परिषद में शामिल होने से नागरिको का कोई भला नहीं हो सका है। ये है बूढ़ा गांव।

लोग बताते हैं कि अगर मुख्य सड़क से मात्र एक किमी की सड़क बन जाए तो बड़ी सुविधा हो जाए। आवागमन शुरू हो जाए। ग्रामीण कहते है कि जामनपानी, भौंरपानी, आलनपुर और छीतापार, कठोतिया के लोग भी यही दंश झेल रहे हैं। यहां भी न तो पेयजल के लिए पाइप लाइन डाली गई है और न ही बिजली की समुचित व्यवस्था है। यहां के वाशिंदे कहते है कि उनका गांव सिर्फ नगर परिषद में शामिल है बाकी यहां विकास कार्य देखने नहीं मिलते है। यहां के वाशिंदे अपने आपको ठगा महसूस कर रहे है।

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