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खेती में रासायनिक खाद के अधिक प्रयोग से भूजल मेंं बढ़ रहा कई गुना सल्फर व नाइट्रेट

खेती में रासायनिक खादों के अत्याधिक उपयोग से यहां के भूजल में सल्फर और नाइट्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ रही है। जिससे पानी जहरीला हो रहा है ।

नरसिंहपुर

Updated: May 23, 2022 10:05:13 pm

नरसिंहपुर. खेती में रासायनिक खादों के अत्याधिक उपयोग से यहां के भूजल में सल्फर और नाइट्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ रही है। जिससे पानी जहरीला हो रहा है । जिले के भूजल में सल्फेट की मात्रा 3 से २४० मिलीग्राम/लीटर के बीच मिली है। भूजल के लगभग 81त्न नमूने सल्फेट सांद्रता के लिए 200 मिलीग्राम/लीटर की स्वीकार्य सीमा के भीतर थे। लगभग 22 प्रतिशत नमूनों में सल्फेट की सांद्रता २४० मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक दर्ज की गई जो कि अनुमेय सीमा से अधिक है। सल्फेट की उच्चतम सांद्रता बचई (२५० मिलीग्राम/लीटर), धमना (२३५ मिलीग्राम/लीटर) और करकबेल (२४० मिलीग्राम/लीटर/लीटर) के भूजल में पाई गई है। जिलेवासियों के लिए यह खबर चौंकाने वाली हो सकती है कि यहां पानी धीरे-धीरे जहरीला होता जा रहा है। जिले के भू-जल में खतरनाक रसायन घुलने का यही क्रम बना रहा तो जिले के बड़े हिस्से का पानी पीने योग्य नहीं बचेगा। यहां के भू-जल में नाइट्रेट व सल्फेट मात्रा बढ़ रही है। कई जगह यह मात्रा स्वीकार्य सीमा से कहीं ज्यादा हो गई है। भूजल में नाइट्रेट बढऩे के पीछे मानवजनित कारण है। बताया गया, उन इलाकों के भूजल में नाइट्रेट ज्यादा बढ़ मात्रा में मिला है, जहां सघन खेती में फर्टिलाइजर का अंधाधुंध प्रयोग हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जिले के भूजल में नाइट्रेट की मात्रा 1 से ७० मिलीग्राम/लीटर के बीच मिली है। भूजल के लगभग 72 प्रतिशत नमूनों में नाइट्रेट की मात्रा 45 मिग्रा /लीटर की स्वीकार्य सीमा के भीतर दर्ज की गई। जबकि, 28 प्रतिशत पानी के नमूनों में बीआइएस की सिफारिश के अनुसार स्वीकार्य 45 मिलीग्राम/लीटर से अधिक दर्ज की गई।
Ground Water
Ground Water
यहां मिला ज्यादा नाइट्रेट

जानकारी के अनुसार, आमगांव बड़ा (७० मिलीग्राम/लीटर), तेंदूखेड़ा (६५ मिलीग्राम/लीटर), चीचली (७५ मिलीग्राम/लीटर), गाडरवारा (६२ मिलीग्राम/लीटर), चावरपाठा (६० मिलीग्राम/लीटर) के भूजल में नाइट्रेट की अधिक सांद्रता का पता चला है। भूजल में नाइट्रेट की उच्च सांद्रता की मुख्य वजह मानव जनित गतिविधियों या उर्वरक का अत्यधिक उपयोग बताया गया है। फर्टिलाइजर के अंधाधुंध प्रयोग के अलावा सिंचाई की अवैज्ञानिक तकनीक भी यह समस्या पैदा कर रही है। पानी में नाइट्रेट की मात्रा अधिक होने से पाचन क्रिया व सांस लेने में तकलीफ का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययन क्षेत्र में भूजल की कुल कठोरता 110 से ७०० मिलीग्राम/लीटर के बीच थी। सामान्य तौर पर इसकी स्वीकार्य सीमा 300 से 600 मिलीग्राम प्रतिलीटर है। लेकिन बोहानी में ३२०, बरांझ ३४५, देवा कछार में ३६० व लोकी पार में ३३० मिलीग्राम/लीटर की कठोरता दर्ज की गई है। जो की तय सीमा से काफी ज्यादा है। इसी तरह से लवणता की स्थिति बिगड़ रही है। बताया गया है कि सी 3 और सी 4 श्रेणी में आने वाले नमूनों का उपयोग सिंचाई के लिए तब तक नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि उचित प्रबंधन न हो।
यह है कारण
जानकारी के अनुसार जिले में पानी का दोहन ज्यादा हो रहा है इसके एवज में पानी का रिचार्ज कम है। बदली खेती की पद्धति के कारण प्राकृतिक रिचार्ज भी सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। लिहाजा, धरती के अन्दर से निकाले जा रहे पानी के कारण उसमें नाइट्रेट व सल्फर की ज्यादा मात्रा आ रही है।
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कहीं फ्लोराइड कहीं नाइट्रेट बना स्वास्थ्य का दुश्मन
बचई के आसपास पहाड़ी क्षेत्रों में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है तो शहरी क्षेत्र में नाइट्र्रेट की मात्रा निर्धारित मानक से ज्यादा होने से लोग बीमार हो रहे हैं। शासकीय जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट के मुताबिक बचई के पहाड़ी क्षेत्र में पानी के जो सेम्पल जांच के लिए आ रहे हैं उनमें फ्लोराइड की मात्रा 1.7 पीपीएम मिल रही है जो निर्धारित मानक 1.5 पीपीएम से कहीं ज्यादा है। इस वजह से यहां के लोगों में फ्लोरिसिस की समस्या देखने को मिल रही है। यहां के लोग दांतों में पीलापन, मसूढों में समस्या व हड्डियों से संबंधित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। शहरी क्षेत्र में जो निजी व शासकीय बोर कराए जा रहे हैं उनके पानी के परीक्षण में कई जगहों पर पानी में नाइट्रेट की मात्रा स्वास्थ्य के लिहाज से काफी ज्यादा निकल रही है। एक लीटर पानी में यदि नाइट्रेट की मात्रा 45 मिलीग्राम से ज्यादा होती है तो उसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। शहर के अलग अलग क्षेत्रों में कराए गए निजी व शासकीय बोर के पानी का परीक्षण कराए जाने पर उनमें नाइट्रेट की मात्रा 50 से 55 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पाई गई है। जानकारी के मुताबिक शहर में कराए जा रहे नए बोर में पचास फीसदी बोर में नाइट्रेट की मात्रा ज्यादा पाई जा रही है।
बच्चों और बड़ों के लिए घातक है नाइट्रेट की ज्यादा मात्रा
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पानी में नाइट्रेट की ज्यादा मात्रा बच्चों और बड़ों दोनों के लिए हानिकारक है, बच्चों में इससे शरीर में नीले रंग के चकत्ते पडऩे वाली बीमारी ब्लू बेबी सिंड्रोम होती है, यह दुधमुंहे बच्चों के पाचन संस्थान और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है साथ ही बड़ों में आंतों के कैंसर, मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है, इसकी ज्यादा मात्रा हीमोग्लोबिन का स्वरूप बिगाड़ देती है जिससे ऊतकों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचती। नाइट्रेट मुख्यत: अकार्बनिक है और यह ऑक्सीडायजिंग एजेंट का काम करता है और विस्फोटक बनाने में इसका इस्तेमाल होता है।
वर्जन
खेती में अत्याधिक मात्रा में रसायनों का उपयोग किए जाने से इसका असर भूजल पर पड़ता है। ये सभी रसायन मिट्टी और पानी में मिलते हैं जिससे पानी में सल्फर और नाइट्रेट की मात्रा बढ़ती है। निर्धारित सीमा से ज्यादा मात्रा होने पर यह पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकाकर होता है।
राजेश त्रिपाठी, उप संचालक कृषि
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