संगीत के सुरों ने कराया बंदियों को दूसरों के दुख दर्द का अहसास,पैदा की जीने की नई आस

बंदी गृह में सजा काट रहे कैदियों के जीवन में संगीत के रस घोलने, उमंग पैदा करने और अपराध बोध से दूर करने के लिए जेल में एक गीत संगीत का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

By: ajay khare

Updated: 16 Dec 2020, 10:31 PM IST

नरसिंहपुर. रुक जाना नहीं तू कहीं हार के, कांटों पे चलके मिलेंगे साये बहार के। आदमी जो कहता है आदमी जो करता है जिंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं । जेल की जिंदगी पर यह गीत चरितार्थ होते हैं। जिंदगी की ताल संगीत के सुरों की तरह होती है, एक बार सुर बिगड़ गए तो संभालना बड़ा मुश्किल होता है यही बात है कि किसी कारणवश या अनजाने में जो लोग अपराध के रास्ते पर चलकर अपनी जिंदगी की सुर ताल को बिगाड़ लेेेते हैं वे मंजिल की बजाय जेल पहुंच जाते हैं। बंदी गृह में सजा काट रहे कैदियों के जीवन में संगीत के रस घोलने, उमंग पैदा करने और अपराध बोध से दूर करने के लिए जेल में एक गीत संगीत का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सुर संगीत के साधक और कला रसिक शामिल हुए । कार्यक्रम का आयोजन नरसिंह जेेल बैंड आर्केस्ट्रा द्वारा किया गया । कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रथम श्रेणी न्यायाधीश स्वप्नश्री सिंह थीं। इसके अलावा इम्तियाज अहमद संगीत शिक्षक केंद्रीय जेल भोपाल एवं सुधीर दुबे अधिवक्ता विशेष तौर पर मौजूद थे। कार्यक्रम में सहयोगी कलाकार पंकज सागर, सुनील चौहान, महिपाल जाटव, पुष्पद गुनेले, राम चरण मेहरा, दीपक पाठक, शेखर ने नए नए पुराने और देशभक्ति गीतों के माध्यम से जेल में गीत संगीत की स्वर लहरियां बिखेरीं। बंदियों को नए पुराने भूले बिसरे गीत सुनने को मिले जेल के बंदियों ने गीत संगीत की शानदार प्रस्तुतियां दीं। जेल अधीक्षक शैफाली तिवारी का कहना है कि संगीत के सुरों से जुड़ कर बंदी अपने जीवन के बिगड़े सुरों को संवार सकते हैं । गीत संगीत एक ऐसा माध्यम हंै जो मानवीय संवेदनाएं पैदा करते हैं दूसरों के दुख दर्द की अनुभूति कराते हैं।
संगीत के सुरों ने कराया बंदियों को दूसरों के दुख दर्द का अहसास,पैदा की जीने की नई आस
नरसिंहपुर. रुक जाना नहीं तू कहीं हार के, कांटों पे चलके मिलेंगे साये बहार के। आदमी जो कहता है आदमी जो करता है जिंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं । जेल की जिंदगी पर यह गीत चरितार्थ होते हैं। जिंदगी की ताल संगीत के सुरों की तरह होती है, एक बार सुर बिगड़ गए तो संभालना बड़ा मुश्किल होता है यही बात है कि किसी कारणवश या अनजाने में जो लोग अपराध के रास्ते पर चलकर अपनी जिंदगी की सुर ताल को बिगाड़ लेेेते हैं वे मंजिल की बजाय जेल पहुंच जाते हैं। बंदी गृह में सजा काट रहे कैदियों के जीवन में संगीत के रस घोलने, उमंग पैदा करने और अपराध बोध से दूर करने के लिए जेल में एक गीत संगीत का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सुर संगीत के साधक और कला रसिक शामिल हुए । कार्यक्रम का आयोजन नरसिंह जेेल बैंड आर्केस्ट्रा द्वारा किया गया । कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रथम श्रेणी न्यायाधीश स्वप्नश्री सिंह थीं। इसके अलावा इम्तियाज अहमद संगीत शिक्षक केंद्रीय जेल भोपाल एवं सुधीर दुबे अधिवक्ता विशेष तौर पर मौजूद थे। कार्यक्रम में सहयोगी कलाकार पंकज सागर, सुनील चौहान, महिपाल जाटव, पुष्पद गुनेले, राम चरण मेहरा, दीपक पाठक, शेखर ने नए नए पुराने और देशभक्ति गीतों के माध्यम से जेल में गीत संगीत की स्वर लहरियां बिखेरीं। बंदियों को नए पुराने भूले बिसरे गीत सुनने को मिले जेल के बंदियों ने गीत संगीत की शानदार प्रस्तुतियां दीं। जेल अधीक्षक शैफाली तिवारी का कहना है कि संगीत के सुरों से जुड़ कर बंदी अपने जीवन के बिगड़े सुरों को संवार सकते हैं । गीत संगीत एक ऐसा माध्यम हंै जो मानवीय संवेदनाएं पैदा करते हैं दूसरों के दुख दर्द की अनुभूति कराते हैं।

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