न पर्याप्त प्रोफेसर हैं न कक्षाएं लगाने के लिए कक्ष

न पर्याप्त प्रोफेसर हैं न कक्षाएं लगाने के लिए कक्ष
narsinghpur PG College

Abi Shankar Nagaich | Publish: Sep, 16 2019 08:22:16 PM (IST) Narsinghpur, Narsinghpur, Madhya Pradesh, India

55 साल के बाद भी पीजी कॉलेज में नहीं बढ़े संसाधन, जनभागीदारी से रखे गए कर्मचारियों की दम पर टिका है पीजी कॉलेज

नरसिंहपुर. जिले के युवाओं को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मुहैया कराने के लिए आज से करीब 55 साल पहले चंद सैंकड़ा विद्यार्थियों की दर्ज संख्या के साथ आरंभ किए गए जिले के शासकीय पीजी कॉलेज में सालों गुजरने के बाद छात्रों की संख्या तो बढ़ गई है। लेकिन उनकी शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इस कॉलेज में आधारभूत जरूरतों की पूर्ति नहीं की गई है। जिसके चलते आलम यह है कि यहां न तो छात्रों की कक्षाएं लगाने के लिए पर्याप्त कक्ष है और न ही उन्हें पढ़ाने के लिए समुचित स्टाफ। वहीं कॉलेज का गैरशिक्षकीय विभाग भी सिर्फ जनभागीदारी से रखे गए कर्मचारियों की दम पर टिका हुआ है।
ज्ञात हो कि जिले में सन 1958 में एक निजी कॉलेज के तौर पर इसकी शुरूआत हुई थी, इसके बाद 1964 में इसे शासकीय पीजी कॉलेज बनाया गया। उस समय इस कॉलेज में करीब ढाई सौ से तीन सौ के बीच छात्रों की दर्ज संख्या हुआ करती थी। गुजरते सालों के साथ यह कॉलेज जिले का लीड कॉलेज बन गया और यहां साल दर साल छात्रों की संख्या में भी इजाफा होता चला गया। जो आज की तारीख में 6 हजार से अधिक पहुंच गया है। लेकिन कॉलेज के संसाधनों में वृद्धि नही हो सकी। जिसके परिणाम स्वरूप कॉलेज में जहां एक ओर छात्रों के लिए कमरों की कमी के अलावा शैक्षणिक स्टाफ और गैरशैक्षणिक स्टाफ की समस्या कॉलेज संचालन में आड़े आने लगी है। जानकारों का कहना है पीजी कॉलेज में वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों के अनुपात में छात्रों की संख्या का आंकड़ा अपनी चरम सीमा पर पहुंचा गया है। ऐसे में यदि समय रहते यहां के संसाधनों में वृद्धि नहीं की जाती है, तो आगामी दिनों में कॉलेज की शिक्षण व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।


कमरे में लगती है अलग- अलग शिफ्ट
पीजी कॉलेज में क मरों की संख्या की कमी यहां काफी समय से महसूस की जा रही है। बताया गया है पीजी कॉलेज प्रबंधन के पास वर्तमान में मात्र 16 कमरे ही उपलब्ध है, जिसके कारण विभिन्न संकायों की कक्षाओं के सेक्सनों का संचालन अलग-अलग पाली में करना पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक यदि कॉलेज में कम से कम इतने ही कमरे और उपलब्ध करा दिये जाएं, तब कहीं जाकर एक ही सत्र में सभी कक्षाएं संचालित हो सकेंगी। इसी तरह कॉलेज में शिक्षकीय स्टाफ के लिए स्वीकृत 48 पदों के विरुद्ध 21 नियमित पद खाली पड़े हैं। वहीं गैर शिक्षकीय स्टाफ में क्लास तीन और चार के 17 पद खाली होने के कारण यहां नियमित हेड क्लर्क, एकांउटेंट और कैशियर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जनभागीदारी से रखे गए स्टाफ से काम चलाया जा रहा है।


इनका कहना है
कॉलेज में छात्रों की दर्ज संख्या में पिछले पांच सालों में इजाफा हुआ है और स्टाफ और संसाधन अभी पुराने समय के ही हैं। इससे कॉलेज में संसाधनों और स्टाफ की कमी महसूस की जा रही है। इस संबंध में कमिश्नर को प्रस्ताव भेजकर अवगत कराया है। चूंकि यह जिले का लीड कॉलेज है यहां संसाधन और स्टाफ में वृद्धि होना बहुत जरूरी है, इससे छात्रों को बेहतर शिक्षा और वातावरण मिल सकेगा।
डॉ. आर के चौकसे, प्राचार्य पीजी कालेज नरसिंहपुर

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