रात को नही मिलती एक भी बस, रात में रुकना मजबूरी

दिन में एक सैंकड़ा उपलब्ध, रात्रिकालीन बस सेवा नही मिलने से भटकतीं है सवारियां

By: abishankar nagaich

Published: 03 Mar 2019, 10:32 PM IST

नरसिंहपुर. जिला मुख्यालय पर हजारों लोगों की आवाजाही के केंद्र बस स्टेंड पर जहां दिन की पारी में एक सैंकड़ा बसों का आवागमन होता है वहीं रात होते होते यहां इक् का दुक् का बसें भी नही मिलती है। जिसके चलते यहां रात के समय लोगों को परिवहन का साधन न मिलने से काफी भटकाव का सामना करना पड़ता है। गौरतलब है जिला मुख्यालय का बस स्टेंड से जबलपुर,सागर,छिंदवाड़ा,सिवनी सहित जिले के करीब पचास रूटों पर दिन भर बसें चलती हैं। जिनसे प्रतिदिन हजारों लोग नरसिंहपुर से अन्य स्थानों की ओर आवाजाही करते हैं। सूत्रों के अनुसार यहां से दिन में सुबह से लेकर शाम तक लगभग सवा सौ से ज्यादा परमिटधारी यात्री बसें चलती है। जो अलसुबह से शुरू होकर शाम तक संचालित होती है। लेकिन यहां शाम को सात बजे के बाद कमाबेश सभी बसें हाल्टिंग पर चली जाती है। ऐसे में शाम को सात बजे के बाद यदि किसी यात्री को सागर,जबलपुर,छिंदवाड़ा या फिर किसी ग्रामीण क्षेत्र के रूट पर जाना हो तो उसे बस नही मिलती और उसके सामने अपने गंतव्य तक पहुंचने की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है।


सड़क मार्ग के यात्री ज्यादा परेशान
गौरतलब है रात के समय यहां से बसों का संचालन न होने के कारण सर्वाधिक परेशानी उन यात्रियों को उठाना पड़ती है,जिनके लिए नरसिंहपुर से अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए सिर्फ सड़क मार्ग ही एकमात्र रास्ता होता है। बस की सुविधा से वंचित लोगों के सामने रात को यहां वहां भटकने के सिवा कोई विकल्प नही रह जाता है। उल्लेखनीय है नरसिंहपुर से ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा छिंदवाड़ा,सागर और रायसेन की ओर जाने के लिए सिर्फ सड़क मार्ग ही एकमात्र रास्ता है। इन पर यदि किसी को दस किमी से अधिक आगे का सफर करना हो तो निजी स्तर पर किराये का वाहन लेना काफी मंहगा पड़ता है।


अपडाउनर्स को होती है परेशानी
गौरतलब है ग्रामीण क्षेत्रों सें प्रतिदिन सैंकड़ों लोग अपनी नौकरी,व्यापार,पेशा या फिर मजदूरी के लिए जिला मुख्यालय पहुंचते है। ये लोग अक्सर सुबह तो बसों की सहजउपलब्धता क ी वजह से अपने ठिकाने तक पहुंच जाते है। लेकिन यदि इन्हें शाम को वापसी में देर हो जाये तो साधन मिलना काफी मुश्किल होता है। सूत्र बताते हैं कि रात के समय यात्रियों की संख्या कम होने के कारण बस आपरेटर व्यवसायिक दृष्टिकोण के चलते लोकल ग्रामीण क्षेत्रों के परमिट लेना पसंद नही करते है।


इनका कहना है-
किसी भी रूट पर बस आपरेटर की डिमांड पर ही परमिट दिया जा सकता है। लेकिन आमतौर आपरेटर दिन भर बसें चलाने के बाद रात के समय अपनी बसें हाल्ट करना पसंद करते हैं इसके अलावा व्यवसायिक कारणों के चलते भी रात को परमिट नही लेते है। फिर भी यदि कोई आपरेटर परमिट लेना चाहे उसे दिया जा सकता है।
जितेंद्र शर्मा जिला परिवहन अधिकारी नरसिंहपुर

 

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