पत्रिका चेंज मेकर अधिवक्ताओं ने ही आजादी की लड़ाई लड़कर अंग्रेजों को भगाया था

पत्रिका चेंज मेकर  अधिवक्ताओं ने ही आजादी की लड़ाई लड़कर अंग्रेजों को भगाया था

ajay khare | Publish: May, 17 2018 07:04:02 PM (IST) Narsinghpur, Madhya Pradesh, India

गाडरवारा में अधिवक्ताओं ने लिए राजीति में स्वच्छता के संकल्प

गाडरवारा। पत्रिका ने चेंजमेकर अभियान चलाकर एक महान विषय को सामने रखा है। अधिवक्ताओं ने ही देश की आजादी की लड़ाई में भाग लेकर अंग्रेजों को इस देश से भगाया था। इनमें एक अधिवक्ता महात्मा गांधी भी थे जिन्होंने अहिंसक आंदोलन चला कर भारत को स्वतंत्र कराने में प्रमुख भूमिका निभाई। आज पुन: पत्रिका ने हम अधिवक्ताओं को चेंज मेकर अभियान से जोड़कर जगाया। इसके लिए पत्रिका का अनंत आभार, धन्यवाद। यदि अधिवक्ता जागरूक हो जाएं तो बहुत बड़े बदलाव के नायक बन सकते हैं। उक्त आशय के उद्गार गुरुवार दोपहर सिविल कोर्ट गाडरवारा के अधिवक्ता कक्ष में पत्रिका चेंज मेकर अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित अधिवक्ता एचबी रफ ीक ने व्यक्त किए। कार्यक्रम में एडवोकेट इंद्रभूषण श्रीवास्तव ने कहा राजनीति में स्वच्छता एवं स्वच्छ राजनीति अलग विषय हैं। 1950 के दशक में राजनीति में सेवाभाव था, जो अब विलुप्त हो गया है। आज परिस्थितियां बदल गई हैं। आज राजनीतिक दल वोटर खरीदते हैं, किसी भी प्रकार चुनाव जीतना प्रमुख लक्ष्य रहता है। जबकि 50 के दशक में देश में साक्षरता का प्रतिशत बेहद कम था। लेकिन राजनीति में स्वच्छता, मर्यादा, मूल्यों की राजनीति होती थी। लेकिन अब साक्षरता बढऩे के बावजूद राजनीति गंदी होती जा रही है। आज स्वार्थ हावी है। हमारा संविधान बना तो विधायिका का काम कानून बनाना बताया गया। लेकिन क्या जो कानून बनाए जा रहे हैं उन पर डिबेट हो रही है। आज जनता पर राजनेता अपने दलों की विचारधारा थोप रहे हैं। वर्तमान में न्यायपालिका पर हमले हो रहे हैं कार्यपालिका विधायिका के इशारे पर काम करती है। ऐसे समय राजनीति में बदलाव के लिए अभियान चलाने हेतु पत्रिका का धन्यवाद। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हम, आप में से किसी अच्छे व्यक्ति को टिकट मिले तो क्या जनता उसे जिताएगी, मेरा दावा है वह चुनाव हार जाएगा। आज इस बात पर भी विचार करना होगा कि गलत को गलत कहने का साहस रखें एवं अच्छे व्यक्ति का साथ देकर उसे आगे लाएं। वहीं इसके पूर्व कार्यक्रम के आरंभ में अधिवक्ता अनिल शर्मा ने पत्रिका के प्रयास को सराहा एवं सभी को स्वच्छ राजनीति की कोशिश पर बल दिया। महिला अधिवक्ता रीता कौरव ने कहा बदलाव हमें लाना होगा तंत्र ? सुधरे्र लोक सुधरे, अच्छे लोगों से ही स्वच्छ राजनीति की शुरुआत होगी। अधिवक्ता हिमांशु दुबे ने कहा आज कोई भी दल मूल्य आधारित राजनीति नहीं कर रहा। उन्होंने कहा आज देश में अनेक मीडिया हाउस विदेशों से संचालित हो रहे हैं। ऐसे में भारत का पत्रिका समूह सराहना एवं बधाई का पात्र है। जो आज ऐसा अभियान देश में चला रहे हैं। चेंज मेकर अभियान से जन जागरूकता आएगी। लोग दल को छोड़ व्यक्ति को देखेंगे, मतदान में पार्टी से हटकर अच्छे व्यक्ति को चुनेंगे तो पार्टियां भी मजबूर होकर अच्छे लोगों को ही चुनाव में टिकट देंगी। अधिवक्ता एनएस पटेल ने कहा स्वच्छता की जिम्मेदारी आम लोगों की भी है। क्योंकि पार्टियां एन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहने का प्रयास करती हैं। अपराधी, पूंजीपतियों से गठजोड़ कर नेता चुनाव जीतने वोट खरीदते हैं। शराब बांटते हैं, बूथ कैप्चर, मारपीट सब कुछ राजनीति के नाम पर होता है। मूल मुददे पर्दे के पीछे रह जाते हैं, धर्म, जाति, भाषा, रंग, स्थान के आधार पर राजनीति की जा रही है। गरीबी, बेरोजगारी आज मुददे नहीं रहे। राजनीतिक दल लीक से भटक गए हैं। चुनाव जीतते ही भ्रष्टाचार कर खर्च की भरपाई की जाती है। हमें सभी गलत चीजों का विरोध करना चाहिए। पत्रिका की मुहिम का लाभ जरूर मिलेगा लोगों में जनचेतना जागेगी। अधिवक्ता सुरेंद्र गुर्जर ने कहा आज कोई भी दल केवल सत्ता पाने की राजनीति कर रहा है। बदलाव के नाम पर कुछ राजनीतिक लोग देश को ठग रहे हैं। यदि ऐसे सेमिनार होंगे तो राजनीति का शुद्धिकरण होगा। अधिवक्ताओं को देश के हित में खुल कर बोलना चाहिए। अधिवक्ता वसंत तपा ने कहा पत्रिका की सक्रियता एवं मुहिम को सलाम, ऐसे कार्यक्रम करते रहें, बदलाव निश्चित आएगा। उन्होंने दल बदल कानून में संशोधन पर जोर देते हुए कहा कि क्रासवोट पर उसे तत्काल निरस्त किया जाए। पार्टियों में खरीद फरोख्त नीचे स्तर से होती है। पार्टी की टिकट ऊपर बैठे वकीलों से मिलती है। जब तक ऊपर से प्रत्याशी चयन बूथ लेवल से न हो तब तक दलों को सोचना चाहिए थोपे प्रत्याशी ना लादे जाएं। चयनकर्ता अच्छे लोगों को आगे लाएं साथ ही उन्होंने मतदान की अनिवार्यता का कानून बनाने पर कहा इससे लोग मतदान को बाध्य होंगे जो लोग मतदान न करें न करते हो उन्हें उन्हें दंडित करने का प्रावधान हो। ऐसे में लोग मतदान को बाध्य होंगे। आज नगर में ही अनेक लोग मतदान दिवस पर बाहर चले जाते हैं। देश में गिने.चुने 17-18 प्रतिशत लोग सत्ता चला रहे हैं। जगदीश पटेल अधिवक्ता ने कहा राजनीति में अब तक जो हुआ उसमें कैसे सुधार लाएं, यही पत्रिका का अभियान बताता है। आज लोग बाहुबलियों के आगे नतमस्तक होते हैं। राजनीति गंदी है ऐसा सब कहते हैं लेकिन कोई आगे नहीं आता। पत्रिका का धन्यवाद जो वह चौथे स्तंभ की भूमिका बखूबी निभा रही है। यदि हम एकमत से प्रयास करेंगे तो स्वच्छता जरूर आएगी, आज जन जागृति की जरूरत है। गलत प्रत्याशी का विरोध उस दल के अच्छे लोग भी नहीं करते। सर्वप्रथम पालीटिकल पार्टियों में स्वच्छता लाना चाहिए। अधिवक्ता राजेंद्र सिंह ने कहा कि पहले तपस्या बलिदान की राजनीति थी। अब स्वार्थ स्वहित की राजनीति हो गई है। अर्थशास्त्र का नियम है बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को प्रचलन से बाहर कर देती है। इसी प्रकार पार्टियां पहले खराब लोगों को आगे करती हैं। बेचारे अच्छे लोग घर में बैठे रह जाते हैं। कार्यक्रम का संचालन संयोजक एवं अधिवक्त संघ के सचिव सर्वेश शर्मा ने किया। कार्यक्रम में उदबोधन के उपरांत सभी ने खड़े होकर तीन संकल्प लिए। वहीं कार्यक्रम में चेंजमेकर एवं वालेंटियर के रजिस्टे्रशन के बारे में बताया गया। अंत में आभार कोषाध्यक्ष शंभूदयाल सराठे ने जताया। कार्यक्रम में मंचासीन महिला अधिवक्ता चित्रा कुर्डे, शीलिमा कठल, रीता कौरव, अंजना मालवीय, आशा शर्मा सहित अधिवक्ता संघ उपाध्यक्ष दिनेश वर्मा, गजेंद्र चौकसे, एचएन कौरव, अभय कठल, सुजीत दुबे, नवीन बुधौलिया, नितिन साहू, सुनील गुर्जर, सुशील द्विवेदी, डालचंद कीर, शशांक शर्मा, नीरज कटारे, सैयद अशरफ अली, महेंद्र त्रिपाठी, संदीप अग्रवाल समेत अनेक अधिवक्ता मौजूद रहे।

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