प्री मानसून की बारिश बनी आफत खेतों में रखी करोड़ों की मूंग हुई खराब

अन्नदाता की खुशियों को प्री मानसून की तेज बारिश ने ग्रहण लगा दिया है। कटाई के लिए तैयार और खेतों में काट कर रखी गई हजारों क्विंटल मूंग बारिश के कारण खराब हो गई है। इस बार जिले में किसानों ने १२९६००० क्विंटल ग्रीष्म कालीन मूंग पैदा की थी ।

By: ajay khare

Updated: 12 Jun 2021, 11:45 PM IST

नरसिंहपुर. अन्नदाता की खुशियों को प्री मानसून की तेज बारिश ने ग्रहण लगा दिया है। कटाई के लिए तैयार और खेतों में काट कर रखी गई हजारों क्विंटल मूंग बारिश के कारण खराब हो गई है। इस बार जिले में किसानों ने १२९६००० क्विंटल ग्रीष्म कालीन मूंग पैदा की थी । जिसमें से पचास फीसदी मूंग खराब होने का अनुमान है। सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को हुआ है जो खेतों में पक कर खड़ी मूंग को काटने की तैयारी में थे या काट कर गाहनी कर रहे थे। अचानक बारिश होने से जहां पकी हुई मूंग खराब हो गई है तो गाहनी की जा रही फसल भी खराब हुई है। गौरतलब है कि जिले में इस बार ग्रीष्मकालीन मूंग की बंपर पैदावार हुई थी, मध्यप्रदेश में मूंग के उत्पादन में होशंगाबाद और हरदा के बाद तीसरे स्थान पर रहने वाले इस जिले के किसानों की मेहनत पर प्री मानसून की भारी बारिश ने पानी फेर दिया है।
४.५ अरब की मूंग हुई खराब
शासन ने हाल ही में ७१९६ रुपए प्रति क्विंटल की दर से समर्थन मूल्य पर इसकी खरीदी की घोषणा की थी। १५ जून से मूंग की खरीदी शुरू की जानी है लेकिन पानी ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। कृषि विभाग के अनुसार जिले में इस वर्ष करीब 81 हजार हेक्टर में किसानों द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल ली गई है। मूंग की औसत उपज प्रति हेक्टर 16 क्विंटल तक प्राप्त हुई है। जिले के 46 पंजीयन केन्द्रों पर अब तक २० हजार से अधिक किसानों का पंजीयन हो चुका है। प्रति हेक्टेयर १६ क्विंटल के हिसाब से यहां मूंग का उत्पादन १२९६००० क्विंटल हुआ है। ७१९६ रुपए प्रति क्विंटल की दर से जिले में ९ अरब ३२ करोड़ ६० लाख १६००० रुपए की मूंग पैदा हुई है। प्री मानसून की तेज बारिश में आधी फसल खराब होने का अनुमान है जिसके हिसाब से से ४.५ अरब की फसल खराब हो चुकी है। इस बार जिले में मूंग के बंपर उत्पादन का इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल जहां मूंग का क्षेत्र 30 से 35000 हेक्टेयर था वहीं इस साल दोगुने से भी ज्यादा ८१ हजार हेक्टेयर है । केवल 2 महीने की मेहनत वाली यह फसल जब किसानों को उनकी मेहनत का मीठा फल देने वाली थी तो प्री मानूसून ने किसानों को रुला दिया। यहां के किसानों ने जो मूंग की किस्में उगाई हैं उनमें शिखा, पीडीएम 139, अंबार और विराट प्रमुख हंै।

समय से पहले बारिश से हुआ नुकसान
इस बार बारिश एक सप्ताह पहले ही होने लगी है जिससे किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ा है। पिछले सालों में मानसूनी बारिश का रिकार्ड देखें तो २० जून के आसपास बारिश होती रही। किसान पिछले सालों की बारिश के हिसाब से मूंग की कटाई गाहनी आदि की तैयारी कर रहे थे पर प्री मानसून काफी ताकत से आया और किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हुआ।
तबाह हो गई मूंग की फसल
गाडरवारा. तहसील भर में जगह जगह खेतों में पानी भरने से वहां रखी मंूग की फसल भीगने से किसानों को काफी नुकसान बताया जा रहा है। इस बार कोरोना के प्रतिकूल समय में ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन से किसानों की पूरी आस लगी हुई थी। अधिकतर किसानों की मंूग या तो खेत में खड़ी है अथवा काट कर खेत में रखी गई थी। अचानक झमाझम बारिश ने किसानों को संभलने का भी मौका नहीं दिया, कृषकों के अनुसार इससे बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है। एक ओर किसान शासकीय समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने के पंजीयन कराने में लगा हुआ है। वहीं बरसात से हुए नुकसान के बाद किसान संगठन एवं किसान शासन से नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजे की मांग भी करने लगे हैं। भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री राकेश खेमरिया ने कहा है कि वास्तविक सर्वे कराकर उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
किसानों की पीड़ा
ग्राम रम्पुरा के किसान एवं कृषक नेता चौधरी पृथ्वीराज सिंह ने बताया कि अचानक 4 दिन से लगातार पानी गिरने से खेतों में पानी भर गया। किसान की इस विपत्ति के समय इसको आपदा घोषित कर किसान को बीमा लाभ दिलाया जाए। किसान संघ के युवा वाहिनी संयोजक नितिन तिवारी ने सर्वे कराकर नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
विधायक ने कृषि मंत्री को लिखा पत्र
स्थानीय विधायक सुनीता पटैल ने 12 जून को प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री के नाम पत्र लिखकर विधानसभा क्षेत्र गाडरवारा के अंतर्गत भारी वर्षा से ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल की क्षति का सर्वे का मुआवजा प्रदान करने की मांग की है।
कौंडिय़ा. एक और जहां बारिश से कुछ किसानों में खुशी की लहर है तो वहीं दूसरी ओर मूंग उत्पादक अनेक किसान दुखी हैं। लाखों के मूंग फ सल पानी में जल मग्न हो गई। सुनील राय,महेश रघुवंशी,देवेन्द्र कतिया सहित अन्य किसानों की मूंग की फ सल बारिश के पानी से खराब होने की कगार पर पहुंच गई है।
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वर्जन
दलहनों में मूंग बहुत ही संवेदनशील फसल है, जिन किसानों ने देर से फसल ली थी उन्हें नुकसान हो रहा है, जिन किसानों ने समय पर फसल लेकर कटाई कर ली थी उन्हें नुकसान नहीं हुआ। करीब २५ फीसदी नुकसान का अनुमान है।
राजेश त्रिपाठी उप संचालक कृषि

वर्जन
जिले में कई जगहों पर खेतों में पानी भरने से पकी हुई मूंग पूरी तरह से खराब हो गई है, जिले में अलग अलग जगहों पर २५ से लेकर ५० फीसदी तक फसल पूरी तरह से खराब होने का अनुमान है।
बाबूलाल पटेल, किसान नेता

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