धनलक्ष्मी का कमाल ठेका लेते ही तीन गुना किए रेत के दाम, खनन में नियम दरकिनार

रेत का ठेका बदलते ही रेत के दाम अब तीन गुना बढ़ गए हैं। जिसका कारण यह है कि जिस कंपनी ने यह ठेका लिया है वह अब पहले की तुलना में तीन गुना ज्यादा रायल्टी राशि वसूल रही है। इतना ही नहीं काम शुरू करते ही उसने नियम कायदों को दरकिनार कर दिया है और खुले आम मशीनों से खनन शुरू कर दिया है

By: ajay khare

Updated: 26 Jun 2020, 09:53 PM IST

नरसिंहपुर. रेत का ठेका बदलते ही रेत के दाम अब तीन गुना बढ़ गए हैं। जिसका कारण यह है कि जिस कंपनी ने यह ठेका लिया है वह अब पहले की तुलना में तीन गुना ज्यादा रायल्टी राशि वसूल रही है। इतना ही नहीं काम शुरू करते ही उसने नियम कायदों को दरकिनार कर दिया है और खुले आम मशीनों से खनन शुरू कर दिया है। नई रेत खनन नीति की बजाय पुरानी खनन नीति से रेत का खनन किया जा रहा है और खनिज विभाग कोई कार्रवाई कर रहा है।
जानकारी के अनुसार १९ जून को धनलक्ष्मी मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने माइनिंग कार्पोरेशन से नरसिंहपुर जिले में रेत खदानो से रेत के उत्खनन के लिए अनुबंध किया। यहां की ३६ खदानों से रेत निकालने के लिए ६३ करोड़ ५० लाख रुपए में अनुबंध किया गया है। जो पहले के ठेकों की तुलना में बहुत ज्यादा है। यही वजह है कि अब रेत के लिए लोगों से तीन गुना ज्यादा रायल्टी वसूली जा रही है। नियमानुसार मशीनों से रेत के खनन पर रोक है और मशीनें लगाकर नदियों से रेत का खनन नहीं किया जा सकता है लेकिन इसके बावजूद न केवल हैवी मशीनों का उपयोग कर रेत निकाली जा रही है बल्कि दूसरी खदान की पर्ची पर दूसरी जगहों पर रॉयल्टी की पर्ची थमाई जा रही है। यदि कोई इस बात पर आपत्ति करता है तो उसे रेत देने से मना कर दिया जाता है। जानकारी के अनुसार गाडरवारा की शक्कर नदी से निकाली जा रही रेत के विक्रय पर अजंदा की खदान की रायल्टी पर्ची थमाई जा रही है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण और सिया के निर्देशों का किया जा रहा उल्लंघन
राष्ट्रीय हरित अधिकरण की भोपाल स्थित बेंच ने 26 जुलाई 2016 को दिए अपने आदेश में नदियों से रेत के खनन में मशीन और बड़े वाहनों पर रोक लगाई थी जिसके बाद सिया ने 3 अगस्त 2016 को आदेश जारी किया था कि रेत खदानों में मजदूरों के माध्यम से रेत की निकासी की जाए । व्यावसायिक उपयोग वाले ट्रैक्टर ट्राली ही खदानों में जा सकेंगे जिसमें बीमा भी इसी श्रेणी का होना चाहिए । शर्तों के उल्लंघन पर स्वीकृति तत्काल प्रभाव से निरस्त करने और दोषी ठेकेदार के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए थे। जिसमें सजा और जुर्माना का प्रावधान है ।

७०० की जगह लिए जा रहे २५०० रुपए
इससे पहले जिले में एक ट्रैक्टर रेत के लिए अधिकतम 600 रुपए की रायल्टी राशि ली जाती थी लेकिन अब २५०० रुपए की वसूली जा रही है । जानकारी के अनुसार कंपनी ने अभी तक सिया से अनुमति प्राप्त करने की कुछ औपचारिकताएं पूरी नहीं की हैं। रेत खदान के लिए भले ही माइनिंग कार्पोरेशन से अनुबंध किया गया है पर रेत खदानों से रेत के उत्खनन और परिवहन व डंप आदि की मानीटरिंग की जिम्मेदारी खनिज विभाग की है।

वर्क आर्डर के नाम पर १७ दिन में निकाली गई लाखों की रेत
इस ठेका से पहले यहां ३ जून से लेकर १९ जून तक वर्क ऑर्डर के नाम पर लाखों की रेत की निकासी की गई । जिसमें जमकर खेल हुआ। वर्क ऑर्डर में फर्म को ३१५ घनमीटर रेत उत्खनन की अनुमति दी गई थी पर लोगों ने इसे कई गुना ज्यादा रेत निकाल कर लाखों के वारे न्यारे कर लिए। खनिज विभाग ने ३९ फर्माेँ को रेत खनन की अनुमति दी थी। जिसमें शासन को प्रति ३१५ घन मीटर पर २० हजार रुपए रायल्टी के हिसाब से महज ६३ लाख रुपए मिले पर फर्मों ने करोड़ों की रेत का खेल कर लिया।


वर्जन
धनलक्ष्मी मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने माइनिंग कार्पोरेशन से नरसिंहपुर जिले में रेत खदानो से रेत के उत्खनन के लिए अनुबंध किया है। नर्मदा में मशीनों से रेत खनन की अनुमति नहीं है अन्य खदानों में मशीनों से खनन के लिए कंपनी ने सिया में आवेदन लगाए हैं।
आरके पटेल, प्रभारी खनि अधिकारी

ajay khare Bureau Incharge
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