specialist's,openion- रेमडिसीवर ज्यादा कारगर नहीं,डायबिटीज और हार्ट पेशेंट के लिए जानलेवा हो सकता है स्टेरॉयड : डॉ. विश्वनाथ सोनी

काम की जानकारी/ विशेषज्ञ की राय-कोरोना को लेकर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में दी गई यह जानकारी

By: ajay khare

Published: 15 May 2021, 10:46 PM IST

नरसिंहपुर. कारोना से संक्रमित होने पर रेमडिसीवर के पीछे न भागें, यह उपचार में ज्यादा कारगर नहीं है। यह कहना है इमेरिटेंस कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर डॉ. विश्वनाथ सोनी का। कोरोना काल में करेली में मरीजों को विशेष सेवाएं दे रहे डॉ. सोनी ने बताया है इस संबंध में एमएलएच, आईएमए और यूएसबी के द्वारा आयोजित संयुक्त इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में यह बताया गया है कि रिसर्च के बाद यह बात सामने आई है कि रेमडिसीवर इंजेक्शन कोरोना मरीजों के उपचार में बहुत कारगर नहीं है । इस कॉन्फ्रेंस में देश विदेश के प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजिस्ट और स्पेशलिस्ट शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि अभी तक कोरोना मरीजों उपचार में उपयोग किए गए रेमडिसीवर को लेकर जो निष्कर्ष सामने आए हैं उससे इस बात की पुष्टि हुई है कि केवल इनक्यूबेशन पीरियड यानी कोरोना वायरस के शरीर में प्रवेश करने से 3 से 5 दिन के बीच ही यह असरकारक है। फस्र्ट स्टेज में यह कारगर हो सकता है इससे ज्यादा समय होने पर १०-15 दिन बीत जाने पर यह अनुपयोगी है और इससे कोरोना मरीजों को कोई लाभ नहीं मिलता । दूसरी ओर स्टेरायड के उपयोग से उन मरीजों को खतरा है जो पहले से डायबिटीज, हार्ट, कैंसर,बीपी और अन्य बीमारियों से ग्रसित हैं। उन्हें सावधान रहने की ज्यादा जरूरत है । इसके उपयोग से कोरोना कम होता है लेकिन दूसरी तरफ शुगर, ब्लड प्रेशर और कार्डियक समस्याओं में वृद्धि होने का पूरा खतरा होता है । अत: ऐसे में मरीज को मॉनिटर करने की बहुत ज्यादा जरूरत होती है, मरीज के मरने का खतरा भी होता है अत: इनका उपयोग बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए। कॉन्फ्रेंस में यह कहा गया कि लोग इस समय सीजनल वायरल फीवर के धोखे में न रहें। कोरोना की जांच कर तुरंत उपचार देना अत्यंत आवश्यक है । कॉन्फ्रेंस में यह बात भी सामने आई है कि यह वृद्धों, युवाओं और बच्चों पर समान रूप से असर दिखा रहा है इसलिए वर्तमान में सभी को खतरा है और सभी को सुरक्षित व सावधान रहने की जरूरत है । डॉक्टर सोनी ने बताया है कि कोरोना की वजह से होने वाले सेकेंडरी इंफेक्शन को कंट्रोल करना बहुत जरूरी है इसमें फ्लू की दवाओं से भी बहुत आराम नहीं मिल रहा है । कोरोना वायरस के कारण जो बैक्टीरियल ग्रोथ शरीर के विभिन्न हिस्सों में होती है और उसकी वजह से शरीर के विभिन्न अंगों पर जो असर पड़ रहा है उनकी पहचान कर उसे उस जनरेशन की एंटीबायोटिक देना जरूरी होता है । ब्लैक फंगस नए खतरे के रूप में सामने आया है। डायबिटिक कोरोना पेशेंट जिनका ऑक्सीजन लेवल कम है और ह्यूमड ऑक्सीजन मिल रही है उन्हें ब्लैक फंगस का खतरा बना रहता है । ऐसे मरीजों को जरा सी भी समस्या होने पर आंख, नाक वाले डॉक्टर को दिखा कर तुरंत उपचार लेना होगा तभी इसी से बचा जा सकता है।

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