scriptShankaracharya Swami Swaroopanand Saraswati, Narsinghpur, Gotegaon, Pa | वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ब्रह्मचारियों ने गुरु को दी अंतिम विदाई | Patrika News

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ब्रह्मचारियों ने गुरु को दी अंतिम विदाई

राजकीय शोक घोषित : देश भर से शिष्य और जनप्रतिनिधि हुए शामिल, समाधि स्थल पर मंदिर का किया जाएगा निर्माण

नरसिंहपुर

Published: September 12, 2022 11:49:58 pm

नरसिंहपुर/ गोटेगांव. ज्योतिष एवं द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को सोमवार शाम 4.30 बजे परमहंसी गंगा आश्रम में अंतिम विदाई दी गई। देश भर से हजारों अनुयायी व सनातन धर्मी उनके अंतिम दर्शन के लिए यहां पहुंचे। भजन-कीर्तन के साथ पुष्प मालाओं से सुसज्जित शंकराचार्य की पार्थिव देह को पालकी में बैठाकर समाधि स्थल तक लाया गया। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की पार्थिव देह का गंगा कुंड पर विभिन्न नदियों के जल एवं अन्य सामग्रियों से अभिषेक किया गया। उसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ब्रह्मचारी शिष्यों ने उन्हें भू-समाधि दी। उनकी अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए श्रंृगेरी पीठ के शंकराचार्य के प्रतिनिधि बीआर गौरीशंकर, काशी विद्वत परिषद के पांच पुरोहित, अग्नि अखाड़ा के महामंडलेश्वर ब्रह्मऋषि रामचंद कृष्णानंद, जूनागढ़ अखाड़ा एवं संत समिति के अध्यक्ष मुक्तानंद महाराज, द्वारका शारदा मठ से केशवानंद आदि संत झोतेश्वर पहुंचे। शासन ने शंकराचार्य के निधन पर राजकीय शोक घोषित किया है।
सीएम शिवराज और पूर्व सीएम हुए अंतिम विदाई में शामिल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर पहुंच कर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि उन्होंने लोगों को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने गरीबों, जनजातियों, दलितों की सेवाओं के लिए अनेक प्रकल्प खड़े किए। वे उद्भट विद्वान एवं अद्भुत संत थे। गौरतलब है कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनकी पार्थिव देह को तिरंगा के साथ विदाई दी गई। अंतिम संस्कार में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजयसिंह, सुरेश पचौरी, प्रहलाद सिंह पटैल, सांसद राव उदय प्रतापसिंह, कैलाश सोनी, पूर्व मंत्री गौरीशंकर विसेन, विधायक जयवर्धनङ्क्षसह, नर्मदा प्रसाद प्रजापति, संजू शर्मा, मुनमुन राय, सहित भारी संख्या में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा वे देश हित में हमेशा अपनी बात बेबाकी से रखते थे, शंकराचार्य का जाना बहुत बड़ी क्षति है।
अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिष पीठ और सदानंद द्वारका पीठ के शंकराचार्य घोषित
शंकराचार्य की समाधि से पहले पार्थिव देह के सामने उनके उत्तराधिकारियों के नामों की घोषणा की गई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ और स्वामी सदानंद को द्वारका शारदा पीठ का शंकराचार्य घोषित किया गया। गौरतलब है कि शंकाराचार्य ने अपने अपने जीवनकाल में ही उत्तराधिकारियों के नामों की घोषणा को लिपिबद्ध कर दिया था। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद सोमवार को शंकराचार्य के निज सचिव सुबुद्धानंद ने इसे सार्वजनिक रूप से इसे पढकऱ सुनाया। इस प्रकार अब शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद महाराज और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बन गए हैं।
परमहंसी गंगा आश्रम में शंकराचार्य के चिंतन से प्रकट हुईं थीं गंगा
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज को जिस परमहंसी गंगा आश्रम परिसर में भू-समाधि दी गई उस तपोस्थली का नामकरण परमहंसी गंगा आश्रम होने की एक रोचक कहानी है। राज राजेश्वरी मां त्रिपुर सुंदरी के भव्य मंदिर के नीचे आश्रम में लोग जिस कुंड और झरने को बहते हुए देखते हैं वह यहां आश्रम बनने के बाद अस्तित्व में आया। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने बताए अनुसार एक दिन उनके मन में यह बात आई कि अधिकांश सिद्ध संतों के आश्रम गंगा किनारे होते हैं और यहां तो गंगा नहीं हैं। जिसके कुछ देर बाद जब वह आश्रम में भ्रमण कर रहे थे तो उन्हें एक स्थान पर भूमि गीली नजर आई। जिस पर उन्होंने वहां जिज्ञासावश हाथ से खुदाई की तो वहां जलधारा नजर आई। जिसके बाद उन्होंने वहां कुंड का निर्माण कराया और स्थान का नाम परमहंसी गंगा आश्रम रखा। कुंड के आगे तीन और कुंड बने हैं जिसके बाद लघु सरोवरों का निर्माण कराया गया है। शंकराचार्य के बताए अनुसार इस स्थान पर पहले से बेल के वृक्ष थे और यहां अपने आप उगते थे जो दैवीय स्थल का प्रमाण देते हैं।
शंकराचार्य के जप-तप और ध्यान शक्ति का प्रतीक है च्विचार शिलाज्
परमहंसी गंगा आश्रम में स्थित विचार शिला शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के जप तप और ध्यान शक्ति का प्रतीक है। बताया जाता है कि अपनी युवा अवस्था में जब महाराज यहां जप तप व साधना में लीन थे तब वे विचार शिला पर गहन चिंतन व ध्यान किया करते थे। पूर्व में यहां एक वृक्ष भी था जिस पर वे साधना व रात्रि विश्राम किया करते थे। अब वह वृक्ष नहीं है पर शिला जरूर विद्यमान है जिसे विचार शिला के नाम से जाना जाता है। आश्रम प्रबंधन द्वारा इसे संरक्षित किया गया है। शंकराचार्य के अनुयायी इस विचार शिला के दर्शन करने आते हैं।
गोटेगांव नगर, बगासपुर, श्रीनगर, झोंतेश्वर में बंद रहे प्रतिष्ठान
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के देवलोक गमन की खबर फैलते ही समूचे क्षेत्र में जहां शोक का माहौल रहा। वहीं गोटेगांव नगर सहित बगासपुर, श्रीनगर, झोंतेश्वर में स्थानीय लोगों ने शंकराचार्य जी के सम्मान में बाजार बंद रखे। निधन की खबर सुनते ही सभी छोटे, बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान स्वस्फूर्त बंद कर दिए गए थे। क्षेत्र में शोकमय वातावरण व्याप्त था।

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