जेल को कोरोना से बचाने की सख्ती,आरटीपीसीआर रिपोर्ट नहीं तो कैदी को जेल में प्रवेश नहीं

महामारी से कैदियों को बचाने के लिए सेंट्रल जेल में नए कैदी की आरटीपीसीआर रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है। इस रिपोर्ट के आने के बाद ही कैदी को जेल के अंदर प्रवेश दिया जा रहा है।

By: ajay khare

Updated: 03 May 2021, 10:50 PM IST

नरसिंहपुर. कोरोना की दूसरी लहर में जेल में कैदियों को इस महामारी से बचाना बड़ा ही चुनौतीपूर्ण काम है, क्योंकि जेल में आने वाले नए कैदी के बारे में यह पता नहीं होता कि वह कोरोना संक्रमित है या कोरोना वाहक। ऐसे में नए कैदी से पुराने कैदियों की सुरक्षा बड़ा जटिल काम है । इस महामारी से कैदियों को बचाने के लिए सेंट्रल जेल में नए कैदी की आरटीपीसीआर रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है। इस रिपोर्ट के आने के बाद ही कैदी को जेल के अंदर प्रवेश दिया जा रहा है। रिपोर्ट आने तक नए कैदी को जेल के सामने परिसर में बनाई गई अस्थाई जेल में रखा जा रहा है। इस व्यवस्था का परिणाम यह हुआ कि पहली लहर से लेकर अभी तक की दूसरी लहर में पूरे एक साल में कोरोना से जेल में किसी कैदी की मौत नहीं हुई है जबकि इस जेल में एक साथ करीब 1300 कैदी रखे जाते हैं।
९ सेल, एक अस्थाई जेल और एक लाल गेट बैरक की व्यवस्था
जानकारी के मुताबिक जेल को इस महामारी से बचाने के लिए तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जिसके तहत ९ सेल, एक अस्थाई जेल और एक लाल गेट बैरक की व्यवस्था की गई है। जब भी पुलिस किसी नए कैदी को लेकर आती है तो उसे तब तक जेल के अंदर नहीं रखा जाता तो जब तक कि उसकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट नहीं आ जाती। ऐसे कैदी को 9 सेल में से किसी एक सेल में रख दिया जाता है। 1 दिन में जितने नए कैदी आते हैं उन्हें एक सेल में रखते हैं । अगले दिन आने वालों को दूसरी सेल में, फिर तीसरे दिन तीसरी सेल में। इसके बाद जो अस्थाई जेल बनाई गई है उसमें 30 कैदियों को रखा जाता है। लाल गेट बैरक का मतलब है खतरा यहां उन कैदियों को रखा जाता है जो कोरोना पेशेंट होते हैं । जिस बैरक में कोरोना कैदी होता है उसे कंटेनमेंट घोषित कर और उसको बंद कर दिया जाता है । यहां किस तरह से महामारी को कंट्रोल किया गया है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दूसरी लहर में अभी तक यहां केवल ४ कोरोना मरीज सामने आए हैं । सुरक्षा की दृष्टि से सभी को मास्क लगाने सोशल डिस्टेंस बनाए रखने और सैनिटाइजर का उपयोग जरूरी किया गया है। जिन कैदियों की रिपोर्ट नेगेटिव आती है उन्हें भी 14 दिन सामान्य बैरक में रखा जाता है। इसके बाद ही जेल के अंदर बैरक में प्रवेश दिया जाता है, अस्थाई जेल मुख्य जेल के सामने ही परिसर में बनाई गई है।
कैदियों की इम्युनिटी बढ़ाने दे रहे मुनगा और चुकंदर
कोरोना से बचाने कैदियों की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जहां आवश्यक दवाइयां दी जा रही हैं वहीं मुनगा का अधिक से अधिक उपयोग किया जा रहा है । मुनगा की कढ़ी व सब्जी के अलावा सलाद में अधिक से अधिक प्याज, गाजर चुकंदर सहित ऐसे खाद्य पदार्थ दिए जा रहे हैं जिनसे उनकी इम्युनिटी बढ़े। जेल में भी ऐसी व्यवस्था की गई है कि जिन सिपाहियों की ड्यूटी बाहर है वे बाहर ही ड्यूटी करते हैं और जिनकी ड्यूटी अंदर है वह अंदर ही ड्यूटी कर रहे हैं ताकि कोई कोरोना वाहक न बन सके। हंसते हंसते कट जाएं रस्ते की तर्ज पर यहां कैदियों की लाफ्टर थेरेपी और एक्यूप्रेशर थेरेपी भी की जा रही है इसके अलावा जेल वाणी के माध्यम से भी उन्हें स्वस्थ और प्रसन्न बनाए रखने का प्रयास किया जाता है ताकि उनकी आंतरिक शक्ति बनी रहे जो रोगों से लडऩे में कारगर होती है।
सीमित की जा रही जेल में कैदियों की संख्या
जेल में कैदियों की संख्या कम कर कैदियों की सुरक्षा करने के लिए हाल ही में कोर्ट ने 7 साल से कम की सजा वाले कैदियों को जेल न भेजने के निर्देश दिए , जिसकी वजह से जेल प्रशासन को काफी राहत मिली है । हाल ही में शासन ने कैदियों की पैरोल अवधि बढ़ा दी इससे भी जेल में कैदियों का दबाव कम हुआ है । यहां से 40 कैदियों को पैरोल पर रिहा किया गया है जिनके जमानतदार आ रहे हैं उन्हें रिहा किया जा रहा है।
वर्जन
कोरोना काल में जेल को संक्रमण से बचाना जरूरी है इसके लिए यह नियम लागू किया है कि नए कैदी को तभी जेल के अंदर रखा जाएगा जब उसकी कोरोना संबंधी आरटीपीसीआर रिपोर्ट आ जाएगी। तब तक कैदी को जेल परिसर में बनाई गई अस्थाई जेल में रखा जाता है। इस व्यवस्था से ही जेल को कोराना से बचा पाए हैं।
शेफाली तिवारी, जेल अधीक्षक सेंट्रल जेल

ajay khare
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned