आठवीं तक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़े, अब 9वीं कक्षा में पढऩे को लेकर हो रही परेशानी, जाने क्यों.....

आठवीं तक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़े, अब 9वीं कक्षा में पढऩे को लेकर हो रही परेशानी, जाने क्यों.....

By: Sanjay Tiwari

Published: 03 Mar 2019, 06:01 AM IST

नरसिंहपुर। निजी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में शुरू की गई अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था प्रदेश में फ्लाप साबित हुई है। 4 साल बाद भी जहां विभाग इनमें पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं कर सका है वहीं दूसरी ओर इस साल आठवीं पास करने वाले बच्चों को नवीं में प्रवेश के लिए अभी तक न तो स्कूल तय किए गए हैं और न इस संबंध में कोई निर्देश जारी किया गया है। ऐेसे में हजारों बच्चों के समक्ष आगे की पढ़ाई का संकट खड़ा हो गया है।

जानकारी के अनुसार प्रदेश के हर ब्लाक में एक प्राइमरी और एक मिडल स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की शुरुआत वर्ष 2015 से की गई थी। जहां एक ही परिसर में अंग्रेजी माध्यम के प्राइमरी और मिडल स्कूल संचालित हैं। वहां प्राइमरी से निकले बच्चों को आठवीं में पढ़ाई के लिए कोई समस्या नहीं है पर जो बच्चे आठवीं उत्तीर्ण कर रहे हैं उन्हें नवीं में प्रवेश के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। अधिकांश स्कूल ऐसे हैं जो मिडल तक हैं। दूसरी ओर जिन हाई स्कूल परिसरों में अंग्रेजी के मिडल स्कूल संचालित हैं उनमें अपने खुद के बच्चे हैं और दूसरे स्कूलों के बच्चों को प्रवेश देने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं हैं।

साल भर नहीं मिली पुस्तकें
शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में अव्यवस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन तीन सालों में कभी भी बच्चों को सभी 6 विषयों की पुस्तकों का पूरा सेट नहीं मिल सका। दूसरी ओर यह व्यवस्था भी लागू की जा रही है कि पुरानी पुस्तकें बच्चों को उपलब्ध कराई जाएं।

न शिक्षक न अतिथि का प्रावधान
उधार के शिक्षकों के भरोसे चलाए जा रहे अंग्रेजी माध्यमों के इन स्कूलों में 4 साल बाद भी न तो शिक्षक पदस्थ किए गए हैं और न ही अतिथि शिक्षकों का स्थापना में अलग से प्रावधान किया गया है। प्राइमरी और मिडल के शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति से स्कूल चलाए जा रहे हैं। बताया गया है कि इन स्कूलों के लिए अभी तक अलग से डाइस कोड नहीं दिया गया है जिससे तकनीकी कारणों से इनमें विभाग अतिथि शिक्षकों की भर्ती नहीं कर पाता। गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व एजुकेशन एंड सोशल डेवलपमेंट कमेटी ने केंद्र सरकार को यह सुझाव दिया था कि अंग्रेजी और विज्ञान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छठी कक्षा से आगे सभी कक्षाओं के लिए अंग्रेजी को अनिवार्य विषय बनाया जाना चाहिए साथ ही हर ब्लॉक में 5 किलोमीटर के दायरे के भीतर कम से कम एक अंग्रेजी माध्यम का स्कूल विज्ञान विषय के साथ होना चाहिए।

इनका कहना है
जो बच्चे आठवीं पास करेंगे उन्हें एक्सीलेंस स्कूल और अंग्रेजी माध्यम के हाई स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। अंग्रेजी माध्यम के मिडल स्कूलों के शिक्षकों की व्यवस्था की गई है।
जेके मेहर, डीईओ

Sanjay Tiwari
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