शकर,खांडसारी और गुड़ इकाइयों का धुआं कर रहा लोगों को बीमार

ग्रामीण क्षेत्रों में हर समय छाया रहता है आसमान में धुआं, श्वास लेने में होती है तकलीफ

By: ajay khare

Published: 11 Dec 2017, 10:45 PM IST

नरसिंहपुर। शुगर मिलों, खांडसारी और गुड़ भट्टियों से बड़े पैमाने पर निकलने वाले धुएं के कारण लोग श्वास और फेफड़ों संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। शुगर मिलों द्वारा जहां प्रदूषण रोकने के लिए वेट स्करबर सहित अन्य उपाय नहीं किए गए हैं वहीं खांडसारी इकाइयों और गुड़ भट्टियों में भी प्रदूषण रोकने के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। जिसका खामियाजा इस जिले के लोग भोग रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग फेफड़ों संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।

जिले में आठ शुगर मिलों सहित एक दर्जन खांडसारी यूनिट और 5545 गुड़ भट्टियां पंजीकृत हैं। हालांकि विभिन्न कारणों से करीब एक हजार भट्टियां बंद भी हो चुकी हैं। ये सभी धुएं के प्रदूषण का कारण हैं। धुएं का प्रदूषण सबसे ज्यादा शुगर मिलों फिर खांडसारी और फिर गुड़ भट्टियों से फैलता है। शुगर मिलों से होने वाले धुएं के उत्सर्जन से लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है । जानकारी के मुताबिक इन दिनों लोग सबसे ज्यादा श्वास और अस्थमा जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा उन्हें एलर्जी का भी सामना करना पड़ रहा है । ग्रामीण क्षेत्रों में जहां शुगर मिलें लगी हुई हैं वहां आसपास के इलाकों की यह स्थिति है कि हमेशा धुंध का वातावरण बना रहता है । चिमनी से निकलकर काला धुआं गांव के वायुमंडल में मिलता है। रात के समय यह प्रदूषण और भी ज्यादा बढ़ जाता है । शुगर मिलों से निकलने वाला धुआं जहां काफी ऊंचाई से निकलने के कारण बड़े क्षेत्र मे आच्छादित हो जाता है तो वहीं खांडसारी और गुड़ भट्टियों से निकलने वाला धुआं जमीन से १०-१२ फीट की ऊंचाई तक घरों,खेतों और लोगों को अपनी चपेट में लेता है। श्वास के माध्यम से यह फेफड़ों के अंदर जाकर लोगों को बीमार करता है। जिला अस्पताल में इन दिनों सबसे ज्यादा मरीज खांसी, दमा और धुएं से एलर्जी के आ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी के रिकार्ड के मुताबिक पिछले १५ दिन में खांसी, दमा और धुएं से एलर्जी के ५ हजार से ज्यादा मरीज अपना इलाज कराने आ चुके हैं।

यह हैं निर्देश
लोगों को धुएं के प्रदूषण से बचाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जहां सभी शुगर मिलों में वेट स्करबर लगाने के निर्देश हैं वहीं खांडसारी इकाइयों और गुड़ भट्टियों में भी धुएं के प्रदूषण को खत्म करने के निर्देश हैं पर शुगर मिलों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है जिसकी वजह से खांडसारी इकाइयों और गुड़ भट्टियों में भी प्रदूषण दूर करने के उपाय नहीं किए जा रहे।
------------
वर्जन
धुएं की वजह से लोगों को फेफड़ों संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। लोग अस्थमा, एलर्जी सहित श्वसन संबंधी कई तरह की बीमारियों की चपेट में आते हैं। धुएं में मिले केमिकल के कारण त्वचा,नेत्र रोग व अन्य तरह की समस्याएं भी होती हैं।
डॉ.गिरीश चौरसिया, सीएमएचओ
----------------------------------

ajay khare
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned