जिले के 15 बच्चों की अभिभावक बनी सरकार,380 बच्चों को मसीहा का इंतजार

कोरोना की दूसरी क्रूर लहर ने जिले में 400 से ज्यादा बच्चों के सिर से माता या पिता का साया छीन लिया जबकि 15 बच्चे अनाथ हो गए। इन 15 बच्चों को सरकार ने सहारा दिया है और उनकी अभिभावक बन गई है

By: ajay khare

Published: 03 Jul 2021, 10:12 PM IST

अजय खरे. नरसिंहपुर. कोरोना की दूसरी क्रूर लहर ने जिले में 400 से ज्यादा बच्चों के सिर से माता या पिता का साया छीन लिया जबकि 15 बच्चे अनाथ हो गए। इन १५ बच्चों को सरकार ने सहारा दिया है और उनकी अभिभावक बन गई है जबकि अभी तक के सर्वे में ४०० बच्चे ऐसे पाए गए जिनके या तो पिता इस दुनिया में नहीं रहे या उनसे मां का आंचल छिन गया। इनमें से २० मरीजों की सरकार स्पांसर बनेगी जबकि ३८० बच्चों को अपने मसीहा के रूप में उन समाज सेवियों का इंतजार है जो उन्हें सहारा दे सकें।
कोविड की दूसरी लहर के हाहाकार के बाद मुख्यमंत्री कोविड १९ बाल कल्याण योजना के तहत ऐसे बच्चों की जानकारी एकत्र की जा रही है जिनके माता या पिता में से कोई एक इस संसार में नहीं है। जिसके तहत जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले की ६ परियोजनाओं के अंतर्गत किए गए सर्वे में अभी तक गोटेगांव को छोड़कर ५ परियोजनाओं में ४०० बच्चे सामने आए हैं। इन बच्चों की पढ़ाई, लिखाई, जीवन यापन की व्यवस्था और उनके कॅरियर की दिशा तय करने के लिए अभी तक इनमें से २० बच्चों को सरकारी स्पांसरशिप मिली है।
हर माह मिलेगी ५ हजार रुपए की आर्थिक सहायता
जिले के जिन १५ बच्चों के अभिभावक बनने की जिम्मेदारी सरकार ने उठाई है उन्हें हर माह ५ हजार रुपए की आर्थिक सहायता सरकार से मिलेगी। सहायता राशि बंैक खाते में जमा की जाएगी। यदि बच्चे की आयु 18 वर्ष से कम है तो बच्चों की सहायता राशि चिन्हांकित संरक्षक के संयुक्त खाते में जमा की जाएगी। 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के उपरांत उसके व्यक्तिगत खाते में जमा होगी जो 21 वर्ष की आयु तक मिलेगी। बाल हितग्राही और संरक्षक को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत निशुल्क मासिक राशन मिलेगा। 18 वर्ष से कम आयु के बाल हितग्राही के मामले में संरक्षक का चिन्हांकन कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया गया है। निजी स्कूल में अध्ययनरत बाल हितग्राही को 10 हजार रुपये प्रतिवर्ष की सहायता दी जाएगी। यह वित्तीय सहायता, बाल हितग्राही को सामान्य शासकीय योजना में पात्रतानुसार प्राप्त होने वाली छात्रवृत्ति एवं अन्य लाभ के अतिरिक्त होगी।
स्पांसरशिप में हर माह मिलेगी २ हजार रुपए की आर्थिक मदद
जिले के जिन ४०० बच्चों के सिर से माता या पिता का साया छिन गया है उनमें से २० बच्चों की स्पांसरशिप सरकार की ओर से होगी। इन्हें हर माह २ हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
३८० बच्चों को सहारे की जरूरत
इन ४०० बच्चों में से ३८० बच्चों को समाज की ओर से मदद की जरूरत है। इनके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ऐसे समाजसेवियों से संपर्क कर रहा है जो इन बच्चों की आर्थिक मदद कर सकें एवं इनका जीवन संवार सकें।
ये लोग बन सकते हैं मसीहा
जिले में हर साल करोड़ों का व्यापार करने वाले ७ सुगर मिल संचालक हैं जो इनके मसीहा बन सकते हैं।
एनटीपीसी अपनी सीएसआर मद से इनकी मददगार बन सकती है।
जिले के बड़े दाल निर्यातक व्यापारी और धान मिलर्स इनका सहारा बन सकते हैं।
जिले के बड़े राजनीतिक दल अपने पार्टी फंड से इन्हें सहारा दे सकते हैं।
जिले के बड़े नर्सिंग होम संचालक इन बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्चा उठा सकते हैं।
समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रोटरी क्लब व अन्य क्लब इनके मददगार बन सकते हैं।
जिले के बड़े दानदाता इनकी मदद के लिए आर्थिक योगदान दे सकते हैं।

ऐसे बच्चों को दी जाएगी मदद
प्रभावित परिवार मध्य प्रदेश का स्थानीय निवासी हो, मुख्यमंत्री कोविड 19 योद्धा कल्याण योजना का लाभ प्राप्त करने की पात्रता न हो, बाल हितग्राही के मृतक माता पिता ऐसे शासकीय सेवक या शासकीय उपक्रम के सेवक न हों जिन्हें पुरानी पेंशन स्कीम के अंतर्गत पेंशन पाने की पात्रता हो। आयु 21 वर्ष या उस से कम , परन्तु स्नातक पाठ्यक्रम की निर्धारित अवधि तक, इनमें से जो भी कम हो और जिनके माता पिता की कोविड 19 से मृत्यु हुई हो या माता पिता का निधन पूर्व में हो गया था तथा उनके वैध अभिभावक की कोविड 19 से मृत्यु हुई हो। माता पिता में से किसी एक का पूर्व में निधन हो चुका है तथा अब दूसरे की कोविड 19 से मृत्यु हुई है, कोविड से मृत्य का अभिप्राय ऐसी किसी भी मृत्यु से है , जो 1 मार्च 2021 से 30 जून 2021 तक की अवधि में हुई हो।
अनाथ बच्चों के रहने की व्यवस्था करेगा विभाग
18 वर्ष से कम आयु के ऐसे बाल हितग्राही जिनका कोई घर या निश्चित निवास स्थान नहीं है और जिनके जीवन निर्वाह के लिए कोई साधन नहीं है और कोई भी संरक्षक उनकी देख रेख करने का इच्छुक नहीं है उन्हें जिले में संचालित बाल देख रेख संस्था में रखा जाएगा।
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वर्जन
मुख्यमंत्री कोविड 19 बाल कल्याण योजना में जिले के १५ अनाथ बच्चों को इस योजना का लाभ दिया गया है।
जिले की ६ परियोजनाओं में से ५ में सर्वे किया जा चुका है जिसमें ४०० बच्चे ऐसे पाए गए जिनके या तो पिता की मृत्यू हो गई या मां की। इनमें से २० की स्पांसर सरकार बनी है शेष के लिए समाजसेवियों से संपर्क करने की योजना बनाई गई है।
मोहनी जाधव, डीपीओ,महिला एवं बाल विकास विभाग

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