व्यापारियों ने पूजे कागजी खाते बही, पांच दिवसीय दीप पर्व का समापन

व्यापारियों ने पूजे कागजी खाते बही, पांच दिवसीय दीप पर्व का समापन

Ajay Khare | Publish: Nov, 10 2018 12:15:51 PM (IST) Narsinghpur, Narsinghpur, Madhya Pradesh, India

कागजी खाते बही का पूजन कर लिखी प्रथम प्रविष्ठि

गाडरवारा। शुक्रवार को पांच दिवसीय दीपोत्सव का समापन भाई दोज पर पूजन अर्चन से हुआ। इस मौके पर सभी व्यापारिक प्रतिष्ठानों में व्यापारियों ने दोज का पूजन अर्चन कर नए मुहूर्त का आगाज किया। मंडी में दूज पूजन के उपरांत मुहूर्त के सौदे बोली लगाकर किए गए। सभी दुकानों की साज सज्जा कर पूजन अर्चन उपरांत पटाखे फोड़े गए तथा कर्मचारियों को मिठाई बांटी गई। ट्रांसपोर्टर एवं बस मालिकों ने दीपावली से खड़े वाहनों को पूजन कर गंतव्य स्थानों पर रवाना किया। इसके अलावा लोगों ने आने दोपहिया वाहनों को भी धुलाई कर तिलक लगाकर उन पर फूलमालाएं लटकाईं। घरों घर बहनों ने अपने भाईयों के माथे पर तिलक लगाकर उन्हे मिठाई खिलाई भाईयों ने बहनों को उपहार प्रदान किए। अनेक लोग अपनी विवाहित बहनों से तिलक लगवाने उनकी ससुराल पहुंचे। दिन भर नगर में पटाखों की गूंज सुनाई देती रही। सोशल मीडिया पर भी दोज के शुभकामना संदेशों का आदान प्रदान चलता रहा। चुनावी गहमा गहमी के बीच त्यौहार का आलम बना रहा।
कागजी खाते बही का पूजन कर लिखी प्रथम प्रविष्ठि
प्रतिवर्षानुसार नगर के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर दीपावली के उपरांत दोज के पावन अवसर पर पुराने जमाने से चले आ रहे कागजी खाते बही का पूजन अर्चन कर नए वित्तीय वर्ष का शुभारंभ किया गया। हालांकि आजकल सभी व्यापारी भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे वित्तीय वर्ष का ही पालन करते हैं। लेकिन दोज के अवसर पर पूजन अर्चन के साथ प्रथम प्रविष्ठी भगवान के नाम से डालकर नए खाते बही का औपचारिक शुभारंभ किया जाता है। ज्ञात रहे कि अनेक व्यापारिक प्रतिष्ठान कम्प्यूटर पर खाते संधारित करते हैं। इसके बाद भी कागजी खाते बही भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
अब से कुछ साल पहले तक सभी व्यापारी दीपावली पूजन के बाद दोज से नए कागजी खाते बही का प्रयोग शुरू कर देते थे। लेकिन शासन के वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से 31 मार्च तक घोषित करने के बाद दीपावली व दोज मुहूर्त के खाते बही का प्रयोग एक अप्रैल से करते हैं। तब तक के लिए नए साल के खाते-बही में भगवान के नाम की प्रविष्ठि डालकर रख देते हैं। दोज के मुहूर्त के अवसर पर उक्त पुरानी परंपरा एकबार फिर से देखने को मिली।
नगर के प्रतिष्ठित सराफा व्यापारियों के बताए अनुसार पहले भारत सरकार द्वारा दीपावली से दीपावली तक खाते बही की परंपरा मान्य थी। तब दीपावली की दोज पर पहली प्रविष्ठी भगवान के नाम से अंकित की जाती थी। उस वक्त दीपावली पर खाते बही की पूजन कर परमा के दिन साल भर के हिसाब किताब की जांच कर रहतिया मिलाई जाती थी। इससे पूरे साल में हमने कितना लाभ या हानि अर्जित की इसका ज्ञान होता था। इसके बाद दोज पर पूजन अर्चन के बाद मुहूर्त की पहली प्रविष्ठी भगवान के नाम की डालते थे।
लेकिन आजकल भारत सरकार ने एक अप्रेल से 31 मार्च तक का वित्तीय वर्ष लागू कर दिया है। इससे दीपावली पर खाते बही का पूजन तो करते हैं। लेकिन उन्हे बांधकर एक अप्रेल तक के लिए रख दिया जाता है। इसी प्रकार शहर के अन्य व्यापारियों के बताए अनुसार दोज पर एक अप्रेल की तिथि में पहली प्रविष्टी इष्ट देव के नाम से करके रख दिया जाता है। कुल मिलाकर इस तरह अनेक व्यापारिक प्रतिष्ठान नए खातों में अपने इष्ट देवता के नाम पर पहली जमा की प्रविष्टी करते हैं। इसके बाद खाते बही के साथ कलम दवात का पूजन भी विधि विधान से होता है।
नगर के स्टेशनरी दुकानदारों, खाता बही विक्रेताओं ने बताया है कि आज भी व्यापारिक प्रतिष्ठानों में खाते बही का महत्व है। दीवाली के एक महीने पहले से इनकी मांग आने लगती है। बताया जाता है कि कागजी खाते बही का कागज इतना अच्छा होता है कि इस पर काली स्याही से लिखी इबारत कई सालोंं तक सुरक्षित रहती है। भले ही आज कंप्यूटर से खातों को आपरेट किया जाता है। लेकिन रोजाना के लेनदेन तथा छोटे-बड़े वित्तीय व्यवहारों को तत्काल कंप्यूटर में फीड करना संभव नहीं होता इससे भी खाते बही आज तक उपयोगी बने हुए हैं। बहरहाल दोज पर शाम को दीप जलाने के उपरांत पांच दिन के दीपोत्सव का समापन हो गया। अब देव उठनी ग्यारस पर दीप जलेंगे एवं पटाखों की गंूज सुनाई देगी।

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