क्लर्क के घर से जब्त हुए लिफाफे में लिखा था नरसिंहपुर के ट्रांसपोर्टर का नाम

फालोअप-रिश्वतखोरी के आरोप में पकड़े गए भारतीय खाद्य निगम एफ सीआई के क्लर्क किशोर मीणा के घर से सीबीआई ने नोटों से भरे जो 13 बड़े लिफाफे जब्त किए थे उनमें से एक नरसिंहपुर के एक ट्रांसपोर्टर अमर गुड्स भी था

By: ajay khare

Published: 11 Jun 2021, 09:41 PM IST

नरसिंहपुर. रिश्वतखोरी के आरोप में पकड़े गए भारतीय खाद्य निगम एफ सीआई के क्लर्क किशोर मीणा के घर से सीबीआई ने नोटों से भरे जो 13 बड़े लिफाफे जब्त किए थे उनमें से एक नरसिंहपुर के एक ट्रांसपोर्टर अमर गुड्स भी था। सीबीआई के मुताबिक मामले की जांच चल रही है और इस प्रकरण में किसी भी ट्रांसपोर्टर को क्लीन चिट नहीं दी गई ह बल्कि इन ट्रांसपोर्टरों को मिले परिवहन ठेके की शर्तों और अन्य बातों की भी जांच की जा रही है। नरसिंहपुर में स्टेशनगंज क्षेत्र में स्थित अमर गुड्स के कार्यालय में सीबीआई भोपाल की टीम ने 8 जून को दबिश दी थी। करीब 8 घंटे तक टीम ने दस्तावेजों की जांच की थी। जांच के बाद ट्रांसपोर्टर नरेंद्र राजपूत ने यह कहा था कि सीबीआई ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। जबकि सीबीआई के अधिकारी जांच पूरी होने के पहले किसी को भी क्लीन चिट देने की बात से इंकार कर रहे हैं, उनके अनुसार मामला बेहद संगीन है।
इन बिंदुओं पर की जा रही है जांच
सीबीआई एसपी मनीष श्रोती ने बताया है कि रिश्वतखोरी के आरोप में जब किशोर मीणा के घर पर जब दबिश दी गई थी तो डायरी में १३ ट्रांसपोर्टरों के नाम, पता और मोबाइल नंबर मिले थे। इसके अलावा मीणा के घर से करीब सवा करोड़ रुपये नकद भी बरामद हुए थे। यह रुपया 13 लिफाफों में था। नोटों से भरे हर लिफाफे पर ट्रांसपोर्टर का नाम लिखा हुआ था। इन्हें जब्त करने के बाद जांच तीन बिंदुओं पर शुरु की गई। पहला ये कि इन लिफाफों में जिन ट्रांसपोर्टरों के नाम लिखे हैं, यदि ये राशि उन्होंने ने दी है तो क्यों,दूसरा बिंदु ये है कि क्या ये राशि मीणा ने इन ट्रांसपोर्टरों को भिजवाने के लिए रखी थी, यदि हां तो क्यों, क्या इस राशि को वह ट्रांसपोर्टरों के माध्यम से अलग अलग जिलों में निवेश करता था। तीसरा ये कि एफसीआई से जुड़े ट्रांसपोर्टरों को ठेका किन शर्तों पर दिया गया, क्या टेंडर नियमानुसार हुआ है। इन तीन प्रमुख बिंदुओ की जांच के लिए ही नरसिंहपुर में अमर गुड्स ट्रांसपोर्ट के कार्यालय में 8 जून को सीबीआइ के सब इंस्पेक्टर के साथ तीन अन्य लोगों की टीम ने जांच की थी।2 दिसंबर 2016 से मई 2021 के बीच एफसीआई के अंतर्गत अनाज के परिवहन संबंधी कागजातों की जांच की है। सीबीआई की टीम कुछ दस्तावेजों को साथ लेकर भी गई है।
कई सालों से एक ही परिवहन कंपनी को ठेका भी जांच के दायरे में
सीबीआई की जांच का दायरा इन ट्रांसपोर्टरों को लेकर बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार सीबीआई को यह पता चला है कि एफसीआई के अधिकारी मिलीभगत कर परिवहन का ठेका एक ही व्यक्ति को कई वर्षों से प्रदान कर रहे हैं। इसी ट्रांसपोर्टर के पास यूरिया खाद आदि के परिवहन का ठेका भी हंै। सीबीआई के अधिकारी अब इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि एक ही व्यक्ति को बार बार ठेका देकर एफसीआइ के अधिकारी,कर्मचारी कोई बड़ा घोटाला तो नहीं कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सीबीआइ एसपी भोपाल को यह शिकायत भी मिली है कि वर्ष 2019-20की राइस मिलिंग के दौरान घटिया चावल भंडारण का मामला भी एफसीआइ की केंद्रीय टीम ने जांच में उजागर किया था। जिसकी जांच अभी तक सामने नहीं आई है। सीबीआई जल्द ही उस जांच रिपोर्ट को तलब करने वाली है।

वर्जन
भारतीय खाद्य निगम के क्लर्क किशोर मीणा के घर से हमें नोटों से भरे जो 13 बड़े लिफाफे मिले थे। उनमें से एक लिफाफा नरसिंहपुर के ट्रांसपोर्टर अमर गुड्स के नाम का भी था। जिस पर हमारी टीम ने 8 जून को अमर गुड्स ट्रांसपोर्ट के संचालक से पूछताछ की थी। हम ये पता कर रहे हैं कि एफसीआई के अंतर्गत परिवहन के टेंडर में कोई गड़बड़ी तो नहीं है। इसके लिए और अधिक ठोस तथ्य जुटाए जा रहे हैं।
मनीष श्रोती, एसपी, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, भोपाल

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