आज श्रावण मास का पहला सोमवार, ये हैं सिद्ध और दिव्य शिवालय जहां भगवान ने किया शिवार्चन

श्रावण मास के सोमवार को भगवान शिव के पूजन अर्चन का विशेष महत्व है। शैव भक्त श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को भूतभावन भोलेनाथ का विशेष अभिषेक व पूजन करते हैं। जिले में नर्मदा किनारे धार्मिक दृष्टि से ऐसे कई प्रसिद्ध और सिद्ध शिवालय हैं जहां भक्त पूरे श्रावण मास में पूजन करते हैं।

By: ajay khare

Published: 25 Jul 2021, 10:11 PM IST

नरसिंहपुर. श्रावण मास के सोमवार को भगवान शिव के पूजन अर्चन का विशेष महत्व है। शैव भक्त श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को भूतभावन भोलेनाथ का विशेष अभिषेक व पूजन करते हैं। जिले में नर्मदा किनारे धार्मिक दृष्टि से ऐसे कई प्रसिद्ध और सिद्ध शिवालय हैं जहां भक्त पूरे श्रावण मास में पूजन करते हैं।
बरमान के दीपेश्वर महादेव की पूजा की थी ब्रह्मा ने
बरमान में नर्मदा नदी के बीच टापू पर स्थित दीपेश्वर महादेव मंदिर का विशेष महत्व है। स्कंद पुराण के अनुसार यहां ब्रह्मा ने श्राप से मुक्त होने के लिए देवों के गुरु दीपेश्वर महादेव का पूजन अर्चन कर उन्हें प्रसन्न किया था। यह मंदिर पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, सात्विक साधना सिद्धि के लिए श्रद्धालु यहां जप तप करते हैं। जिस पर्वत पर यह मंदिर है उसे स्वर्ण पर्वत की संज्ञा दी गई है।
महादेव पिपरिया के जबरेश्वर महादेव देते हैं सिद्धि
नर्मदा किनारे स्थित जबरेश्वर महादेव मंदिर में श्रावण मास में बड़ी संख्या में भक्त शिवार्चन के लिए आते हैं। यहां विशाल शिवलिंग स्थापित हैं जिस पर लोग नर्मदा से जल लाकर अर्पित करते हैं। शिवलिंग को भेंटने के लिए भक्तों की भुजाएं छोटी पड़ जाती हैं। पूरे श्रावण मास यहां धार्मिक कार्यक्रम चलते हैं। जबरेश्वर महादेव प्राकृतिक विशाल शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं।

अद्वितीय हैआदि शंकराचार्य द्वारा प्रदत्त चंद्र मौलेश्वर शिवलिंग
आदि शंकराचार्य ने देश की चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना करने के बाद जिन चार शिष्यों को शंकराचार्य का दायित्व सौंपा था उन्हें एक एक शिवलिंग भी आदि शंकराचार्य ने प्रदान किया था। उनमें से एक शिवलिंग द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के पास है। जिन्हें चंद्र मौलेश्वर शिवलिंग के नाम से जाना जाता है। हर दिन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती सुबह के समय पूजा अर्चना करते हैं सावन सोमवार मास में शंकराचार्य द्वारा विशेष पूजा अर्चना की जाती है। शिवलिंग के दर्शन करने के लिए भक्त गण देश भर से आते हैं।
डमरू घाटी शिव मंदिर में आज १०९९ वां अभिषेक
गाडरवारा क्षेत्र में स्थित डमरू घाटी शिव मंदिर यहां का प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यहां १७ जुलाई २००० को श्रावण मास के पहले सोमवार को पहला शिव अभिषेक किया गया था। तब से अभी तक प्रत्येक सोमवार को शिवार्चन का सिलसिला चला आ रहा है। इस सोमवार को यहां १०९९ वां शिव अभिषेक किया जाएगा। यह एक अत्यंत प्राकृतिक एवं मनोरम स्थल है। श्रावण मास में यहां शिव पूजन के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं।

नर्मदा के आंचल से ब्रह्मकुंड से प्रकट हुए चंद्रमौलेश्वर महादेव
बरमान रेतघाट स्थित चंद्रमौलेश्वर मंदिर में विराजे चंद्रमौलेश्वर महादेव को नर्मदेश्वर कहा जाता है। यहां नर्मदेश्वर का आशय है नर्मदा से निकला हुआ शिवलिंग। यहां स्थापित शिवलिंग रानी दुर्गावती के शासन काल में नर्मदा नदी के सूरजकुंड के समीप स्थित बह्मकुंड से प्रकट हुए थे। नर्मदा नदी के तट पर स्थित होने के कारण इस मंदिर का शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व है। यहां बड़ी संख्या में दूर दराज से शिवभक्त पहुंचते हैं जो भक्तिभाव से मां नर्मदा में स्नान उपरांत चंद्रमौलेश्वर महादेव का नर्मदा जल से अभिषेक करते हैं। चंद्रमौलेश्वर मंदिर के पुजारी पं राकेश शर्मा ने बताया कि नर्मदेश्वर भोलेनाथ के बारे में मान्यता है यहां प्रार्थना करने पर भक्तों के दुख दूर होते हंै और उन्हें उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।

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