आदिवासी बालिकाओं को बना रहीं है सबला जिनका नाम है मंजुला

मूल रूप से कर्नाटक के मैसूर की रहने वालीं एनआरआई मंजुला राव अपने पति सुधींद्र के साथ आस्ट्रेलिया के सिडनी में टीवी पर न्यूज देख रहीं थीं। अचानक टीवी पर निर्भया कांड की खबर देख कर उनका मन विचलित हो गया। उनकी अंतर्आत्मा ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। उसी क्षण उन्होंने यह निर्णय लिया कि वे अपने देश की लड़कियों को सबला बनाने के लिए काम करेंगी ताकि फिर कोई निर्भया जैसा कांड न हो।

By: ajay khare

Updated: 07 Mar 2020, 09:01 PM IST

अजय खरे. नरसिंहपुर। मूल रूप से कर्नाटक के मैसूर की रहने वालीं एनआरआई मंजुला राव अपने पति सुधींद्र के साथ आस्ट्रेलिया के सिडनी में टीवी पर न्यूज देख रहीं थीं। अचानक टीवी पर निर्भया कांड की खबर देख कर उनका मन विचलित हो गया। उनकी अंतर्आत्मा ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। उसी क्षण उन्होंने यह निर्णय लिया कि वे अपने देश की लड़कियों को सबला बनाने के लिए काम करेंगी ताकि फिर कोई निर्भया जैसा कांड न हो।

अगले कुछ दिनों बाद ही वे भारत में थीं और यहां नरसिंहपुर के आदिवासी बेल्ट में उन्होंने इस पर काम शुरू कर दिया। इसके लिए उन्होंने गोटेगांव विकासखंड के आसपास के क्षेत्र भामा को चुना जो पूरी तरह से आदिवासी क्षेत्र है। उन्होंने यहां की लड़कियों को ताइक्वांडो की ट्रेनिंग देना शुरू की । उन्होंने ताइक्वांडो के ट्रेनर और कुछ लोगों की एक टीम बनाई जिसने यहां की बालिकाओं के साथ ही बालकों को भी ट्रेनिंग देना शुरू किया। यह सिलसिला आगे बढ़ा जिसके बाद गुर्रा फिर श्यामनगर और अब लम्हेटा गांव में आदिवासी छात्र छात्राओं को ताइक्वांडो का प्रशिक्षण दिया जा रहा है । शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की शिष्या मंजुला राव की शिक्षा दीक्षा मुंबई से हुई है जहां से उन्होंने दर्शनशास्त्र में एमए और एमबीए करने के बाद अपने पति सुधींद्र राव के साथ ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में फर्नीचर का बड़ा कारोबार शुरू किया । बालिकाओं को सशक्त बनाने के अभियान के तहत अभी तक करीब ५ साल में वे यहां के लगभग 250 लड़के -लड़कियों को ताइक्वांडो की ट्रेनिंग दिला चुकी हैं । जिसमें से 7 ब्लैक बेल्ट है, इनमें 4 लड़कियां और 3 लड़के शामिल हैं । अब यह ब्लैक बेल्ट लड़के लड़कियां इनके इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं । इतना ही नहीं यहां के बच्चों को स्कूली शिक्षा में भी मदद की जा रही है। अपने देश के लिए कुछ करने की उनकी भावना ने उन्हें यहां और भी कार्य करने के लिए भी प्रेरित किया । जल पुरुष राजेंद्र सिंह से मार्गदर्शन लेकर उन्होंने यहां झोंतेश्वर के पहाडिय़ों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगवाया है ताकि यहां पानी का संरक्षण हो सके।
वर्जन
निर्भया कांड ने मुझे इस बात के लिए प्रेरित किया कि यहां की बच्चियों को विपरीत परिस्थितियों में आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाया जाए। अपने गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के आशीर्वाद से मैं अपने काम को अंजाम दे रही हूं। हर भारतीय का फर्ज है कि वह अपने देश के लिए काम करे।
मंजुला राव

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