जीत बुराई पर अच्छाई की रामायण की सीख, संगत का पड़ता है असर

मचवारा ग्राम में चल रहे रामचरित मानस सम्मेलन में रामचरित मानस के वक्ता वृंदावन से पधारे डॉ.रामकृपाल त्रिपाठी ने भगवान श्रीराम की लीलाओं में छिपे हुए रहस्यों का सरस वर्णन किया

By: ajay khare

Published: 01 Mar 2020, 10:02 AM IST

नरसिंहपुर. मचवारा ग्राम में चल रहे रामचरित मानस सम्मेलन में रामचरित मानस के वक्ता वृंदावन से पधारे डॉ.रामकृपाल त्रिपाठी ने भगवान श्रीराम की लीलाओं में छिपे हुए रहस्यों का सरस वर्णन किया। भगवान की लीलाओं का वर्णन करते हुए मुख्य यजमान श्रीहनुमान की कृपा से श्रोता गण भगवान की भक्ति में लीन हो गए सारा वातावरण राममय हो गया। मनुष्य पर संगत का असर पड़ता है। कैकेयी अपने बेटे भरत से ज्यादा अपने सौतेले बेटे राम को प्यार करती थीं। लेकिन अपने मायके से आई दासी मंथरा के कान भरने की वजह से उन्होंने राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। पहले वे ऐसी नहीं थीं। इसे संगत का असर ही कहेंगे, जिसने कैकयी के अंदर नकारात्मकता को हावी कर दिया।यह रामायण की सबसे बड़ी सीख है। इसके बारे में हम सब बचपन से पढ़ते और सुनते आए हैं। रावण ने सीता पर बुरी नजर डाली और उनका हरण कर लंका ले गया। फिर श्रीराम रावण को पराजित कर सीता को वापस ले आए। इस घटना का सार यह है कि आप कितने भी शक्तिशाली क्यों न हो। अगर आपकी नीयत सही नहीं है, तो जीत भी आपके जीवन से कोसों दूर रहेगी। मचवारा एवं आसपास के ग्रामीणों ने आकर रामचरित मानस का श्रवण किया और पुण्य लाभ लिया ।

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