जब ईश्वर साथ होता है तो अपने आप खुल जाते हैं सारे बंधन

जब ईश्वर साथ होता है तो अपने आप खुल जाते हैं सारे बंधन

By: Amit Sharma

Published: 01 Mar 2020, 02:13 PM IST

जब ईश्वर साथ होता है तो अपने आप खुल जाते हैं सारे बंधन
काशीखैरी में भागवत कथा का समापन आज

नरसिंहपुर-अपनी रक्षा करते हुए माता पिता की रक्षा भगवान श्री कृष्ण के समान करें। जीव के कर्म के अनुसार भगवान रक्षा करता है। जब ईश्वर साथ में होता है तो बंधन खुल जाते हैं और जो माया के साथ में होता है तों माया के बंधन में बंध जाता है। जिस तरह नींद मे सोते समय स्वप्न दिखते हैं उसी तरह आंखर बंद कर लेने से माया दिखती है। माया के पैर नहीं होने पर भी चलती फिरती है। उक्त आसय के प्रवचन ग्राम काशीखैरी मे आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथाव्यास किरण देवी मानस ने व्यक्त किये। उन्होंने राक्षसी पूतना का वध करना, कंस को मारने बाले के पैदा होने की खबर मिलने पर भयभीत होने से लेकर भगवान के चौदह रूपों में दो रूप भगवान श्री राम और श्री कृष्णा की लीलाओं का वर्णन किया। श्री मद् भागवत कथा के आयोजक पंडित रमेश कुमार चौबे,भानुप्रताप पटैल,टीकाराम चंचलेश पटैल आदि ने बताया कि कथा का समापन आज एक मार्च को होगा।
मुशरान पिपरिया में जारी है प्रवचन श्रृंखला
समीपी ग्राम मुशरान पिपरिया में आयोजित भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास वेदप्रकाशाचार्य ने कहा कि जीवन की सत्यता मौत है और यही प्रश्न राजा परीक्षित ने गंगा के तट पर श्री शुकदेवजी से पूछा कि जो व्यक्ति मरने की तैयारी नहीं किया हो ऐसे व्यक्ति को क्या करना चाहिए। शुकदेवजी ने बताया कि यह पूरे संसार का प्रश्न है। कोई भी व्यक्ति इस दुनिया में जीने के लिए नहीं आया है। मरने के लिए आया है। जिस दिन से हम जन्म लेते हैं उसी दिन से हमारी मृत्यु शुरू हो जाती है। रोज हम मर ही रहे हैं। मृत्यु का मतलब है परिवर्तन। जो दुनिया हर क्षण हर पल परिवर्तन होती है। यानी जो अभी है। वह आधे घंटे बाद नहीं रहेगा। उन्होने कहा कि शास्त्र में बताया गया है कि मनुष्य सतयुग में 1 लाख वर्ष जीते थे। 21 हाथ लम्बे होते थे। समाधि लगाकर भगवान को प्रसन्न करते थे। त्रेतायुग में दस हजार वर्ष जीते थे। चौदह हाथ लम्बा होते थे। यज्ञ यज्ञादि द्वारा अपना कल्याण करते थे। द्वापर में एक हजार वर्ष की आयु बताई गई है। उस समय मंदिर पूजा द्वारा अपना कल्याण करते थे। कलियुग में 100 वर्ष की आयु बतायी गई थी। इसमें भगवान को पाने का सबसे सहज और सरल उपाय है परमात्मा की कथाए भजन, ध्यान , जप करना ही उत्तम साधन है। कथा में आज विदुर,उद्धव संवाद कपिल भगवान का जन्म ध्रुव चरित्र,सती चरित्र,अजामिल उपाख्यान,प्रहलाद चरित्र आदि की कथा श्रवण कराई गई।

Amit Sharma Reporting
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