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कंप्यूटर साइंस में बीटेक, फिर फिल्मों में आजमाई किस्मत, नहीं मिली सफलता तो राजनीति में आए चिराग, जानें कैसे बने मोदी के हनुमान

Bihar: चिराग पासवान पूर्व केंद्रीय मंत्री और देश के बड़े दलित नेता रामविलास पासवान के बेटे हैं। लोकसभा पोर्टल पर दी गई जानकारी के मुताबिक चिराग ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक ग्रेजुएट हैं।

पटनाMay 16, 2024 / 05:32 pm

Prashant Tiwari

लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के लिए 20 मई को मतदान होना है। इस दिन देश के 49 सीटों पर मतदान होना है। इस चरण में जिन दिग्गज नेताओं की किस्मत ईवीएम में कैद होगी उनमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृती ईरानी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी जैसे नाम शामिल हैं। इन्हीं दिग्गजों में एक नाम चिराग पासवान का भी है जो बिहार के हाजीपुर (सुरक्षित) लोकसभा सीट से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की तरफ से ताल ठोंक रहे हैं। बता दें कि फिलहाल इस सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस सांसद हैं।
B.Tech in Computer Science, then tried his luck in films, did not get success then Chirag came into politics, know how he became Modi's Hanuman
कंप्यूटर साइंस में बीटेक, फिर फिल्मों में आजमाई किस्मत

चिराग पासवान पूर्व केंद्रीय मंत्री और देश के बड़े दलित नेता रामविलास पासवान के बेटे हैं। लोकसभा पोर्टल पर दी गई जानकारी के मुताबिक चिराग ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक ग्रेजुएट हैं। बता दें कि राजनीति में आने से पहले चिराग मायानगरी का भी रुख भी अपना चुके हैं। लेकिन फिल्मों में सफलता न मिलने से वह वापस दिल्ली लौट आए। पिता के बड़े नेता होने के कारण उन्होंने पहली बार 16वीं लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा और जमुई सीट से सांसद बने। इसके बाद वह दोबारा 17वीं लोकसभा के लिए जमुई से ही सांसद चुने गए।
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ऐसे बने मोदी के हनुमान

बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले बताते हैं कि 2020 आते आते रामविलास पासवान की तबीयत खराब रहने लगी और उन्होंने अपनी पार्टी की कमान अपने बेटे चिराग को सौंप दी। वहीं, चिराग पासवान और जनता दल यू के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के रिश्ते कभी अच्छे नहीं रहे। लेकिन दोनों ही दल बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के हिस्सा थे और 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग के मुद्दे पर चिराग NDA से अलग हो गए और उन्होंने अपने दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया।
इसके साथ ही उन्होंने ये भी ऐलान किया कि वह बिहार में उन सीटों पर ही प्रत्याशी उतारेंगे जहां नीतीश कुमार के पार्टी के उम्मीदवार होंगे। इसका परिणाम ये हुआ की विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। वहीं, चुनाव में पीएम मोदी के इस्तेमाल को लेकर जब बिहार बीजेपी के नेताओं ने आपत्ती जताई तो उन्होंने कहा था कि वो बेश्क प्रधानमंत्री का फोटो इस्तेमाल नहीं कर सकते लेकिन प्रधानमंत्री उनके दिल में हैं और वह उनके हनुमान हैं।
2023 में NDA में वापसी
लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी में जुटी बीजेपी ने एक बार फिर से मोदी के हनुमान को अपने साथ जोड़ा और लोकसभा के चुनाव में उन्हें 5 सीट दिया। इसके पीछे कारण बताया जाता है कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को चिराग में बहुत संभावनाएं दिखती है। वह यह बात अच्छे से जानते हैं कि बिहार में दलित के साथ-साथ हर वर्ग में उनकी स्वीकार्यता है।

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