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लोकसभा चुनाव से बढ़ी संविधान के पॉकेट एडिशन की मांग, जानिए इसमें क्या है खास

Constitution Pocket Edition: लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी संविधान का जो लाल कवर वाला पॉकेट एडिशन दिखाते थे, अब उसकी मांग अचानक बढ़ गई है।

नई दिल्लीJun 12, 2024 / 02:52 pm

Shaitan Prajapat

Constitution Pocket Edition: लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी संविधान का जो लाल कवर वाला पॉकेट एडिशन दिखाते थे, अब उसकी मांग अचानक बढ़ गई है। लाल कवर वाला संविधान का यह पॉकेट एडिशन लखनऊ स्थित ईस्टर्न बुक कंपनी (ईबीसी) ने प्रकाशित किया है। चुनाव के दौरान इसकी पांच हजार से ज्यादा कॉपियां बिक चुकी हैं और अब यह एडिशन छपना बंद हो गया है। ईबीसी देश में संविधान के पॉकेट एडिशन का एकमात्र प्रकाशक है।

संविधान के पॉकेट एडिशन की खासियत

इस एडिशन की लंबाई लगभग 20 सेमी, चौड़ाई 10.8 सेमी और मोटाई 2.1 सेमी है। इस किताब का फ्लेक्सी फोम लेदर-बाउंड कोट पॉकेट एडिशन पहली बार 2009 में लॉन्च किया गया था। तब से अब तक इसके 16 एडिशन छप चुके हैं।

ईबीसी के निदेशक ने दिया ​थो ये बयान

ईबीसी के निदेशक सुमित मलिक ने कहा, भारतीय संविधान के पॉकेट एडिशन का विचार सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन का था। उन्होंने सुझाव दिया था कि हमें ऐसा एडिशन प्रकाशित करना चाहिए जिसका इस्तेमाल करना आसान हो और जिसे वकील अदालत में उद्धृत कर सकें। वर्ष 2009 में लगभग 700 से 800 कॉपी बिकी। पिछले कुछ वर्षों में, औसत बिक्री लगभग 5,000-6,000 कॉपी रही। लेकिन जब मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे कांग्रेस नेताओं द्वारा चुनावी रैलियों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस एडिशन को प्रमुखता से दिखाया गया, तो हमने पॉकेट एडिशन की मांग में अचानक वृद्धि देखी।
भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. वेणुगोपाल द्वारा लिखित इस एडिशन की प्रस्तावना में कहा गया है, मेरा मानना ​​है कि हर भारतीय के पास, चाहे वह वकील हो, जज हो या न हो, इस छोटी सी पुस्तक की एक कॉपी होनी चाहिए, जो आकार में छोटी है, लेकिन अपने मानवीय आयामों में बहुत बड़ी है। मेरा मानना ​​है कि यह पुस्तक हर भारतीय की जेब में होनी चाहिए, ताकि वह भारत के संविधान में निहित विचारों से प्रेरणा प्राप्त कर सके।

624 पन्नों में बाइबिल पेपर पर छपा

पॉकेट एडिशन 624 पन्नों में बाइबिल पेपर पर छपा है। इसमें दिल्ली के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर रणबीर सिंह द्वारा भारतीय संविधान के निर्माण की कहानी है। मलिक ने कहा कि इस एडिशन, इसके लुक और फील पर हमारे पास इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स हैं और इसे कोई भी कॉपी नहीं कर सकता। केवल ईबीसी ही इसे प्रकाशित करता है। जब भी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश विदेश यात्रा पर जाते हैं तो वे अपने समकक्ष के लिए गिफ्ट के रूप में कोट पॉकेट एडिशन ले जाते हैं। यह दुनिया भर की कई लाइब्रेरियों में भी उपलब्ध है।

राहुल गांधी ने कई रैलियों में दिखाया पॉकेट एडिशन

बता दें कि राहुल गांधी ने कई रैलियों में इस पॉकेट एडिशन को दिखाया। उन्होंने 5 मई को तेलंगाना के गडवाल और 6 मई को मध्य प्रदेश के अलीराजपुर में भी लाल कवर वाले संविधान को दिखाया था। इसके बाद उन्होंने 18 मई को दिल्ली के चांदनी चौक में एक सभा को संबोधित करते हुए भी इस किताब को दिखाया था।

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