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Mutual Fund में पैसे लगाते वक्त न कर दे ये गलती, रिटर्न के वक्त होगा पछतावा

Mutual Funds Direct or Regular Plan: म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय निवेशक अपना पूरा ध्यान सही फंड या स्कीम के सेलेक्शन पर लगा देते हैं, लेकिन कई बार इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उन्हें म्यूचुअल फंड के रेगुलर प्लान में निवेश करना है या डायरेक्ट प्लान में निवेश करना सही रहेगा। सभी […]

नई दिल्लीMay 27, 2024 / 11:12 am

Anish Shekhar

Mutual Funds Direct or Regular Plan: म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय निवेशक अपना पूरा ध्यान सही फंड या स्कीम के सेलेक्शन पर लगा देते हैं, लेकिन कई बार इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उन्हें म्यूचुअल फंड के रेगुलर प्लान में निवेश करना है या डायरेक्ट प्लान में निवेश करना सही रहेगा। सभी म्यूचुअल फंड हाउस निवेशकों को एक ही स्कीम में रेगुलर या डायरेक्ट निवेश का विकल्प देते हैं। रेगुलर प्लान में एक्सपेंस रेशियो (फीस) अधिक होता है, वहीं डायरेक्ट प्लान में एक्सपेंस रेशियो काफी कम होता है, जिससे एक ही स्कीम के रिटर्न में भारी अंतर आ जाता है।

डायरेक्ट निवेश का देते है विकल्प

रेगुलर प्लान में निवेशक उस फंड या स्कीम को लॉन्च करने वाली एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) से डायरेक्ट डील नहीं करते है। खुदरा निवेशकों और म्यूचुअल फंड हाउस के बीच में वित्तीय सलाहकार, फंड डिस्ट्रीब्यूटर, ब्रोकर, एजेंट, बैंकर जैसे कई लोग शामिल रहते हैं, जिन्हें मध्यस्थ या इंटरमीडियरी भी कहते हैं। वहीं डायरेक्ट प्लान में निवेश करने पर निवेशक और एसेट मैनेजमेंट कंपनी के बीच कोई डिस्ट्रीब्यूटर, एजेंट या ब्रोकर नहीं होता है। हालांकि इसमें निवेशकों को वित्तीय सलाहकार फंड डिस्ट्रीब्यूटर, ब्रोकर या एजेंटों की तरफ से निवेश को लेकर कोई सलाह भी नहीं मिलती है।

डायरेक्ट प्लान किफायती

म्यूचुअल फंड हाउस और निवेशक के बीच कई इंटरमीडियरी के शामिल होने से रेगुलर प्लान में निवेश से जुड़ा खर्च (एक्सपेंस रेशियो) बढ़ जाता है, क्योंकि स्कीम को निवेशक तक पहुंचाने की इस प्रक्रिया में शामिल सभी मध्यस्थों को एएमसी की तरफ से फीस या कमीशन दिया जाता है। वहीं, डायरेक्ट प्लान में कमीशन या फीस के पैसे बच जाते हैं, जिससे एक्सपेंस रेशियो कम रहता है और इनवेस्टमेंट पर नेट रिटर्न बढ़ जाता है।
किसमें अधिक मिला रिटर्न
मंथली एसआइपी

जून, 2014 क्र10,000
मई, 2024 निवेश राशि: 12 लाख
कुल कॉपरस
डायरेक्ट प्लान 35.8 लाख
रेगुलर प्लान 32.7 लाख
(स्कीम: बड़ौदा बीएवपी परिबा मिडकैप फंड)

एक्सपेंश रेशियो में इतना अंतर
स्कीम रेगुलर प्लान डायरेक्ट प्लान

लार्जकैप फंड्स 2.0% 0.9%
लार्ज-मिडकैप 1.9% 0.8%
मिडकैप फंड्स 1.9% 0.7%
मल्टीकैप फंड्स 2.0% 0.7%
फ्लेक्सीकैप फंड्स 2.0% 0.7%
स्मॉलकैप फंड्स 1.9% 0.6%
फोकस्ड फंड 2.0% 0.8%
ईएलएसएस 1.9% 0.9%
वैल्यू फंड 2.0% 0.9%
इंडेक्स फंड्स 0.8% 0.3%
(बड़े फंड हाउसेज का औसत एक्सपेंश रेशियो, इसमें मैनेजमेंट फीस, एडवायरी फीस, ट्रस्टी फीस, मार्केटिंग-सेलिंग खर्च के साथ डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन शामिल)

कौन बेहतर

विशेषज्ञों के मुताबिक, नए निवेशकों के लिए रेगुलर प्लान बेहतर होता है, क्योंकि इसमें निवेश सलाहकार और डिस्ट्रीब्यूटर निवेशकों को सही निवेश के लिए गाइड करता है। इससे निवेश का जोखिम कम हो जाता है और अधिक रिटर्न मिलने की गुंजाइश रहती है। वहीं जो निवेशक शेयर बाजार को समझते, किसी एक्सपर्ट से सलाह लेते हैं या निवेश का फैसला खुद ले सकते हैं, उनके लिए डायरेक्ट प्लान बेहतर है। डायरेक्ट प्लान में लंबी अवधि में मिलने वाला नेट रिटर्न काफी बढ़ जाता है। साथ ही निवेशकों को अपने फंड को एक्सेस करने की छूट होती है। रेगुलर फंड में निवेशक ऐसा नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इसमें कोई भी लेनदेन डिस्ट्रीब्यूटर के बिना संभव नहीं है।10:40 AM

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