scriptdiwali 2021 date time significance and importance with history | दीपावली पर्व से जुड़ी ये पौराणिक कथाएं और मान्यताएं, जिन्हें हर किसी को जानना चाहिए | Patrika News

दीपावली पर्व से जुड़ी ये पौराणिक कथाएं और मान्यताएं, जिन्हें हर किसी को जानना चाहिए

प्रकाश पर्व दीपावली को देश के विभिन्न हिस्सों में मनाने की वजह भी अलग-अलग है। इस पर्व को लेकर अलग-अलग कथाएं और मान्यताएं हैं। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक विभिन्न प्रदेशों में लोग इसे एकसाथ मगर अलग मान्यताओं के अनुसार मनाते हैं। आइए जानते हैं दीपावली पर्व को लेकर प्रचलित पौराणिक कथाएं और मान्यताएं क्या हैं।

 

नई दिल्ली

Published: November 04, 2021 03:07:33 pm

नई दिल्ली।

दीपावली पर्व को हर उम्र और वर्ग के लोग धूमधाम, उल्लास और पूरे उत्साह से मनाते हैं। खास बात यह है कि हिंदू धर्म में विभिन्न संस्कृतियों और मान्यताओं को मानने वाले हैं, मगर त्योहारों को सभी एक परंपरा से मनाते हैं। हां, सभी के तरीकों में कुछ भिन्नता हो सकती है।
diwali2021
प्रकाश पर्व दीपावली को देश के विभिन्न हिस्सों में मनाने की वजह भी अलग-अलग है। इस पर्व को लेकर अलग-अलग कथाएं और मान्यताएं हैं। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक विभिन्न प्रदेशों में लोग इसे एकसाथ मगर अलग मान्यताओं के अनुसार मनाते हैं। आइए जानते हैं दीपावली पर्व को लेकर प्रचलित पौराणिक कथाएं और मान्यताएं क्या हैं।
यह भी पढ़ें
-

Deepawali 2021 : इस शुभ मुहूर्त पर करें मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा, ये है पूजन विधि

देश के उत्तरी हिस्से में मान्यता है कि प्रभु श्रीराम अयोध्या वापस आए थे। 14 साल वनवास काटने के बाद जिस शाम को भगवान राम अयोध्या लौटे उस शाम अयोध्या नगर वासियों ने उनके स्वागत में गली-गली में दिए जला दिए। उस दिन के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में हर दीपावली का पर्व मनाया जाने लगा। यह पर्व अब देश और दुनिया के कई हिस्सों में मनाया जाता है।
ऐसी मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामम राक्षस का वध किया था। इसी खुशी में चतुर्दशी के अगले दिन दीपावली मनाने का चलन है।

यह भी पढ़ें
-

Govardhan Puja 2021: गोवर्धन पूजा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने रची थी लीला, देवता इन्द्र का अहंकार किया था दूर

पांच दिवसीय दीपावली पर्व के चौथे दिन पश्चिमी भारत में राक्षस राज बाली के पृथ्वी पर वापस आने की खुशी में दीपावली का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने उसे दूसरे लोक में भेज दिया था जिसके काफी समय बाद बाली पृथ्वी पर वापस आया था। बाली के लौटने के इस दिन को दीपावली के रूप में मनाया जाता है।
पूर्वी भारत में कई बार दीपावली के साथ ही काली पूजा भी देखने को मिलती है। कुछ जगहों पर दीपावली को काली पूजो के रूप में ही मनाया जाता है।

दीपावली पर्व देश में चाहे जिस कारण से मनाया जाता हो लेकिन सभी में एक समानता है और वह यह कि बुराई पर अच्छाई की जीत। अंधकार पर प्रकाश की विजय। शायद यही वजह है सबके रीति-रिवाज अलग होने के बाद भी सभी एकता के धागे में बंधे हैं।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

School Holidays in February 2022: जनवरी में खुले नहीं और फरवरी में इतने दिन की है छुट्टी, जानिए कितनी छुट्टियां हैं पूरे सालGod Power- इन तारीखों में जन्मे लोग पहचानें अपनी छिपी हुई ताकत“बेड पर भी ज्यादा टाइम लगाते हैं” दीपिका पादुकोण ने खोला रणवीर सिंह का बेडरूम सीक्रेटइन 4 राशियों की लड़कियां जिस घर में करती हैं शादी वहां धन-धान्य की नहीं रहती कमीAstro Tips : इन राशि वालों के रिश्ते ज्यादा कामयाब नहीं हो पाते, जानें ज्योतिष की नजर में क्या है इसका कारण?Sharp Brain- दिमाग से बहुत तेज होते हैं इन राशियों की लड़कियां और लड़के, जीवन भर रहता है इस चीज का प्रभावमौसम विभाग का बड़ा अलर्ट जारी, शीतलहर छुड़ाएगी कंपकंपी, पारा सामान्य से 5 डिग्री नीचेइन 4 नाम वाले लोगों को लाइफ में एक बार ही होता है सच्चा प्यार, अपने पार्टनर के दिल पर करते हैं राज

बड़ी खबरें

दिल्ली में हटा वीकेंड कर्फ्यू, बाजारों से ऑड-ईवन भी हुआ खत्म, जानिए और किन प्रतिबंधों में दी गई छूटराहुल गांधी ने फॉलोवर्स सीमित होने पर Twitter पर लगाया सरकार के दबाव में काम करने का आरोप, जानिए क्या मिला जवाबकेरल और कर्नाटक में 50 हजार तक सामने आ रहे नए केस, जानिए अन्य राज्यों का हालटाटा ग्रुप का हो जाएगा अब एयर इंडिया, कर्मचारियों को क्या होगा फायदा और नुकसान?झारखंड में नक्सलियों ने ब्लास्ट कर उड़ाया रेलवे ट्रैक, राजधानी एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों का रूट बदला8 साल की बच्ची से रेप के आरोप में मस्जिद के इमाम गिरफ्तार, पढ़ने के लिए मस्जिद जाती थी लड़कीUttarakhand Assembly Elections 2022: हरीश रावत की सीट बदली, देखिए Congress की नई लिस्टCG की बेटी अंकिता ने किया लद्दाख की 6080 मीटर सबसे ऊंची बर्फीली चोटी फतह, माइनस 39 डिग्री टेम्प्रेचर में भी हौसला रहा बुलंद
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.