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चेहरा और चुनौती: संवाद से बिगड़ी बात भी बना ले जाते हैं राजनाथ

Rajnath Singh: राजनाथ सिंह पुरानी पीढ़ी के उन बिरले नेताओं में हैं, जिनकी जिनकी पक्ष-विपक्ष सभी में बराबर ‘फैन फॉलोइंग’ है। वे सबसे सुलझे और संतुलन साधने वाले नेताओं में से एक है। पढ़िए नवनीत मिश्र की विशेष रिपोर्ट…

नई दिल्लीJun 16, 2024 / 11:09 am

Shaitan Prajapat

Rajnath Singh: मोदी 3.0 में सबसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और चार बार के सांसद राजनाथ सिंह को लगातार दूसरी बार रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। राजनाथ सिंह पुरानी पीढ़ी के उन बिरले नेताओं में हैं, जिनकी जिनकी पक्ष-विपक्ष सभी में बराबर ‘फैन फॉलोइंग’ है। वे सबसे सुलझे और संतुलन साधने वाले नेताओं में से एक है। यही वजह है कि अटल-आडवाणी के दौर वाली सरकार में भी वे प्रभावी रहे और आज मोदी के दौर में वे अपना मजबूत वजूद बनाते हुए वरिष्ठता में नंबर 2 पर हैं। सभी दलों से संवाद कौशल में माहिर होने के कारण गठबंधन की सरकार में उनका महत्व बढ़ा है। रक्षामंत्री के दूसरे कार्यकाल में उनके सामने कई चुनौतियां भी हैं।
उत्तर प्रदेश के चंदौली के भाभोरा गांव में 1951 में जन्मे राजनाथ सिंह 13 वर्ष की आयु से ही आरएसएस की शाखाओं में जाने लगे थे। फिजिक्स से एमएससी करने के बाद मिर्जापुर के केबी डिग्री कॉलेज में पढ़ाने लगे। लेकिन, संघ और जनसंघ से नाता बना रहा। 1974 में मुख्यधारा की राजनीति में उतरे तो इमरजेंसी में दो साल जेल में रहे। 1977 में यूपी से पहली बार विधायक बने और 1991 में भाजपा की कल्याण सिंह सरकार में शिक्षा मंत्री बने तो नकल कानून से नकल माफिया की कमर तोड़कर तहलका मचा दिया था।

हाईवे डवलपमेंट, किसान कॉल सेंटर लाए

वे यूपी के सीएम भी रहे तो अटल सरकार में केंद्रीय मंत्री भी। अटल सरकार में केंद्रीय भूतल मंत्री रहते हुए उन्होंने नेशनल हाईवे डेवपलमेंट प्रोग्राम को धरातल पर उतारा तो 2003 में देश के कृषि मंत्री के तौर पर किसान काल सेंटर और कृषि बीमा योजना लागू की। भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए 2007 में पार्टी में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने वाले राजनाथ ही थे। उनके पार्टी अध्यक्ष रहते ही भाजपा ने 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। मोदी की पहली सरकार में गृहमंत्री रहे राजनाथ ने 2015 में पैरामिलिट्री में भी महिला आरक्षण लागू किया था।

रक्षा उपकरणों के निर्यात का बनाया रिकॉर्ड

मोदी 2.0 में पहली बार रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा उपकरणों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की। मेक इन इंडिया के तहत देश में रक्षा उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अगस्त 2020 में 101 और मई 2021 में 108 सैन्य उपकरणों को प्रतिबंध लगा दिया। इससे देश में रक्षा उपकरणों का उत्पादन मिशन मोड में चला। यही वजह है कि वित्त वर्ष 2023-24 में रक्षा निर्यात 21,083 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर को छू गया था। राजनाथ सिंह का कहना है कि दूसरे कार्यकाल में हमारा 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का रक्षा उपकरण निर्यात का लक्ष्य है।

रक्षा मंत्री के सामने चुनौतियां

  • विवादित अग्निपथ स्कीम में सुधार
  • तीनों सेनाओं का तेजी से आधुनिकीकरण
  • सीमा पार से आंतकवाद का मुकाबला
  • एलएसी पर चीन के साथ चल रहे तनाव को खत्म करना
  • चीन से लगी सीमाओं पर शांति बरकरार रखना
  • रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) का पुनर्गठन
  • थिएटर कमांड की स्थापना
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