scriptganga mission chief admits dead bodies dumped in river in covid wave | गंगा मिशन के चीफ ने माना कोरोना की दूसरी लहर में गंगा में शव फेंके गए, उस दौरान नदी लाशों का 'डंपिंग ग्राउंड' बन गयी थी | Patrika News

गंगा मिशन के चीफ ने माना कोरोना की दूसरी लहर में गंगा में शव फेंके गए, उस दौरान नदी लाशों का 'डंपिंग ग्राउंड' बन गयी थी

कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश में तबाही मचाई थी। उत्तर प्रदेश भी इस लहर के चलते चपेट में आया था और यहां हजारों लोगो की जान गई थी। एक किताब में कहा गया है कि ‘गंगा लाशों को फेकने की आसान जगह’ बन गया था।

नई दिल्ली

Updated: December 24, 2021 10:04:15 am

कोरोना की दूसरी विनाशकारी लहर के दौरान उत्तर प्रदेश में गंगा नदी ‘लाशों को फेंकने की आसान जगह’ बन गई थी। ये दावा गुरुवार को हुई लॉन्च एक नई किताब में किया गया है जिसके लेखक NMCG के महानिदेशक और नमामि गंगे परियोजना के चीफ राजीव रंजन मिश्रा और IDAS अधिकारी पुष्कल उपाध्याय हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गंगा में तैरती लाशों के कारण यूपी की भाजपा सरकार की काफी आलोचना हुई थी, लेकिन सरकार इससे बार-बार इनकार करती रही है।
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Ganga river
कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश में तबाही मचाई थी। उत्तर प्रदेश में भी दूसरी लहर के दौरान हजारों लोगो की जान गई थी। इस दौरान कई लाशें गंगा में बहती नजर आई थीं, माना जा रहा था कि ये शव कोविड से मरने वालों के हैं जिन्हें इस तरह नदी में बहा दिया है, हालांकि, सरकार ने इस बात से बार– बार इनकार किया है।

चर्चा में है ये किताब:
राजीव रंजन मिश्रा 1987 बैच के तेलंगाना-कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और दो कार्यकालों के दौरान पांच साल से अधिक समय तक एनएमसीजी में सेवाएं दे चुके हैं और 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले हैं। किताब ‘गंगा- रीमेजिनिंग, रीजुवेनेटिंग, रीकनेक्टिंग” का विमोचन गुरुवार को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष विवेक देबरॉय ने किया।

इस किताब में महामारी के दौरान गंगा की स्थिति के बारे में जिक्र किया गया है और कहा गया है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान मरने वालों की संख्या बढ़ने के साथ अंतिम संस्कार करने के लिए जगह का दायरा भी बढ़ता गया। यूपी और बिहार के श्मशान घाटों पर जलती चिताओं के बीच, गंगा नदी शवों के लिए एक ‘आसान डंपिंग ग्राउंड’ बन गई। वहीं जिलों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि ‘300 से अधिक शव नदी में नहीं’ फेंके गए थे। किताब के कुछ अंश यह स्पष्ट करते हैं कि वे मिश्रा द्वारा लिखे गए थे। उदाहरण के लिए, किताब में बताया गया है: “मैं गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में कोविड-19 के खिलाफ लड़ रहा था, जब मैंने मई की शुरुआत में पवित्र गंगा नदी में तैरती लावारिस और अधजली लाशों के बारे में सुना।”

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