scriptGround Report : अपने गढ़ को फिर से हासिल करने की कोशिश में दीपेंद्र हुड्डा, 2019 दोहराने की तैयारी में बीजेपी | Ground Report: Deepender Hooda trying to regain his stronghold, BJP preparing to repeat 2019 | Patrika News
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Ground Report : अपने गढ़ को फिर से हासिल करने की कोशिश में दीपेंद्र हुड्डा, 2019 दोहराने की तैयारी में बीजेपी

Ground Report : हरियाणा की सियासत के सबसे रोचक और रोमांचक रण से रूबरू होना है तो रोहतक बेहतर जगह है। मतदाताओं से सियासी चर्चा में यही समझ आता है कि इस सीट पर हुड्डा परिवार का प्रभाव है। पढ़िए रमेश शर्मा की विशेष रिपोर्ट…

नई दिल्लीMay 24, 2024 / 02:47 pm

Shaitan Prajapat

Ground Report : हरियाणा की सियासत के सबसे रोचक और रोमांचक रण से रूबरू होना है तो रोहतक बेहतर जगह है। मतदाताओं से सियासी चर्चा में यही समझ आता है कि इस सीट पर हुड्डा परिवार का प्रभाव है। तभी तो वर्ष 2014 में मोदी की आंधी में भी रोहतक से कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा अपना किला बचाने में कामयाब रहे थे। बीजेपी पहली बार 2019 में इस सीट से खाता खोल पाई। जीती भी तो साढ़े सात हजार के बहुत मामूली अंतर से। भाजपा ने पिछली बार की तरह डॉ. अरविंद शर्मा पर विश्वास जताया है। हिसाब बराबर करने के लिए फिर दीपेंद्र हुड्डा मुकाबले में उतरे हैं। यहां से 26 उम्मीदवार मैदान में हैं। बसपा प्रत्याशी राजेश बैरागी दीपेन्द्र के समर्थन में अपना नाम वापस ले चुके हैं। इनेलो ने यहां से कोई प्रत्याशी नहीं उतारा जबकि जननायक जनता पार्टी ने रविंद्र सांगवान को टिकट दिया है। रोहतक को हुड्डा परिवार का गढ़ कहा जाता है। देश के पहले चुनाव वर्ष 1952 में दीपेंद्र हुड्डा के दादा रणबीर सिंह हुड्डा रोहतक से कांग्रेस के सांसद बनें और लगातार दो बार जीते। वर्ष 1991 के बाद लगभग इसी परिवार का दबदबा कायम है। भूपेन्द्र हुड्डा चार बार इसी सीट से जीत चुके हैं। उन्होंने तीन बार तो ताऊ देवीलाल को यहां से जबरदस्त शिकस्त दी। भूपेन्द्र हुड्डा 2004 में चौथी बार सांसद बनने के बाद विधानसभा चुनाव जीते और सीएम बने तो यह सीट बेटे के लिए छोड़ी। 2005 के उपचुनाव में दीपेन्द्र ने जीत दर्ज की। उसके बाद लगातार 2009 और 2014 में भी सांसद रहे।

मुखर हैं मतदाता

रोहतक पहुंचने के बाद बसस्टैंड के आसपास, हुड्डा सिटी पार्क, भिवानी रोड, अशोका चौक, सुभाष चौक, शौर्य मार्केट आदि क्षेत्रों में आमजन से चर्चा में महसूस हुआ कि लोग मुद्दों को लेकर बहुत मुखर हैं। अशोक चौक पर चाय की एक होटल सियासी चकल्लसबाजी के लिए काफी चर्चित है। चालीस-पचास लोग तो यहां बैठे रहना आम बात है। यहां नितिन, संजय, राहुल और अमित ने बताया चुनाव में दीपेंद्र हुड्डा शुरू से बढ़त बनाए हुए हैं। पिछला चुनाव हारने के बाद फिर से जुट गए। लोगों से नियमित संपर्क बनाए रखा। सांसद अरविंद शर्मा पर सबसे बड़ा आरोप यही है कि 5 साल संसद रहने के बाद भी आमजन के संपर्क में नहीं रहे। ओमप्रकाश ने बताया सांसद से कुछ विवाद जुड़े रहे। किसान विरोध का असर रोहतक में भी है। दीपेश बात काटते हुए कहते हैं गिनेचुने किसान ही एजेंडे के तहत विरोध कर रहे हैं। एडवोकेट मनीष गुप्ता तल्खी के साथ कहते हैं, सांसद के पास मोदी के चेहरे के अलावा जनता को बताने के लिए कोई उपलब्धि नहीं है। योगेन्द्र कुमार ने कहा, शहर में ही पानी और सीवरेज बड़ा मुद्दा है। माता दरवाजा और पहाड़ा मोहल्ला निवासी संदीप और सन्नी वाल्मिकी ने बताया, उनके क्षेत्र में दीपेंद्र लगातार संपर्क में रहते हैं। सामुदायिक भवन बनवाने में मदद भी की। सांसद कभी नहीं आए। लोगों का मानना है कि अग्निपथ योजना से सेना में सीधी भर्ती के रास्ते बंद करने का बड़ा नुकसान होगा। शहरी एरिया में मोदी के नाम पर वोट मिल सकते हैं लेकिन हुड्डा का पूरे क्षेत्र में अपना प्रभाव है।

कोसली क्षेत्र पर सबकी नजर

रोहतक लोकसभा की कोसली विधानसभा सीट रेवाड़ी जिले में है। यहां भाजपा सबसे अधिक प्रभावशाली रही है। पिछले चुनाव में अकेला कोसली ही भाजपा की नैया को पार लगा दिया था। यहां से डॉ. अरविंद शर्मा को थोक वोट मिले और दीपेन्द्र को यहां से 74,980 वोट से शिकस्त मिली। दूसरे क्षेत्रों की बढ़त पर यह अंतर भारी रहा और दीपेन्द्र मामूली अंतर से चुनाव हार गए। इस बार यहां के अहीर वोट बैंक में सेंध लगने की आशंका से भाजपा चिंतित है।

प्रत्याशियों को नफा-नुकसान

दीपेन्द्र हुड्डा का सबसे मजबूत पक्ष यह है वे हमेशा लोगों से मिलते रहे हैं। वे मिलनसार हैं और उन तक लोगों की पहुंच आसान है। उनके तीन कार्यकाल के काम की फेहरिस्त भी लम्बी है, जिससे कई लोग प्रभावित हैं। स्थानीय चेहरा हैं। गैर-जाट एक हुए तो इन्हें नुकसान हो सकता है। अरविन्द्र शर्मा को मोदी नाम का सहारा है। गैर-जाट वोटों की लामबंदी में उन्हें फायदा मिल सकता है। अहीरवाल क्षेत्र कोसली में उनका सम्पर्क बना रहा। हुड्डा के गढ़ को ध्वस्त करने का फायदा मिलेगा। गैर-जाट में कांग्रेस ने सेंध लगाई तो नुकसान होगा।

भाजपा को आ गया था पसीना

भाजपा ने पिछले दो चुनाव में प्रदेश में राजनीतिक ताकत बढ़ाई। भाजपा ने 2019 के चुनाव में रोहतक को छोड़ कर प्रदेश की सभी सीटें बड़े अंतर से जीतीं। रोहतक सीट जीतने में भाजपा को पसीने आ गए। फिर से हुड्डा परिवार अपने किले को फतह करने के लिए पूरी दमदारी के साथ खड़ा है। रोहतक लोकसभा में रोहतक जिले की महम, गढ़ी सांपला किलोई, रोहतक और कलानौर हैं। झज्जर जिले की बहादुरगढ़, बादली, झज्जर और बेरी तथा रेवाड़ी जिले की कोसली विधानसभा सीट आती हैं। रोहतक लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा साढ़े छह लाख जाट वोटर हैं। अनुसूचित जाति के ढाई लाख, ब्राह्मण मतदाता सवा दो लाख, अहीर 1.75 लाख और पंजाबी डेढ़ लाख वोटर हैं। कांग्रेस ने जाट तो भाजपा ने गैर-जाट पर दांव खेला है।

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