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ज्ञानवापी मस्जिद केसः सुप्रीम कोर्ट का सुझाव, मामला जिला जज के पास भेजा जाए, सभी पक्षों के हित सुरक्षित रखे जाएं

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर माहौल गर्म बना हुआ है। इस मामले में शुक्रवार को देश की सर्वोच्च अदालत में सुनवाई हुई। दूसरी तरफ ज्ञानवापी मस्जिद में जुमे की नमाज भी हुई, जिसको लेकर वहां कड़े सुरक्षा इंतजाम किये गए। इस दौरान वहां भारी भीड़ हो गई। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी ज्ञानवापी से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई, जिसे 6 जुलाई तक के लिए टाल दिया गया।

 

नई दिल्ली

Updated: May 20, 2022 03:54:10 pm

देश की शीर्ष अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर अहम सुनवाई शुक्रवार को हुई। तीन जजों की पीठ इस मामले पर सुनवाई की। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुझाव दिया गया। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा- हम निर्देश दे सकते हैं कि निचली अदालत प्रतिवादी के आवेदन का निपटारा करे। तब तक हमारा अंतरिम आदेश जारी रहे और तीसरी बात हम यह कहना चाहते हैं कि मामले की जटिलता को देखते हुए इसे जिला जज को भेजा जाए। जस्टिस चंद्रचूढ़ ने कहा कि, मामला जिला जज के पास भेजा जाए और सभी पक्षों के हितों को सुरक्षित रखा जाए। इससे पहले हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जहां ‘शिवलिंग’ मिलने की बात कही गई है, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। साथ ही इससे मुस्लिमों को नमाज पढ़ने की इजाजत दी थी।
Gyanvapi Mosque Case Hearing In Supreme Court
Gyanvapi Mosque Case Hearing In Supreme Court
 
सुप्रीम कोर्ट का सुझाव है कि अगर हमारे अंतरिम आदेश को जारी रखा जाता है और डिस्ट्रिक्ट जज को मामले की सुनवाई की अनुमति दी जाती है, तो यह सभी पक्षों के हितों की रक्षा करेगा। वकील वैद्यनाथन ने कहा कि, मुस्लिम पक्ष की दलील का कोई मतलब नहीं है। आयोग की रिपोर्ट पर न्यायालय विचार करे तो उचित होगा।
वहीं जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि, यही वजह है कि हम सोच रहे थे कि जिला जज मामले की सुनवाई कर सकते हैं। वे जिला न्यायपालिका में सीनियर जज हैं। वे जानते हैं कि आयोग की रिपोर्ट जैसे मुद्दों को कैसे संभालना है। हम यह निर्देश नहीं देना चाहते कि उन्हें क्या करना चाहिए।

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वकीलों से मुलाकात के बाद ऑर्डर 7 के नियम 11 के बारे में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि, ऐसे मामलों में जिला न्यायाधीश को ही सुनना चाहिए। जिला जज अनुभवी न्यायिक अधिकारी होते हैं. उनका सुनना सभी पक्षकारों के हित में होगा। CS वैद्यनाथन ने कहा कि धार्मिक स्थिति और कैरेक्टर को लेकर जो रिपोर्ट आई है, जिला अदालत को पहले उस पर विचार करने को कहा जाए।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम उनको निर्देश नहीं दे सकते कि कैसे सुनवाई करनी है. उनको अपने हिसाब से करने दिया जाए।

 
जजों को 25 साल का अनुभव
सुनवाई के दौरान तीन सुझावों के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांति और सौहार्द बनाना हमारी जिम्मेदारी है। इसलिए ऐसा ही काम करें जो सौहार्द को बढ़ावा दे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने सुझाव में कहा कि जिला जज के पास 25 साल का अनुभव है। इसलिए पहले इस मामले की सुनवाई जिला अदालत को करने दीजिए।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने सवाल किया कि कमीशन की रिपोर्ट लीक कैसे हुई। वहीं हिन्दू पक्ष के वकील ने कहा कि मुस्लिम पक्ष की दलील ठीक नहीं है।
इस बीच वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में जुमे की नमाज भी पढ़ी गई। खास बात यह है कि, एक घंटे में ही मस्जिद पूरी तरह भर गई, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ने पहुंचे। इसके बाद नमाजियों को एंट्री नहीं दी गई। उनसे दूसरी मस्जिदों में जाने की अपील की गई।
हिंदू पक्षकारों ने दिया 278 पन्नों का विस्तृत हलफनामा
इससे पहले हिंदू पक्षकारों ने अपनी ओर से 278 पन्नों का विस्तृत हलफनामा दिया है। इसमें कहा है कि गया है कि, ज्ञानवापी मामला उपासना स्थल कानून 1991 के दायरे में नहीं आता क्योंकि उपासना स्थल कानून 15 अगस्त 1947 को किसी भी धार्मिक स्थल की स्थिति को लेकर है जबकि ज्ञानवापी परिसर में स्थित देवी श्रृंगार गौरी की उपासना, पूजा और दर्शन तो पिछली सदी के आखिरी दशक तक हो रहे थे।

ऐसे में कोर्ट धार्मिक स्थलों की स्थिति के सवाल पर पहले सुनवाई करे। इसके बाद इसके कैरेक्टर और स्थिति की समीक्षा हो।

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