scriptIndia Likely to Regulate Crypto, Not Ban It | क्रिप्टोकरेंसी के खतरों पर सरकार की नजर, कानून के दायरे में लाने की तैयारी | Patrika News

क्रिप्टोकरेंसी के खतरों पर सरकार की नजर, कानून के दायरे में लाने की तैयारी

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भाजपा नेता जयंत सिन्हा की अगुवाई में वित्त संबंधी स्थाई समिति ने इसके सभी पहलुओं पर विचार किया इस नतीजे पर पहुंचे कि इसे अब रेगुलेट करने की आवश्यकता है। कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर एक व्यापक विधेयक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है।

नई दिल्ली

Updated: November 17, 2021 07:56:25 pm

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) की लोकप्रियता जिस तेजी से बढ़ ही है परंतु इससे जुड़े खतरे सरकार के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में मोदी सरकार इसे कानून के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। 29 नवंबर को शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार क्रिप्टोकरेंसी को नियंत्रित करने हेतु विधेयक ला सकती है। परंतु ये क्रिपटोकरेंसी है क्या और क्यों सरकार इससे जुड़े खतरे को देखते हुए इसे नियंत्रित करने पर विचार कर रही है?
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क्रिप्टोकरेंसी पर मोदी सरकार

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में क्रिप्टोकरेंसी के मुद्दे पर 13 नवंबर को बैठक हुई जिसमें रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय शामिल थे। इनके संयुक्त परामर्श के बाद सरकार ने इस मुद्दे पर बड़ा निर्णय लेने का मूड बना लिया है। कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर एक व्यापक विधेयक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है। इस बैठक में सरकार ने ये भी तय किया कि वो क्रिप्टोकरेंसी के विशेषज्ञों और स्टेक होल्डर्स के साथ संपर्क बनायेगी जिससे इसे समझने और नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाए जा सकें।
photo_2021-11-15_00-21-45.jpgसरकार मान्यता नहीं देगी, पर रेगुलेट करने के संकेत

प्रधानमंत्री की बैठक के बाद क्रिप्टोकरेंसी को लेकर बीजेपी नेता जयंत सिन्हा की अगुवाई में वित्त संबंधी स्थाई समिति (Standing Committee on Finance) ने इसके सभी पहलुओं पर विचार किया और इस नतीजे पर पहुंची कि क्रिप्टो और ब्लॉकचैन टेक्नोलॉजी को पूरी तरह से बैन नहीं किया जा सकता है, परंतु इसे सही तरीके से रेगुलेट करने की आवश्यकता है। इस दौरान पैनल के संसद सदस्यों (सांसदों) ने निवेशकों के पैसे की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और सामाचार पत्रों में क्रिप्टोकरेंसी को बढ़ावा देने से जुड़े विज्ञापनों पर सवाल उठाए जो युवाओं को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे में अब इससे जुड़े झूठे वादे करने और गैर पारदर्शी विज्ञापन बंद किये जा सकते हैं।
भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी को मुद्रा के रूप में अनुमति नहीं देगी जिसका अर्थ है कि अगर किसी के पास बिटकॉइन जैसी क्रिप्टो करेंसी है तो वह उसे शेयर, गोल्ड या बॉन्ड की तरह रख सकते हैं, परंतु उसे करेंसी की तरह पेमेंट नहीं कर सकते।
बिटकॉइन, इथेरियम, टेथर जैसी क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से कमाई करने वालों को जल्द ही टैक्स भी देना पड़ सकता है। अर्थात जितनी कमाई होगी उस हिसाब से लाभकर्ता को टैक्स देना होगा। इससे सरकार को भी राजस्व मिल सकेगा। इसके साथ ही दावे किये जा रहे हैं कि भारत सरकार क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर डायरेक्ट और इनडायरेक्ट दोनों तरह के टैक्स लगा सकती है। रेवेन्यू सेक्रेटरी तरुण बजाज ने इसपर जानकारी देते हुए कहा कि 'अगर आप क्रिप्टोकरेंसी में लाभ कमाते हैं, अगर आप किसी विशेष डील से पैसा बनाते हैं, तो भारत सरकार उससे टैक्स हासिल करना चाहेगी। भले ही यह कानूनी रूप से वैध हो या ना हो, लेकिन हम अपना टैक्स रेवेन्यू चाहते हैं।'
इसे मान्यता न देने के पीछे का कारण ये भी है कि अगर क्रिप्टोकरेंसी को देश की राष्ट्रीय मुद्रा के विकल्प के रूप में कारोबार करने या फिर अर्थव्यवस्था में फैलाव बढ़ाने की अनुमति दी गई, तो ये देश की संप्रभुता में दख़लंदाज़ी कर सकता है। मान्यता मिलने की स्थिति में क्रिप्टोकरेंसी का चलन बढ़ेगा जिससे राष्ट्रीय मुद्राओं के उत्पादन और आपूर्ति पर केंद्रीय बैंकों का नियंत्रण नहीं रह जायेगा।
आरबीआई की चिंता

rbi के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भारत में क्रिप्टो के बढ़ते प्रचलन पर गंभीर चिंता जताई है। आरबीआई का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी से देश की व्यापक आर्थिक ( Macro Economic) और वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) प्रभावित हो सकती है। इस करेंसी पर कई बार आरबीआई चिंता जता चुका है और सरकार को भी अवगत कराया है। RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था, ‘‘आंतरिक विमर्श के बाद आरबीआई की यह राय है कि वृहत आर्थिक एवं वित्तीय स्थिरता पर गंभीर चिंताएं हैं और इनके बारे में गहन चर्चा करने की जरूरत है।’’
रिजर्व बैंक ने क्रिप्टो करेंसी पर बैन लगाने के प्रयास भी किये थे परंतु सुप्रीम कोर्ट ने इसकी अनुमति नहीं दी।RBI ने 6 अप्रैल, 2018 को एक सर्कुलर से निर्देश जारी क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाया था। इसके बाद वर्ष 2020 में कोर्ट ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का दो साल पुराना सर्कुलर खारिज कर दिया
आरबीआई ने कई बार इस बात को दोहराया है कि किसी भी वित्तीय प्रणाली के लिए ये एक गंभीर खतरा हैं, क्योंकि वे केंद्रीय बैंकों द्वारा नियंत्रित नहीं हैं। क्रिप्टोकरेंसी पर आरबीआई की आंतरिक पैनल की रिपोर्ट भी बन रही है जो अगले महीने आने की उम्मीद है।
इसके साथ ही आरबीआई अपनी डिजिटल करेंसी लाने पर विचार कर रहा है। क्रिप्टोकरेंसी की बढ़ती लोकप्रियता के बीच आरबीआई ने कहा है कि केंद्रीय बैंक की डिजिटल करेंसी जारी करने के तौर तरीकों पर गौर कर रही है और बहुत जल्दी इस बारे में अपनी सिफारिश देगी।
अब समझते हैं कि ये क्रिप्टोकरेंसी है क्या ?

cryptos-top-venture-capitalist-is-playing-the-long-game2.jpgदुनिया के सभी लोगों को अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए और आपसी लेन-देन के लिए करेंसी की आवश्यकता होती है, जिसे हम मुद्रा कहते हैं। हर देश की अलग मुद्रा होती है, जैसे- भारत में रुपया, अमेरिका में डॉलर, सऊदी अरब में रियाल, यूरोपीय देशों में यूरो, जिसे वहां की सरकार नियंत्रित करती है। क्रिप्टोकरेन्सी इन मुद्राओं से अलग होती है, ये एक प्रकार का डिजिटल पैसा है जो कंप्यूटर लोगरिथम पर बना है। इसका कोई रेगुलेटर नहीं है और न ही कोई इसे नियंत्रित करता है। ये सब ऑटोमेटिक होता है, परंतु स्पेशल कंप्यूटर और सोफ्टवेयर के जरिए होता है। क्रिप्टो करेन्सी का कोई फिज़िकल फोर्म नहीं है, परंतु इसका डिजिटल ट्रांजेक्शन होता है। क्रिप्टो करेन्सी में ऐक्यरसी (accuracy) है और इसका डुप्लीकेट भी नहीं बनाया जा सकते, जैसा कि मुद्रा में देखने को मिला है।
ऑनलाइन जो भी ट्रांजेक्शन होते हैं वो पब्लिक लेजर में रिकार्ड होती है, जो Peer to Peer (P2P ) नेटवर्क के जरिए सभी कंप्यूटर में मेन्टेन होती है जिसे Blockchain टेक्नोलॉजी कहते हैं। अब जो इसे पब्लिक लेजर में रिकॉड करता है उसे माइनर कहते हैं और इस प्रक्रिया को माइनिंग कहते हैं। बिटकॉइन, ईथर, डॉजकॉइन और अन्य क्रिप्टो करेंसी ब्लॉकचेन नाम की एक टेक्नोलॉजी पर काम करते हैं। इसे ऐसे समझिय..
फिलहाल, सबसे ज्यादा लोग बिटकोइन खरीद रहे हैं तो इससे ही समझते हैं। यदि किसी के पास एक बिटकॉइन है तो वो डिजिटल रूप से P2P नेटवर्क के माध्यम से दूसरे यूजर को ट्रांसफर कर सकता है और इसका रिकॉर्ड ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में दर्ज रहेगा। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी और बिटक्वॉइन दोनों अलग हैं। यहां ब्लॉकचेन एक टेक्नोलॉजी है जहां डिजिटल करेंसी के अलावा किसी भी चीज को डिजिटल बनाकर उसका रिकॉर्ड रखा जा सकता है। इसे ही पब्लिक लेज़र कहते हैं जहां कॉम्प्लेक्स मैथमेटिकल सवाल कुछ सैकेंड में हल हो जाते हैं और फिर ये वर्चुअल करेंसी ट्रांजेक्शन को वेरिफाई करता है।
क्रिप्टोग्राफ के कारण लोकप्रियता बढ़ी

हालांकि, किसके नाम कितनी रकम है या पैसा है, ये कोई नहीं जान सकता क्योंकि ये सब निजता के अंतर्गत आता है। सभी का नाम सिस्टम में कोड के रूप में होता है जिसे क्रिप्टोग्राफ कहते हैं। यही एक बड़ा कारण है क्रिप्टो करेन्सी की लोकप्रियता बढ़ने का। कोई नहीं चाहता कि कोई ये जाने कि उनके पास कितना पैसा है और वही इसे नियंत्रित कर सकें। Bitcoin, Ethereum, Dogecoin, Cardano, Litecoin (LTC) क्रिपटोंकरन्सी के उदाहरण हैं जिनके दाम पहले से ही तय होते हैं।
2_1.jpgजिस करेंसी की डिमांड बढ़ती है उसकी कीमत में उछाल आता है, 9 अगस्त 2021 में जारी एक डाटा में करेंसी की मार्किट वैल्यू भी सामने आई थी जिसे देखकर आपको भी अंदाजा हो जायेगा कैसे वैल्यू में आंतर आता है।
सरकार की बड़ी चिंता यही है कि इस प्रक्रिया को कोई नियंत्रित नहीं करता जिससे अस्थायी क्रिप्टो मार्केट मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग का हथियार बन सकता है। यही कारण है कि सरकार इसे नियंत्रित करने पर विचार कर रही है क्योंकि इसे बैन करना समस्या का समाधान नहीं है। ये भी एक तथ्य है कि क्रिप्टो में किसी चेतावनी के बिना ही गिरावट देखने को मिल सकती है और निवेशक को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिसका कारण इसका कोई रेगुलेटर न होना है।
सरकार बैन करेगी या नहीं?

मोजूदा समय में क्रिप्टोकरेन्सी को लेकर कोई विशेष नियम नहीं है, परंतु इसमें निवेश पर प्रतिबंध भी नहीं लगाए जाएंगे। अब इसकी बढ़ती लोकप्रियता के बाद इसे नियंत्रित करने पर विचार किया जा रहा। संसद की स्थाई समिति की बैठक में माना गया है कि डिजिटल करेन्सी में निवेश पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
कई विशेषज्ञों के अनुसार, चूंकि क्रिप्टोकरेंसी केवल कंप्यूटर कोड का हिस्सा हैं, इसलिए इसे प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। क्रिप्टो को एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर करना पेन ड्राइव के जरिए म्यूजिक शेयर करने से जैसा है, जिसका अर्थ है कि रेगुलेटरी बैन वास्तव में लोगों की एक-दूसरे को क्रिप्टो भेजने की क्षमता को नहीं छीनेगा।
इसी वर्ष दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज Binance के सीईओ चानपेंग झाओ (Chanpeng Zhao) ने भी इस पर कहा था कि 'आप क्रिप्टो करेन्सी को एसेट, कमोडिटी, करेंसी या सिक्योरिटी कह सकते हैं। लेकिन मूल रूप से, क्रिपटोंकरन्सी की वैल्यू और लिक्वीडिटी दोनों है। दुनिया भर में करोड़ों लोग हैं जो क्रिप्टोकरेंसी रखने के इच्छुक हैं। मैं आपको कुछ बिटकॉइन भेज सकता हूं, आप इसे वापस भेज सकते हैं। आप इसे करेंसी कहें या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि कोई एग्रीमेंट है तो ये एक मीडियम की तरह काम करेगा।'
सरकार क्रिप्टोकरेन्सी से जुड़े प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध लगाती है तो इससे जुड़े ग्राहकों के लिए क्रिप्टो में व्यापार करना मुश्किल हो सकता है, परंतु पूरी तरह से रोक नहीं सकती क्योंकि इसका वैकल्पिक तरीका भी निकाला जा सकता है। ये भी एक कारण है कि सरकार इसपर नियंत्रण करने पर विचार कर रही है।
क्रिप्टोकरेंसी के फायदे क्या हो सकते हैं?

BrokerChoose की एक रिपोर्ट के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के मामले में भारत सबसे आगे है और यहां 10.07 करोड़ क्रिप्टोकरेंसी मालिक हैं। Chainalysis की स्टडी के अनुसार भारत में क्रिप्टो से जुड़े 42% ट्रांजेक्शन होते हैं और भारत में इस इंडस्ट्री में 641% की वृद्धि हुई है। इन आंकड़ो से आप समझ ही गये होंगे कि भारत में कितनी तेजी से क्रिप्टो की लोकप्रियता बढ़ रही है।
  • क्रिप्टो मुद्राएं भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं और दुनिया भर में इसका कारोबार किया जा सकता है।
  • विकासशील देशों में आर्थिक समस्याओं के विश्लेषण के आधार पर, क्रिप्टोकरेंसी विभिन्न क्षेत्रों में संभावित रूप से विकास प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं।
  • क्रिप्टो की डिस्ट्रीब्यूटेड लेज़र तकनीक उपयोगकर्ताओं द्वारा तेज़, प्रत्यक्ष लेन-देन की अनुमति देती है और हर डिजिटल लेनदेन पर नज़र रखने में भी मदद करती है, जो कि स्विफ्ट जैसे मौजूदा प्रोटोकॉल की तुलना में कहीं अधिक उन्नत और प्रभावी है।
  • COVID-19 के विनाशकारी प्रभाव के बावजूद, क्रिप्टो भारत में रोजगार पैदा कर रहा है। आज की स्थिति में, 300 से अधिक स्टार्ट-अप ने दसियों हज़ार नौकरियां पैदा की और राजस्व कमाया।
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कई जोखिम हैं परंतु कुछ लाभ भी है, सरकार द्वारा इसका नियंत्रण करना एक उचित कदम साबित हो सकता है।

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