
लद्दाख में महत्वाकांक्षी पारिस्थितिक और जीर्ण भूमि पुनर्स्थापन अभियान का शुभारंभ। (फोटो: /X/@lg_ladakh)
Spituk Village: लद्दाख की तस्वीर अब तेजी से बदलने वाली है। यह केंद्र शासित प्रदेश सिर्फ अपनी कुदरती खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अब कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में एक नई क्रांति का गवाह बन रहा है। लद्दाख के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने रविवार को लेह जिले के स्पितुक गांव में एक बेहद महत्वाकांक्षी और बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। इस प्रोजेक्ट के तहत लगभग 800 एकड़ की बंजर और सूखी जमीन को फिर से हरा-भरा और खेती के लायक बनाया जाएगा। यह कदम लद्दाख के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक गेम-चेंजर माना जा रहा है।
सैकड़ों सालों से बंजर पड़ी इस जमीन में जान फूंकने के लिए बेहद आसान और सस्ती 'मीठे पानी की इंजीनियरिंग' तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल ही में ठीक की गई इगू-फे नहर से बचने वाले अतिरिक्त पानी को मशीनों के जरिए इस सूखी जमीन तक पहुंचाया जा रहा है। इस मीठे पानी के लगातार बहाव से मिट्टी में धीरे-धीरे नमी आएगी और उसमें मौजूद जहरीले लवण बह कर बाहर निकल जाएंगे। इसके बाद वहां प्राकृतिक रूप से घास और वनस्पतियां उगने लगेंगी। कुछ ही समय में यह सूखी जमीन एक उपजाऊ और नमी बनाए रखने वाले शानदार इकोसिस्टम में बदल जाएगी।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर इस पहल की जानकारी देते हुए खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह नया कदम 'हिम सरोवर परियोजना' की शानदार सफलता पर आधारित है। इगू-फे नहर के पुनरुद्धार से पहले ही 4,300 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन की सिंचाई हो रही है। अब इस नई पहल से अंडरग्राउंड वाटर रिचार्ज होगा, मिट्टी का कटाव रुकेगा और पूरे क्षेत्र में टिकाऊ खेती के लिए बहुत सारी नई जमीन उपलब्ध हो सकेगी। यह लद्दाख के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
खेती और पर्यावरण सुधार के अलावा लद्दाख में ऊर्जा के मोर्चे पर भी एक बड़ा धमाका होने वाला है। लद्दाख जल्द ही भारत का पहला ऐसा क्षेत्र बनेगा जहां कमर्शियल लेवल पर भूतापीय ऊर्जा का इस्तेमाल होगा। उपराज्यपाल ने पुगा घाटी में 14,000 फीट की ऊंचाई पर भारत का पहला जियोथर्मल पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन के साथ हुए करार को 5 साल के लिए और बढ़ा दिया है।
यह समझौता मूल रूप से फरवरी 2021 में हुआ था, लेकिन लद्दाख के बेहद खराब और ठंडे मौसम के कारण काम में देरी हुई। अब इस प्रोजेक्ट को नई डेडलाइन के साथ फिर से रफ्तार दी जाएगी, जिससे लद्दाख को भविष्य में बिजली का एक स्थायी और स्वच्छ विकल्प मिल सकेगा। कुल मिलाकर, बंजर भूमि का जीर्णोद्धार और जियोथर्मल पावर प्लांट, ये दोनों प्रोजेक्ट लद्दाख को 'ग्रीन और सेल्फ-सस्टेनेबल' बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
लद्दाख के स्थानीय निवासियों, किसानों और पर्यावरणविदों ने इस कदम का जोरदार स्वागत किया है। उनका मानना है कि बंजर जमीन के उपजाऊ होने से क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ेगा और जियोथर्मल एनर्जी से सर्दियों में बिजली की किल्लत दूर होगी, जिससे रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
आने वाले महीनों में स्पितुक गांव की 800 एकड़ जमीन पर मिट्टी की गुणवत्ता में आ रहे सुधार और पुगा घाटी में ओएनजीसी के भूतापीय ऊर्जा प्रोजेक्ट के जमीनी काम की प्रगति पर बारीक नजर रखी जाएगी। कृषि भूमि के विस्तार के साथ-साथ जियोथर्मल ऊर्जा का विकास लद्दाख को एक 'ग्रीन और जीरो कार्बन' हब बनाने की दिशा में एक बेहतरीन मॉडल पेश करता है, जिसे देश के अन्य पहाड़ी राज्यों में भी लागू किया जा सकता है। (इनपुट: ANI)
Updated on:
24 May 2026 05:39 pm
Published on:
24 May 2026 05:08 pm
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