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Lakhimpur Kheri Violence: योगी सरकार की रिपोर्ट से खुश नहीं सुप्रीम कोर्ट, रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच का सुझाव

Lakhimpur Kheri Violence सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट में यह कहने के अलावा कुछ भी नहीं है कि और गवाहों से पूछताछ की गई है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार को कुछ सुझाव भी दिए हैं

नई दिल्ली

Published: November 08, 2021 03:19:07 pm

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा ( Lakhimpur Kheri Violence ) पर दायर स्टेटस रिपोर्ट से सुप्रीम कोर्ट खुश नहीं है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को रिपोर्ट को लेकर निराशा औऱ नाराजगी जाहिर की है। सर्वोच्च न्यायालय ने जांच की प्रगति को लेकर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह हमारी अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो रही है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट में यह कहने के अलावा कुछ भी नहीं है कि और गवाहों से पूछताछ की गई है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार को कुछ सुझाव भी दिए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में कराने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही योगी सरकार से शुक्रवार तक अपना रुख स्पष्ट करने को भी कहा है।
बता दें कि लखीमपुर खीरी केस में चार किसानों और एक स्थानीय पत्रकार सहित आठ लोग मारे गए थे।

इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए यूपी सरकार से पूछा कि केवल आशीष मिश्रा का फोन ही क्यों जब्त किया गया है और दूसरों के क्यों नहीं?
कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि केस में सबूतों का कोई घालमेल न हो, हम मामले की जांच की निगरानी के लिए एक अलग उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज को नियुक्त करने के इच्छुक हैं।
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इन नामों का दिया सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन (सेवानिवृत्त) या न्यायमूर्ति रंजीत सिंह (सेवानिवृत्त) लखीमपुर खीरी जांच की देखरेख कर सकते हैं।
SC ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में अलग-अलग FIR में गवाहों की मिलीभगत पर असंतोष व्यक्त किया है। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने सुनवाई की।
इससे पहले इसी पीठ ने 26 अक्टूबर को न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के गवाहों को संरक्षण प्रदान करने का निर्देश दिया था।

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