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NOTA ने चौंकाया! JDS, AIMIM, NCP, JDP, CPI समेत 38 बड़ी पार्टियों से ज्यादा ‘नोटा’ को मिले वोट 

Lok Sabha Elections result 2024: देशभर में लोकसभा चुनाव 2024 में BJP, कांग्रेस समेत कई पार्टियां अपनी किस्मत आजमाने वाली 53 राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों में 38 पार्टी ऐसी रहीं जिन्हें नोटा से भी कम वोट मिले।

नई दिल्लीJun 05, 2024 / 11:49 am

Akash Sharma

NOTA
Lok Sabha Elections result 2024: देशभर में लोकसभा चुनाव 2024 में BJP, कांग्रेस समेत कई पार्टियां अपनी किस्मत आजमाने वाली 53 राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों में 38 पार्टी ऐसी रहीं जिन्हें नोटा से भी कम वोट मिले। इस चुनाव में नोटा को 0.99% यानी 63 लाख से ज्यादा मिले। कह सकते हैं कि 60 लाख मतदाताओं ने किसी भी पार्टी या उनके उम्मीदवारों को इस लायक नहीं समझा कि वे उन्हें चुनें, लेकिन अपना फर्ज समझते हुए मतदान किया। 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में वोटरों ने सबसे अधिक 2.10% बिहार में नोटा पर बटन दबाया जबकि सात चरण में हुए लोकसभा चुनाव में सबसे कम मतदान होने वाले राज्य में बिहार सबसे फिसड्डी रहा था। बिहार में पूरे देश में सबसे अधिक मतदाताओं के NOTA पर बटन दबाने पर एक्सपर्ट का कहना है कि यह बताता है कि बिहार के लोग वोटिंग के प्रति उदासीन होते जा रहे हैं। वहीं नोटा पर सबसे कम नगालैंड में 0.20% वोट मिले।

UP और महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर

बता दें कि कम मतदान के मामले में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे लेकिन इन दोनों राज्यों में अच्छी बात यह रही कि यहां के वोटरों ने NOTA पर वोट देने में बहुत अधिक दिलचस्पी नहीं दिखाई। दोनों राज्यों में एक फीसदी से भी कम नोटा पर बटन दबाया गया। उत्तर प्रदेश में 0.71% और महाराष्ट्र में 0.83% नोटा पर वोट पड़े। वोटिंग के मामले में इस बार देशभर में पश्चिम बंगाल टॉप पर रहा। इस राज्य में भी वोटरों ने नोटा पर एक फीसदी से कम 0.90% वोट दिया।

क्या है NOTA


निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2013 के विधानसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में नोटा (NOTA) मतलब इनमें से कोई नहीं का विकल्प उपलब्ध करवाया था। नोटा का बटन दबाने का मतलब है कि वोटर को चुनाव लड़ रहा कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है। वहीं कई लोग नोटा को नेगेटिव वोट मानते हुए इसे वोट बेकार करना मानते हैं।
देश में अभी तक नोटा का ज्यादा प्रभाव देखने को नहीं मिला क्योंकि इससे मतदाता अपना असंतोष तो जता देते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ता। नोटा को मिले वोट सीधे तौर पर चुनाव के नतीजों को प्रभावित नहीं करते हैं। सबसे ज्यादा वोट हासिल करने वाला उम्मीदवार ही विजेता घोषित किया जाता है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट की मानें तो साल 2013 में नोटा को चुनाव का हिस्सा बनाने के बाद साल 2014 के चुनाव में नोटा को 1.08 फीसदी यानि 60,00197 वोट मिले थे। वहीं साल 2019 के लोकसभा चुनाव में 1.06 फीसदी यानि 65,23,975 वोट मिले थे।

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