भारत को अभी भी NSG में एंट्री की आस, 2016 में होने वाली स्पेशल बैठक में होगी चर्चा

भारत को अभी भी NSG में एंट्री की आस, 2016 में होने वाली स्पेशल बैठक में होगी चर्चा

pawan kumar pandey | Publish: Jun, 26 2016 08:01:00 PM (IST) राष्ट्रीय

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने के प्रारंभिक प्रयास में अड़चन आने के बावजूद भारत को पूरा भरोसा है कि वह इसकी सदस्यता हासिल कर लेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'सोल में हाल में सम्पन्न हुए पूर्ण अधिवेशन से हमें यह संदेश मिला है कि हमें अपने प्रयासों में और तेजी लानी होगी।

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने के प्रारंभिक प्रयास में अड़चन आने के बावजूद भारत को पूरा भरोसा है कि वह इसकी सदस्यता हासिल कर लेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने साक्षात्कार में कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि हम परमाणु आपूतिकर्ता देशों के समूह में शामिल हो जाएंगे क्योंकि एक देश को छोड़कर किसी ने हमारे दावे का विरोध नहीं किया है। 



कूटनीति निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया 

विकास ने कहा, 'सोल में हाल में सम्पन्न हुए पूर्ण अधिवेशन से हमें यह संदेश मिला है कि हमें अपने प्रयासों में और तेजी लानी होगी। एनएसजी में भारत के शामिल होने पर लगभग आम सहमति बन गयी थी।'  स्वरूप ने सोल में भारतीय कूटनीति के विफल रहने की बात से असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि कूटनीति निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है और किसी भी अंतरराष्ट्रीय समूह में शामिल होने के लिए सर्वसम्मति बनाने में समय लगता है। उन्होंने इस संबंध में शंघाई सहयोग संगठन और मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण प्रणाली का उल्लेख किया, जिसमें भारत लंबे प्रयास के बाद प्रवेश कर पाया। 



चीन को छोड़कर किसी भी देश ने विरोध नहीं किया

 स्वरूप ने कहा कि एक (चीन)को छोड़कर किसी भी देश ने भारत के दावे का विरोध नहीं किया। उनमें से कुछ ने केवल प्रक्रियागत मुद्दे उठाए थे। यदि एक देश ने हमारे दावे का विरोध नहीं किया होता तो सोल में ही निर्णय हो जाता। उन्होंने कहा कि भारत चीन को यह संदेश देना जारी रखेगा कि सहयोग और संबंध दोतरफा प्रक्रिया हैं। उन्होंने एनएसजी में भारत की सदस्यता के दावे में अड़चन डालने के लिए परमाणु अप्रसार संधि का इस्तेमाल नहीं करने का आग्रह करते हुए कहा कि संधि का क्रियान्वयन और उस पर अमल करना दो अलग मामले हैं। भारत ने इस संधि पर समझौता किए बिना उसकी सभी शर्तों को लागू किया है और एनएसजी ने 2008 में इस बात को मान्यता देते हुए भारत को महत्वपूर्ण छूट दी थी। 



एनएसजी पर उम्मीद कायम : इस साल होगी विशेष बैठक

भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने के रास्ते में चीन के अवरोध के बावजूद उम्मीद कायम है। सूत्रों के मुताबिक मैक्सिको के सुझाव पर इस साल के आखिर तक एनएसजी की विशेष बैठक बुलाई गई है, जिसमें एनपीटी (परमाणु अप्रसार संधि) पर साइन नहीं करने वाले भारत जैसे देशों को समूह में दाखिला देने पर चर्चा होगी। इतना ही नहीं, एनएसजी ने भारत की सदस्यता पर अनौपचारिक चर्चा के लिए एक पैनल भी बनाया है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक चीन ने मैक्सिको के इस सुझाव का भी विरोध किया, लेकिन अमरीका समेत कई अन्य देशों ने इसका समर्थन किया। हाल ही सोल में हई बैठक में चीन समेत दस देशों ने भारत की सदस्यता का विरोध जताया था।



इसलिए जरूरी है एनएसजी

48 देशों वाला एनएसजी न्यूक्लियर सेक्टर से जुड़े बड़े मुद्दों की निगरानी करता है। इसके सदस्यों को न्यूक्लियर टेक्नॉलजी के ट्रेड और एक्सपोर्ट की इजाजत होती है।



(FILE PHOTO)



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