मुलायम आजमगढ़ से सांसद, कारण मोदी!

 मुलायम आजमगढ़ से सांसद, कारण मोदी!

| Publish: Jan, 16 2015 11:59:00 AM (IST) राष्ट्रीय

मोदी सुनामी का खौफ विरोधी दलों को अभी तक सता रहा है।

लखनऊ। लोकसभा चुनाव दो सीटों मैनपुरी और आजमगढ से जीतने वाले सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के सामने आजमगढ़ सीट बरकरार रखना मजबूरी होगी। यादव को जल्दी ही एक सीट से इस्तीफा देना होगा।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि यादव मैनपुरी सीट से ही इस्तीफा देंगे क्योंकि सपा उपचुनाव में आजमगढ़ की अपेक्षा मैनपुरी सीट आसानी से जीत सकेगी। यादव ने आजमगढ में वहां के प्रभावशाली और चार बार सांसद रह चुके भाजपा के रमाकांत यादव को कडे मुकाबले में करीब 63 हजार मतों से हराया था।

राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार यादव यदि आजमगढ सीट छोड़ते हैं तो रमाकांत यादव के जीतने की सम्भावना बढ जायेगी क्योंकि वह चार बार से सांसद रहे हैं और सबसे बड़ा कारण मोदी सुनामी भी है।

मैनपुरी से लड़ेगा मुलायम का भतीजा
यादव मैनपुरी से लगातार पांचवी बार तीन लाख से अधिक मतों से जीते हैंं। मैनपुरी उनका गढ माना जाता है। मैनपुरी से सटे इटावा जिले में उनका पैतृक गांव सैफई है और मैनपुरी के करहल कस्बे में कई वर्ष अध्यापक रहे हैं। इसलिए उनकी पार्टी के लिए उपचुनाव में आजमगढ की अपेक्षा मैनपुरी जीतना आसान होगा।

यादव के एक सीट छोडने के साथ ही उनके कुनबे के एक और सदस्य के सक्रिय राजनीति में आने की अटकलें तेज हो गयी हैं। माना जा रहा है कि यादव के स्थान पर उनके भतीजे तेजबीर सिंह यादव उर्फ तेजू मैनपुरी से उपचुनाव लडेगे। तेजू सपा अध्यक्ष के मैनपुरी में चुनाव प्रभारी भी रहे हैं।

सपा अध्यक्ष के छोटे बेटे प्रतीक यादव के भी उपचुनाव लडने के कयास लगाये जा रहे है लेकिन पार्टी के अधिकतर नेताओं का कहना है कि मैनपुरी लोकसभा सीट के उपचुनाव में तेजू ही मुलायम सिंह यादव के उत्तराधिकारी होंगे।

राजनीति में वंशवाद का मुलायाम फार्मूला
यादव के परिवार के सदस्य उपचुनाव के जरिये ही पहली बार विधायक या सांसद बने और इसके लिए वह पहले दो सीटों से लडे और बाद में एक छोड़ दी और उसी से उपचुनाव में परिवार के सदस्य को विधायक या सांसद बनवा दिया।

सपा अध्यक्ष ने सबसे पहले यह प्रयोग अपने छोटे भाई शिवपालसिंह यादव के लिए किया। नब्बे के दशक में सपा अध्यक्ष बदायूॅ जिले की गुन्नौर तथा इटावा की जसवन्तनगर सीट से लडे। दोनों सीट से जीतने के बाद जसवन्तनगर छोड दी और उनके छोटे भाई उपचुनाव में विधायक बन गये। इसके बाद यादव बदायूॅ और संभल सीट से लोकसभा चुनाव लडे।

दोनों से जीतकर संभल सीट छोड दी और उपचुनाव में अपने छोटे भाई प्रो. रामगोपाल यादव को सांसद बनवा दिया। इसके बाद वह मैनपुरी और कन्नौज से चुनाव लडे। दोनों जीतकर कन्नौज सीट 1999 में छोड दी जहां के उपचुनाव में यादव के पुत्र अखिलेश यादव सांसद बन गये।

यादव ने अपने भतीजे धर्मेन्द्र सिंह यादव को भी इसी तरह बदायूॅ से सांसद बनवाया। सन 2012 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश यादव ने कन्नौजसीट छोडी और उनकी पत्नी डिम्पल यादव उपचुनाव में निर्विरोध सांसद बन गयीं। हालांकि इससे पहले उनके पति अखिलेश यादव के इस्तीफे से खाली हुई फिरोजाबाद सीट के उपचुनाव में वह पराजित हो गयी थीं।
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