सांसदों के 'अच्छे दिन' पर PM ने लगाया ग्रहण, नहीं बढ़ेगी दोगुनी सैलरी!

सांसदों के वेतन बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री ने एतराज जताया है। पीएम मोदी का कहना है कि अपने सैलरी पैकेज के बारे में सांसदों को खुद फैसला नहीं करना चाहिए। सांसदों की सैलरी का फैसला पे कमीशन या उस जैसी कोई और बॉडी करे, जो वक्त के हिसाब से इसमें बढ़ोतरी करती रहे।

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Published: 03 May 2016, 11:56 AM IST

देश के सांसदों के अच्छे दिन पर पीएम मोदी ने रोक लगा दी है। दरअसल सांसदों के वेतन बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री ने एतराज जताया है। बता दें कि संसद की विशेष समिति ने सांसदों के वेतन में बढ़ोत्तरी की सिफारिश की थी, जिसे वित्त मंत्रालय की ओर से अप्रूव कर दिया गया था, सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहर लगना बाकी था। 

एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि अपने सैलरी पैकेज के बारे में सांसदों को खुद फैसला नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि सांसदों की सैलरी का फैसला पे कमीशन या उस जैसी कोई और बॉडी करे, जो वक्त के हिसाब से इसमें बढ़ोतरी करती रहे।  

पीएम मोदी ने दिया यह सुझाव

सांसदों की सैलरी बढ़ाने की सिफारिश पर एतराज जताते हुए पीएम ने सुझाव दिया है। मोदी का सुझाव है कि सांसदों की सैलरी को प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट या कैबिनेट सेक्रेटरी जैसी पोस्ट की सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी से लिंक कर देना चाहिए। बता दें कि प्रधानमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद संसद के अगले सत्र में इसके लिए बिल लाया जाना था।

क्या थी संसद की विशेष समिति की सिफारिश?

संसद की विशेष समिति ने सांसदों के वेतन में बढ़ोत्तरी की सिफारिश की थी। इसके तहत सांसदों का वेतन 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपए प्रति माह करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही संसदीय क्षेत्र का भत्ते को 45 हजार से बढ़ाकर 90 हजार करने की अनुशंसा की गई। 

दोगुनी हो जाएगी सांसदों की सैलरी

विशेष संसदीय समिति की इन सिफारिशों को अगर मान लिया जाता है तो सांसदों के वेतन में दुगुनी बढ़ोत्तरी हो जाएगी। अभी सांसदों का कुल वेतन भत्ता 1 लाख 40 हजार है, जो बढ़कर सीधा  2 लाख 80 हजार रुपए हो जाएगा। योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली समिति ने पेंशन में भी 75 फीसदी बढ़ोत्तरी करने का सुझाव दिया है।

6 साल पहले बढ़ी थी सैलरी

बता दें कि छह साल पहले सांसदों के वेतन में बढ़ोत्तरी हुई थी। कमेटी की सिफारिशों को लेकर सभी मंत्रालयों से राय लेने के लिए एक कैबिनेट नोट भेजा गया है। मंत्रालयों से अप्रूवल मिलने के बाद इसे संसद के सामने रखा जाएगा।





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