देश के कोने-कोने से आ रही हैं महिलाआें के बाल काटने की खबरें, मनोविज्ञान की नजर में ये है सच

देश के कोने-कोने से आ रही हैं महिलाआें के बाल काटने की खबरें, मनोविज्ञान की नजर में ये है सच

Abhishek Pareek | Publish: Aug, 02 2017 08:01:00 AM (IST) राष्ट्रीय

मनोविज्ञान इस मामले को एक अलग धरातल पर ले जाता है आैर इसे अफवाह करार देता है, जिसे लोग सच मान लेते हैं।

राजस्थान में महिलाआें के बाल कटने का जो सिलसिला शुरू हुआ था वो अब दूसरे राज्यों तक जा पहुंचा है। बाल काटने की खबरों की अब जैसे बाढ़ आ गर्इ है। राजस्थान के बाद अब हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश आैर मध्यप्रदेश से भी इस तरह की कर्इ खबरें सामने आ रही हैं। इस दौरान कर्इ महिलाएं बेहोश भी हो गर्इं। हालांकि मनोविज्ञान इस मामले को एक अलग धरातल पर ले जाता है आैर इसे अफवाह करार देता है, जिसे लोग सच मान लेते हैं। इसके कारण ही वो स्थिति पैदा होती है जिसके चलते हर कोर्इ इसकी चपेट में आ जाता है। मनोविज्ञान का मानना है कि मौखिक या फिर कुछ अन्य जरियों से ये अफवाहें लोगों तक पहुंचती है आैर हर कोर्इ इसे सच मानने लगता है।





मनोविज्ञान में इस तरह की घटनाआें को मास हिस्टीरिया आैर मास सोशियोजेनिक इलनेस कहते हैं। इसमें लोग अपना पूरा ध्यान एक तरह के काल्पनिक घटनाक्रम पर फोकस कर देते हैं आैर इसी के चलते भ्रामक स्थिति पैदा होती है, जिसके बाद पूरा का पूरा समाज इस तरह की घटनाआें को सच मान लेता है।





इस तरह की घटनाआें के इतने बड़े पैमाने पर फैलने का भी एक अलग कारण है। ये घटनाएं अचानक से इतनी बड़ी संख्या में लोगों को ले लेती हैं क्योंकि इन्हें काफी संवेदनशील बनाकर पेश किया जाता है। बहुत ही मामूली या फिर सामान्य सी बात को बेहद भावुक आैर काल्पनिक कथाआें के साथ नया आकार दिया जाता है। साथ ही इन बातों को नमक मिर्च के साथ पेश किया जाता है। इसके चलते एक आम आदमी खुद को बचा नहीं पाता है आैर इस तरह की घटनाआें को सच मानकर खुद भी अफवाहों के साथ बहने लगता है।





एेसी अफवाहों में कुछ लोग अपना उल्लू भी सीधा करने लगते हैं आैर इनके चलते भी एेसी अफवाहों को बल मिलता है। एेसी ही घटना करौली के एक निजी अस्पताल में सामने आर्इ जहां पर एक महिला सफार्इकर्मी ने छुट्टी के लिए खुद के बालों की चोटी काट ली। हालांकि ये पूरा मामला सीसीटीवी में कैद हो गया आैर महिला पकड़ी गर्इ।





अगर हम देखें तो कुछ सालों पहले मंकी मैन आैर मुंह नोचवा जैसी अफवाहें इसी तरह से फैली थी। उस वक्त लोग घरों के बाहर पहरा देने आैर छत पर सोने के बजाय बंद कमरों में सोने लगे थे। हालांकि वक्त गुजरने के साथ ये अफवाहें इस तरह से बंद हो गर्इ जैसे कभी थी ही नहीं। आज उनकी चर्चा तक नहीं है।
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